पीएम की अपील के बाद सर्राफा बाजार में बढ़ी बेचैनी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील और वैश्विक सोने के बाजार में अस्थिरता की आशंका ने नवादा जिले के सर्राफा बाजार में चिंताएं बढ़ा दी हैं। बाजार में शादियों के सीजन के खत्म होने से सन्नाटा है, जिससे छोटे और मध्यम कारोबारियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। ज्वेलरी निर्माण से जुड़े कारीगरों की रोजगार पर भी संकट मंडरा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील और सोने के वैश्विक बाजार में बढ़ती अस्थिरता की आशंका ने नवादा जिले के सर्राफा बाजार में संशय पैदा कर दिया है। जिले के लगभग 500 से अधिक छोटे-बड़े स्वर्ण कारोबारियों के सामने यह समस्या मुंह बाए सामने खड़ी है कि आगे क्या होगा। हालांकि इन दिनों शादियों का सीजन समाप्त हो जाने के कारण वैसे भी बाजार में सन्नाटा है, लेकिन आने वाले दिनों में इसके प्रभाव को लेकर उहापोह वाली स्थिति साफ-साफ दिख रही है। नवादा के सर्राफा बाजार को तीन श्रेणियों में विभक्त किया जा सकता है। मूल एवं अनिवार्य खर्च के विरुद्ध पूर्ववत संचालन का संकट निश्चत रूप से सामने आ सकता है। इसकी आशंका बाजार के जानकर जाहिर करते हुए कहते हैं बड़े ब्रांड इसकी चपेट में आ सकते हैं। शहर के पॉश इलाकों में स्थित शोरूम का मासिक किराया ही 1.5 लाख से 3 लाख रुपए तक होता है। 15-20 कर्मचारियों, एयर कंडीशनिंग और भारी सुरक्षा गार्ड्स व सीसीटीवी का खर्च मिलाकर मासिक संचालन लागत न्यूनतम 5-8 लाख रुपए तक बैठती है। ऐसे कारोबारियों का कहना है कि 10% मार्जिन निकालने के लिए भी करोड़ों का टर्नओवर चाहिए, जो मोदी जी की सलाह आम लोगों द्वारा मान लिए जाने पर काफी हद तक घट सकता है। यह आने वाले सीजन के लिए परेशानीदायक साबित हो सकता है। छोटा ब्रांड और मध्यम कारोबारी का मासिक खर्च भी 50,000 से 1 लाख रुपए के बीच है। ऊपर से ये कारोबारी कारीगरों पर आश्रित हैं। चूंकि काम घटेगा तो काम न मिलने पर सभी विकल्पविहीन हो जाएंगे। जाहिर है, मोदी जी की सलाह का बड़े पैमाने पर असर रहा तो कारोबारी स्टाफ में कटौती पर बाध्य होंगे, जो कारोबार के लिए संकट का सबब बन सकता है। हालांकि सभी ऐसी किसी परिस्थिति की कल्पना वर्तमान में नहीं कर पा रहे।
पीएम की सलाह के हैं कई मायने
प्रधानमंत्री मोदी जी की सलाह के कई मायने हैं, ऐसा भोला भाई ज्वेलर्स के संचालक भोला भाई ने कहा है। उनका कहना है कि छिटपुट कारोबारी इस चिंता में हैं कि ग्राहक नहीं आए तो कैसे गुजारा होगा, लेकिन ज्यादातर यही मान कर चल रहे हैं कि सिर्फ एक साल तक भी सोने की खरीदारी पर नियंत्रण रहा तो कई लाभ होंगे। पहला तो यह कि अपने देश का विदेशी मुद्रा भंडार समृद्ध होगा। एक साल तक रोटेशन के लायक सोना अपने देश में ही है, जिससे जीडीपी को बल मिलेगा और सरकार को कर का भी लाभ होगा। जबकि सबसे महत्वपूर्ण यह है कि तस्करी आदि पर अंकुश लगने से सरकार का उद्देश्य भी पूरा होगा। देखा जाए तो यह मोदी जी का मास्टरस्ट्रोक है। देशहित में हम सभी अपने प्रधानमंत्री के निर्णय के साथ हैं। भोला भाई ने बताया कि इस पूरे परिदृश्य में जहां तक कारोबार की बात है तो चूंकि हम सभी स्थानीय जरूरतों को समझते हैं, इसलिए कारोबार पर प्रतिकूल असर की संभावना नगण्य है।
