Memorabilia from State and National Highways Zabra crossing were also not made - स्टेट और नेशनल हाइवे से यादगार चिन्ह नदारद, जेब्रा क्रासिंग भी नहीं बनाए गए DA Image
12 दिसंबर, 2019|11:30|IST

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स्टेट और नेशनल हाइवे से यादगार चिन्ह नदारद, जेब्रा क्रासिंग भी नहीं बनाए गए

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एक सितम्बर से लागू किये गये नये यातायात नियमों को लेकर अन्य जगहों की तरह जिले में भी कसमकस की स्थिति बनी हुई है। नियमों की सख्ती पर आमलोगों की तीव्र प्रक्रिया नहीं है। लोग सख्ती के पक्ष में दिखते हैं, ताकि दुर्घटनाएं रोकी जा सके व सड़क हादसे में हो रही मौत की दरों को नियंत्रित किया जा सके। परंतु इसके साथ ही यह मांग भी उठने लगी है कि जब नियमों में सख्ती है तो उसी के मुताबिक लोगों को सुविधाएं भी मिले ताकि व्यवस्था में सुधार हो सके।

जिले में प्राय: जगहों पर सड़कों के किनारे स्पीड लिमिट के बोर्ड तक नजर नहीं आते हैं। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लगाये जाने वाले यातायात चिह्न भी नदारद हैं। यह स्थिति स्टेट हाईवे पर ही नहीं बल्कि नेशनल हाईवे पर भी नजर आती है। जिले में किसी भी सड़क पर जेब्रा क्रॉसिंग नहीं बनाये गये हैं। स्पीड लिमिट की जानकारी नहीं होने के कारण चालक अपने हिसाब से सड़कों पर वाहनों को दौड़ा रहे हैं। ओवर स्पीड के मामले में नये यातायात नियमों में हल्के वाहनों के लिए 1000 से 2000 तक व माल वाहक अथवा सवारी वाहनों के लिए 2000 से 4000 हजार तक जुर्माना का प्रावधान किया गया है। जिले में सड़कों की भी स्थिति जर्जर बनी है। शहर से लेकर कई स्टेट हाईवे व नेशनल हाईवे पर गड्ढे बने हैं, जो दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है। परंतु परिवहन विभाग दुर्घटनाओं को रोकने के लिए इन चीजों पर फोकस नहीं कर सिर्फ जुर्माना वसूलने में रूचि ले रहा है।

हेल्मेट व ट्रिपल लोड अब भी जारी

नये यातायात नियमों को लागू हुए एक पखवारा बीतने को है, परंतु स्थितियों में काफी कुछ बदलाव आ गया हो, ऐसा नहीं दिखता। शहर में अब भी लोग बिना हेल्मेट लगाये धड़ल्ले से बाइक चला रहे हैं। इन पर जुर्माने का कोई खौफ नजर नहीं आता है। जबकि बिना हेल्मेट लगाये बाइक चलाने पर नये नियमों में एक हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यही स्थिति चौपहिया वाहनों पर भी लागू है। बिना सीट बेल्ट लगाये वाहनों के चलाने पर एक हजार का जुर्माना निर्धारित किया गया है। ट्रिपल लोड बाइक चलाने व ओवरलोड वाहनों को चलाने पर भी अलग- अलग जुर्माने का प्रावधान किया गया है। फिर भी लोग नियमों को तोड़ने से बाज नहीं आ रहे हैं।

जागरूकता हो तो रुके उल्लंघन

माना जा रहा है कि सिर्फ नियमों को सख्त बनाने से ही स्थितियों में बहुत सुधार संभव नहीं है। बल्कि इसके लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान अनिवार्य है। इसके लिए परिवहन विभाग व पुलिस को आगे आने होगा व लोगों को जागरूक करना होगा। दुर्घटना के बाद होने वाले नुकसान की भी जानकारी देनी होगी। समय- समय पर जिले में जागरूकता अभियान चलाये जाते रहे हैं, परंतु इसका कोई भी सकारात्मक असर अब तक देखने को नहीं मिला। लिहाजा, जागरूकता अभियान हमेशा ही फ्लॉप रहा। जागरूकता के लिए शहर से लेकर गांवों तक अभियान चलाने की जरूरत है। इसमें युवाओं व छात्रों की भागीदारी अहम होगी।

नहीं है जिले में ट्रैफिक सिग्नल

नया ट्रैफिक रूल्स पूरे देश के साथ नवादा में भी लागू कर दिया गया, परंतु सुविधाओं पर विभाग ने एकबार भी फोकस नहीं किया। जिले में कहीं भी ट्रैफिक सिग्नल नहीं है। ट्रैफिक सिग्नल होने से न सिर्फ दुर्घटनाओं को एक हद तक रोका जा सकता था, बल्कि स्पीड लिमिट, ट्रिपल लोड, ओवरलोड, बिना हेल्मेट वाहन चलाने वालों पर भी नजर रखी जा सकती थी। परंतु यह व्यवस्था न तो शहर में है न ही जिले के किसी अन्य जगह पर। डिवाइडर होने से भी दुर्घटनाओं को नियंत्रित किया जा सकता था। परंतु जिले में शायद ही कहीं डिवाइडर नजर आता हो।

वर्जन

हमारा मुख्य फोकस हेल्मेट, सीट बेल्ट, ट्रिपल लोड व ओवरलोड पर है। इन नियमों को तोड़ने वालों के विरुद्ध अभियान चलाया जा रहा है, ताकि दुर्घटनाएं रोकी जा सके। ट्रैफिक सिग्नल व स्पीड मापक यंत्र नहीं होने के कारण जिले में ओवर स्पीड पर जुर्माना नहीं के बराबर किया जाता है। पथ निर्माण विभाग को जेब्रा कॉसिंग बनाने का निर्देश दिया गया था। सड़क सुरक्षा सप्ताह की अगली बैठक में सड़कों के किनारे स्पीड लिमिट बोर्ड व अन्य जरूरी प्रतीक चिह्न लगाने का निर्णय लिया जाएगा। जल्द ही ट्रैफिक रूल्स को लेकर जागरूकता अभियान चलाये जाएंगे।

- अभ्येन्द्र मोहन सिंह, डीटीओ, नवादा।

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