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मकर संक्रांति: बाजार में छाई रही रौनक, खरीदारी अपने चरम पर

मकर संक्रांति: बाजार में छाई रही रौनक, खरीदारी अपने चरम पर

संक्षेप:

नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता।मकर संक्रांति को लेकर बाजारों में मंगलवार को खूब गहमागहमी रही। महंगाई के बावजूद लोग अपनी हैसियत के मुताबिक सामानों की खरीदारी में जुटे रहे।

Jan 14, 2026 04:23 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नवादा
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नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। मकर संक्रांति को लेकर बाजारों में मंगलवार को खूब गहमागहमी रही। महंगाई के बावजूद लोग अपनी हैसियत के मुताबिक सामानों की खरीदारी में जुटे रहे। मकर संक्रांति को बुधवार को ही मनायी जाएगी, इसको देखते हुए मंगलवार को बाजारों में खासी चहल-पहल देखने को मिली। लोग तिलकुट से लेकर लाई, गुड़, तिल, चूड़ा तथा उड़द दाल की खरीदारी करते दिखे। हालांकि इस त्योहार पर महंगाई की मार भी दिख रही है। मकर सक्रांति में उपयोग होने वाले सभी सामानों की कीमत पिछले साल की अपेक्षा बढ़ गई है। फिर भी परम्परा निभाने के लिए लोग धर्म व रीति-रिवाजों के अनुसार चूड़ा व दही के साथ तिल की खरीदारी करने के लिए बाजारों में पहुंच रहे हैं।

गत वर्ष के अपेक्षा मकर संक्रांति के दौरान प्रयोग में आने वाले सामानों की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। बाजार में चूड़ा 40 से 60 रुपये, काला तिल 220 से 260 रुपये, सफेद तिल 200 से 250 रुपये, गुड़ 45 से 48 रुपये, चावल 35 से 85 रुपये तथा चीनी 46 से 49 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है। इसके अलावा दही की कीमत भी इस साल 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। मकर संक्रांति के मौके पर तिलकुट की मांग काफी बढ़ गयी है। तिलकुट बाजार में 250 रुपये से लेकर 380 रुपये प्रतिकिलो की दर से उपलब्ध है। मसका की ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी-खासी मांग रहती है। इसकी भी लोग 140 रुपये प्रति किलो की दर खरीदारी कर रहे हैं। मकर संक्रांति पर दूध-दही का रिकॉर्डतोड़ ऑर्डर इस बार दूध और दही ने ऑर्डर के मामले में रिकॉर्ड तोड़ दिया है। सुधा के अधिकृत विक्रेता सोहन कुमार मंटू ने बताया कि सामान्य दिनों में जिले भर में पांच हजार लीटर दूध की खपत रहती है लेकिन मकर संक्रांति को लेकर 11 जनवरी से ही 25 हजार लीटर दूध मंगवाया जा रहा है। इस बार रेडीमेड दही को लोग ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इस कारण इस बार पर्व के लिए 15 हजार किलो दही का ऑर्डर बुक हुआ है। जबकि सामान्य दिनों में मुश्किल से 20 से 30 किलो दही की खपत होती है। घर पर दही जमाने का संकट लोग नहीं उठाना चाहते हैं इसलिए दही का ऑर्डर जबरदस्त तरीके से उछला है। यह तो हुई सुधा के दूध और दही की जिले भर में बिक्री की बात जबकि दूधिए से लिए जाने वाले दूध की बात की जाए तो जिले के लोग पर्व के दौरान लगभग डेढ़ लाख लीटर दूध और लगभग 50 हजार किलो दही गटक जाएंगे। सब्जियों की मांग भी बढ़ी, दाम स्थिर मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा की खरीदारी को लेकर जितनी गहमागहमी बाजारों में रहती है, उतनी ही हलचल सब्जी मार्केट में भी देखने को मिल जाती है। शहर स्थित सब्जी मंडी में खूब खरीदारी चल रही है। हालांकि बुधवार को ज्यादा खरीदारी की उम्मीद है, क्योंकि खिचड़ी का त्योहार गुरुवार को मनाया जाएगा। खिचड़ी को लेकर सब्जी बाजार की गहमागहमी गुरुवार तक रहने का अनुमान है। मकर संक्रांति पर भी सब्जियों के भाव में भी कोई उछाल नहीं देखा जा रहा है। मकर संक्रांति के दिन दही-चूड़ा के साथ-साथ किस्म-किस्म के सब्जी के भी बनवाने की परंपरा रही है। लोग आलू-गोभी, मटर, सगहा प्याज, लहसुन, बैगन आदि की सब्जी और चोखा बनाते हैं। लेकिन इस साल बैगन अभी 30 से 40 रुपये प्रति किलो जबकि 10 से 20 रुपये प्रति पीस फूलगोभी बिक रही है। इसी तरह, मटर का भाव भी अभी 30-40 रुपये प्रति किलो हो गया है। इसके अलावा प्याज सस्ता तो हुआ है मगर अभी भी 40 रुपये प्रति किलो पर आकर अटका हुआ है। इस पर्व में नया आलू काफी डिमांडिंग रहता है जो 27-30 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है। पतंगबाजी के शौकीनों की खरीदारी भी परवान पर यूं तो मकर संक्रांति और खिचड़ी त्योहार पर खान-पान की ही महत्ता है, लेकिन इस त्योहार के दिन पतंगबाजी के शौकीनों के मन भी कुलाचें भरने लगते हैं। जमकर पतंगबाजी का नजारा रहता है। इसको लेकर पतंग, लटाई और धागे की जमकर खरीदारी होती रही। कुछ लोग मांझा चढ़े धागे की खोज भी करते निकले, लेकिन इसकी उपलब्धता बाजार में नहीं दिखी। चाइनिज मांझे के कारण कई दुर्घटनाओं के मद्देनजर सामान्यत: दुकानदार ही इससे परहेज करते दिखे। ---------------------- बेटी-बहू के घर भेजे जा रहे दही-चूड़ा व तिलकुट नवादा। मकर संक्रांति बुधवार को है। इसको लेकर मंगलवार को बहू-बेटियों के मायके व ससुराल से दही-चूड़ा समेत तिलकुट, लाई व सुंगधित चावल का उपहार लोग भेजते देखे गए। उपहार की डलिया में साड़ी सेट, शृंगार सामग्री आदि भी भेजी जाती रही। बहू-बेटियों को भी मायके व ससुराल से उपहार आने का इंतजार रहा। इस परम्परा के निर्वहन में घर-गांव में मेहमानों का आना-जाना बना रहा, जिससे घर-घर में रौनक रही। उपहारों के आदान-प्रदान को लेकर इन सामग्रियों की बाजार में खरीदारी खूब जम कर हुई। ग्राहकों की भीड़ से मकर संक्रांति का उपहार संबंधी बाजार भी खूब गुलजार रहा।

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