मानसून पूर्व नालों की सफाई अधूरी, जलजमाव को सशंकित हैं नवादावासी
नवादा शहर में मानसून की दस्तक से पहले नालों की सफाई का काम पूरा नहीं हो सका है। नगर परिषद ने दावा किया है कि केवल आधे नाले की सफाई हुई है, जिससे जलजमाव की समस्या बढ़ गई है। नगरवासियों का मानना है कि शहर को एक आधुनिक ड्रेनेज मास्टर प्लान की आवश्यकता है।

मानसून की दस्तक अब बस कुछ ही दिन दूर है, लेकिन नवादा शहर में मानसून पूर्व नालों की सफाई यानी उड़ाही का काम अब तक पूरा नहीं हो सका है। नगर परिषद के दावों के अनुसार अब तक आधे नाले की ही सफाई हो सकी है, जिसने शहरवासियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। हाल ही में हुई मानसून पूर्व की बारिश ने नगर परिषद की तैयारियों की पोल खोल दी थी, जब शहर के मुख्य मार्ग और कई मोहल्ले तालाब में तब्दील हो गए थे। अब लोगों को डर है कि यदि भारी बारिश हुई, तो पूरा शहर एक बार फिर जलमग्न हो जाएगा। अब आमजनों का मानना है कि नवादा को जलजमाव की इस पुरानी समस्या से बचाने के लिए शहर को अब एक व्यापक और आधुनिक ड्रेनेज मास्टर प्लान की जरूरत है। जब तक अतिक्रमण हटाकर बड़े नालों को पुनर्जीवित नहीं किया जाता और सीवर सिस्टम पर निवेश नहीं होता, तब तक हर साल मानसून शहरवासियों के लिए डर का पर्याय बना रहेगा। हालांकि इस बारे में भी नगर परिषद ने कदम बढ़ा देने का दावा किया है, भले ही इस पर अमल में विलम्ब है।
पुरानी योजनाएं पड़ीं ठप, ड्रेनेज सिस्टम का अभाव
नवादा शहर में जलनिकासी के लिए वर्तमान में जो भी व्यवस्था है, वह दशकों पुरानी और अपर्याप्त है। आजादी के बाद शहर की जरूरत के हिसाब से जो नाले बने थे, वे अब दम तोड़ रहे हैं। वर्तमान में शहर के सभी 44 वार्डों में कुल मिलाकर लगभग 20 बड़े नाले और करीब 410 छोटे नाले मौजूद हैं। लेकिन जनसंख्या और मकानों के बढ़ते दबाव के कारण ये सभी योजनाएं अब कारगर साबित नहीं हो रही हैं। कई नाले विस्तार की बाट जोह रहे हैं, तो कई पूरी तरह जीर्ण-शीर्ण होकर जीर्णोद्धार की कगार पर हैं। विडंबना यह है कि बढ़ते क्षेत्रफल के बावजूद अब तक शहर में कोई आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम या सीवर लाइन विकसित नहीं की जा सकी है।
बरहगैनिया पइन पर अतिक्रमण की मार
शहर का सबसे बड़ा नाला मानी जाने वाली बरहगैनिया पइन कभी नवादा की लाइफलाइन हुआ करती थी। इसकी गहराई 08 से 10 फीट तक है, जो पूरे शहर का पानी निकालने में सक्षम है। विशेषकर वार्ड नंबर 08 से गुजरने वाले इस पइन की अगर पूरी तरह सफाई हो जाए, तो शहर भर को जलजमाव से बड़ी राहत मिल सकती है। लेकिन दुर्भाग्यवश, यह पइन अब अतिक्रमण का शिकार होकर कई जगहों पर संकीर्ण और कुछ स्थानों पर तो लगभग विलुप्त हो चुकी है। मोहल्लों की नालियों का पानी इस पइन तक पहुंच ही नहीं पाता, जिससे शिव नगर, नवीन नगर और पटेल नगर जैसे पॉश मोहल्ले भी स्थायी जलजमाव और प्रदूषण का दंश झेलने को अभिशप्त हैं।
निचली जमीन और ऊंची सड़कों ने बढ़ाई मुसीबत
शहर के पुराने मोहल्लों में स्थिति और भी विकराल है। बाद में बनी सड़कें और नए मकान ऊंचे हो गए हैं, जबकि पुराने नाले नीचे रह गए हैं। इस निचली जमीन वाली स्थिति के कारण बरसात का पानी नालों के जरिए बाहर जाने के बजाय, उल्टा सड़कों का गंदा पानी लोगों के घरों में घुसने लगता है। आबादी बढ़ने के साथ खाली जमीन और खेत गायब हो गए हैं, जिससे पानी सोखने का कोई प्राकृतिक माध्यम नहीं बचा है। ----------------
वर्जन: नाला उड़ाही का अभियान लगातार चल रहा है।
60 फीसदी तक नालों की सफाई पूरी कर ली गयी है, जबकि शेष बचे नालों की सफाई भी जल्द ही पूरी कर ली जाएगी। जिन मोहल्लों में जलजमाव की अधिक समस्या है, वहां प्राथमिकता के आधार पर कार्य कराया जा रहा है। इतना ही नहीं, शहर के विस्तारीकरण के बाद नई जरूरतों का आकलन और नालों की वर्तमान स्थिति पर मंथन के बाद ड्रेनेज व सीवरेज के विभिन्न विकल्पों पर नगर परिषद कार्य शुरू कर चुका है। इन कार्यों को लेकर टेंडर प्रक्रिया जारी है। आने वाले समय में ठोस योजना पर काम शुरू होगा, जिससे जलनिकासी की समस्या का स्थायी समाधान निकल जाएगा। - पिंकी कुमारी, मुख्य पार्षद, नगर परिषद नवादा। (नवादा से राजेश मंझवेकर)
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