शादी सीजन के हिसाब से बदलता है नवादा जिले का बाजार
नवादा जैसे पारंपरिक जिले में शादियों का सीजन स्वर्ण व्यवसाय की रीढ़ होता है। लेकिन वर्तमान अनिश्चितता में परिदृश्य बदल जाने का खतरा मंडरा रहा है। फुटफॉल में गिरावट होने की स्थिति में परेशानियां बड़ी हो जाने का खतरा है। हालांकि फिलहाल नवादा जिले में ऐसी कोई प्रतिकूलता नहीं दिख रही है क्योंकि इन दिनों शादियों का सीजन नहीं रहने से ग्राहक वैसे भी कम हो गए हैं। इसलिए कारोबारी यह भी बता पाने में असमर्थ हैं कि मोदी जी की सलाह का यह असर है भी या शादियों का सीजन समाप्त हो जाने का असर है। सभी कारोबारियों ने यह भी बताया कि शादियों के सीजन में दाम बढ़ने के बावजूद बिक्री में कोई गिरावट दर्ज नहीं की गई थी यानी लोगों ने अपनी जरूरतों के हिसाब से खरीदारी जारी ही रखा था।
कारीगरों के रोजगार पर चोट, पलायन की आशंका
नवादा जिले में ज्वेलरी निर्माण से जुड़े सैकड़ों कारीगर नई परिस्थितियों में सीधे प्रभावित हो सकते हैं। पॉलिशिंग, कास्टिंग और डिजाइनिंग यूनिट्स को ऑर्डर नहीं मिल पाने की स्थिति में दैनिक मजदूरी खत्म होने से ये कारीगर अब अकुशल श्रम की ओर रुख करने को मजबूर हो सकते हैं। कारोबारियों के अनुसार, पहले से ही कुशल कारीगरों की कमी है। अगर ये एक बार पेशा छोड़ देंगे, तो दोबारा इस कला में वापसी मुश्किल होगी। ----------------------------- 1968 और 1973 में लाइसेंस राज और सख्त चेकिंग ने किया था बर्बाद नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता बुजुर्ग सर्राफा व्यवसायी आज की तुलना 1968 के गोल्ड कंट्रोल एक्ट से कर रहे हैं। उस दौर को याद करते हुए नवादा के दिवंगत स्वर्णकार मदन गोपाल के पुत्र सह स्वर्णकार संघ के जिलाध्यक्ष महेश कुमार वर्मा कहते हैं कि 1968 में जब 14 कैरेट से अधिक शुद्धता पर पाबंदी लगी थी, तो कारोबारियों के हाथ बांध दिए गए थे। लाइसेंस राज और सख्त चेकिंग ने छोटे सुनारों को बर्बाद कर दिया था। तस्करी बढ़ गई थी और असली कारीगरी दम तोड़ने लगी थी। वहीं, 1973-74 के तेल संकट के समय सोने की कीमतों में आए अप्रत्याशित उछाल और सप्लाई की कमी ने बाजार को ब्लैक मनी की तरफ धकेल दिया था। आज के कारोबारियों को डर है कि कहीं वही नियंत्रण दोबारा न लौट आएं, जिससे पारदर्शिता के बजाय बाजार में कालाबाजारी और भ्रष्टाचार बढ़ेगा। हालांकि महेश वर्मा ने खुल कर कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आमजनों को नियंत्रित सोने की खरीद की सलाह देकर दूरदर्शी कदम उठाया है। आमजन खरीदारी कम करेंगे तो सीधे-सीधे यह सोने की तस्करी करने वालों की कमर तोड़ डालेगी और करवंचना पर भी अंकुश लगेगा। मोदी जी की सलाह का 10 फीसदी कारोबारी विरोध में करते दिख रहे हैं, जिन्होंने करवंचना कर वारा-न्यारा करने की मंशा में पाल रखी होगी, अन्यथा आमजन हमेशा ही जरूरत और समझदारी से ही सोने की खरीद करते रहे हैं। (नवादा से अरविंद कुमार रवि)
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