
इस साल अंत तक खत्म होगा तिलैया-कोडरमा रेल परियोजना का इंतजार
नवादा। हिन्दुस्तान संवाददातादक्षिण बिहार और उत्तरी झारखंड को सीधे रेल मार्ग से जोड़ने का सपना अब साकार होने के बेहद करीब है। पिछले एक दशक से निर्माणाधीन तिलैया-कोडरमा रेल परियोजना के वर्ष 2026 में...
नवादा। हिन्दुस्तान संवाददाता दक्षिण बिहार और उत्तरी झारखंड को सीधे रेल मार्ग से जोड़ने का सपना अब साकार होने के बेहद करीब है। पिछले एक दशक से निर्माणाधीन तिलैया-कोडरमा रेल परियोजना के वर्ष 2026 में पूरी तरह से चालू होने की उम्मीद है। लगभग 65 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन का काम अब अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है, जो न केवल यात्रियों के लिए सफर आसान बनाएगी, बल्कि इस क्षेत्र की आर्थिक और औद्योगिक तस्वीर भी बदल देगी। यह परियोजना इंजीनियरिंग के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण रही है। पहाड़ी रास्ता और घना जंगल होने के कारण इसमें आधुनिक सुरंगों का निर्माण किया गया है।
साथ ही, हाथियों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष वाइल्डलाइफ कॉरिडोर का भी ध्यान रखा गया है। सरकार ने इस परियोजना के लिए हालिया बजट में भारी आवंटन किया है, जो इसके महत्व को दर्शाता है। खरौन्ध तक पहुंची लाइन, ट्रायल सफल इस परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण प्रगति यह है कि नवादा के तिलैया जंक्शन से खरौन्ध स्टेशन तक करीब 24 किलोमीटर रेल लाइन का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है। इस खंड पर रेलवे द्वारा स्पीड ट्रायल भी सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है। वर्तमान में इस ट्रैक का उपयोग मालगाड़ियों के परिचालन के लिए किया जा रहा है, जिससे रेलवे को राजस्व और स्थानीय व्यापारियों को माल ढुलाई में बड़ी राहत मिल रही है। बाकी बचे हिस्से पर चार सुरंगों और सात बड़े पुलों का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है। विगत मार्च 2023 में कोडरमा से झरही के बीच 17 किमी रेल लाइन का निरीक्षण किया गया था, जिसके बाद काम तेजी से पूरा कर लिया गया है। अब ले-दे कर खरौंध से झरही तक ही शेष 24 किमी रेल पथ का निर्माण कार्य पूर्ण होना है, और नए अध्याय का आरम्भ हो जाएगा। 2026 में खास है यह प्रोजेक्ट मार्च 2026 के लक्ष्य के अनुकूल रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे खंड (65 किमी) को मार्च 2026 तक यात्री सेवाओं के लिए खोलने का लक्ष्य रखा गया है। यदि भौगोलिक या तकनीकी कारणों से देरी हुई, तो भी साल के अंत तक इसे अनिवार्य रूप से शुरू कर दिया जाएगा। इस लाइन के शुरू होने से राजगीर और नवादा से कोडरमा होते हुए रांची का सफर बेहद कम समय में तय किया जा सकेगा। अभी यात्रियों को गया या किऊल होकर लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। बौद्ध सर्किट को मजबूती देने में सक्षम यह लाइन राजगीर, नालंदा और पावापुरी जैसे ऐतिहासिक स्थलों को सीधे झारखंड से जोड़ेगी, जिससे विदेशी और देशी पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा। मालगाड़ी सेवा से आर्थिक क्रांति वर्तमान में खरौन्ध तक मालगाड़ियों के परिचालन से गल्ला यानी खाद्यान्न की ढुलाई जारी है, लेकिन भविष्य में कोयला, सीमेंट और निर्माण सामग्री की ढुलाई भी आसान हो जाएगी। 2026 में पूरी लाइन चालू होने के बाद नवादा जिला बिहार और झारखंड के बीच एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में उभरेगा। स्थानीय व्यापारियों को अपना सामान सीधे झारखंड और बंगाल के बाजारों तक भेजने में कम लागत आएगी। नए स्टेशनों के निर्माण और रेल गतिविधियों के बढ़ने से स्थानीय स्तर पर छोटे व्यवसायों और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। ----------------------------- एक नजर में परियोजना: कुल लंबाई: लगभग 65 किलोमीटर मुख्य स्टेशन: तिलैया, खरौन्ध, उरवां, कोडरमा अनुमानित लागत: 1625.87 करोड़ रुपए विगत बजट में प्राप्ति: 275 करोड़ रुपए विशेषता: 04 आधुनिक सुरंगें और 07 बड़े पुल डेडलाइन संभावित: मार्च 2026 डेडलाइन हर हाल में: दिसंबर 2026

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