
यात्री बसों की आड़ में चल रहा अवैध माल ढुलाई का खेल
बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच चलने वाली अंतरराज्यीय बस सेवा अब अवैध व्यापार और टैक्स चोरी का मुख्य जरिया बन गई है। रजौली, नवादा में माफियाओं का नेटवर्क सक्रिय है, जो बिना अनुमति और टैक्स चुकाए बसों को सीमा पार करवा रहा है। यात्रियों की सुरक्षा को नजरअंदाज करते हुए, ये बसें अब वाणिज्यिक सामान ले जा रही हैं।
रजौली, निज संवाददाता बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच चलने वाली अंतरराज्यीय बस सेवा अब केवल यात्रियों को ढोने का साधन नहीं रह गई है, बल्कि यह अवैध व्यापार और टैक्स चोरी का एक बड़ा जरिया बन चुकी है। जो बंगाल से बिहार के दर्जनों जिले में जोर-शोर से चालू है। नवादा जिले का रजौली, जो बिहार का प्रवेश द्वार माना जाता है। इन दिनों परिवहन विभाग के नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले माफियाओं का गढ़ बनता जा रहा है। पटना, समस्तीपुर, हाजीपुर, नवादा, बिहारशरीफ, हिसुआ और राजगीर, गोविन्दपुर जैसे प्रमुख शहरों से कोलकाता जाने वाली लग्जरी बसें यात्रियों की सुरक्षा को ताक पर रखकर मालवाहक ट्रकों की तरह काम कर रही हैं।

हैरानी की बात यह है कि यह पूरा खेल एक नंबर के कोडवर्ड के साथ प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा है, जहां बिना परमिशन और बिना टैक्स चुकाए गाड़ियां धड़ल्ले से सीमा पार कर रही हैं। भ्रष्टाचार का गढ़,रसूखदारों और माफिया का गठजोड़ रजौली स्थित समेकित जांच चौकी से लेकर जिला प्रशासन की भूमिका पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। करोड़ों की लागत से बनी इस चौकी का मुख्य उद्देश्य अवैध परिवहन पर रोक लगाना और राज्य के लिए राजस्व जुटाना था। सूत्रों की मानें तो अब यह इंट्री माफियाओं के लिए कमाई का अड्डा बन गया है। समेकित जांच चौकी से लेकर दूसरे जिलों की सीमाओं तक माफियाओं द्वारा एक संगठित नेटवर्क चलाया जा रहा है। इस नेटवर्क के तार इतने गहरे जुड़े हैं कि बसों को पास कराने के लिए बकायदा बोली लगती है और एक निश्चित इंट्री फीस चुकाने के बाद बस को बिना किसी जांच के जाने दिया जाता है। स्थानीय लोगों और दबी जुबान से कुछ कर्मचारियों का कहना है कि इस खेल में रसूखदार सफेदपोशों और खादीधारियों का सीधा हस्तक्षेप है, जिसके कारण ईमानदार अधिकारी भी कार्रवाई करने से कतराते हैं। जानलेवा खतरा, एक परमिट पर दौड़ रहीं कई गाड़ियां जमीनी हकीकत यह है कि इन बसों में यात्रियों के बैठने की जगह को कम करके वहां कॉमर्शियल सामान लोड किया जा रहा है। बस की छतों से लेकर डिक्की और सीटों के नीचे तक हर जगह माल ठूंस-ठूंस कर भरा होता है। मोटर वाहन अधिनियम के तहत यात्री बसों में कमर्शियल कार्गो ले जाना पूर्णतः प्रतिबंधित है। क्योंकि इससे न केवल सरकार को जीएसटी और रोड टैक्स का नुकसान होता है, बल्कि बस का संतुलन बिगड़ने से जानलेवा हादसों का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। लेकिन प्रशासन के मेल से चल रहे इस कारोबार में निरंतरता इतनी है कि बस मालिकों को किसी भी तरह की रोक-टोक का डर नहीं है। यह सिंडिकेट इतना हावी है कि वे समानांतर परिवहन व्यवस्था चला रहे हैं। हद तो तब हो जाती है जब कुछ बस मालिक एक ही नंबर पर सड़कों पर कई गाड़ियां दौड़ा रहे हैं, जिससे उन्हें रूट परमिट की कोई आवश्यकता नहीं होती। वे एक वाहन का परमिट करवाते हैं और उसी की आड़ में कई वाहन उस रूट पर चलवाते हैं। बेखौफ सिंडिकेट, जेल से छूटते ही फिर सक्रिय हुए माफिया हालांकि, पूर्व के दिनों में ओवरलोड ट्रक इंट्री कराने वाले एक-दो माफियाओं पर कार्रवाई की गई थी। इन माफियाओं को जेल की हवा भी खानी पड़ी थी। जिससे कुछ दिनों तक अवैध पासिंग पर कुछ हद तक लगाम लगा था। लेकिन जेल से निकलते ही पूरा इंट्री सिंडिकेट पुनः अपनी पैठ जमा कर इस खेल में सक्रिय हो गया है। उनकी गतिविधियों को देखकर ऐसा लगता है कि उन्हें कार्रवाई का कोई भय नहीं है। विडंबना यह है कि समेकित जांच चौकी पर आरटीओ की भी तैनाती है, जिनकी निगरानी में वाहनों का आवागमन होता है। इसके अलावा उड़नदस्ता टीम भी कुछ माह पूर्व तक सक्रिय थी, इसके बावजूद सड़कों पर मोटर व्हीकल अधिनियम की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। वर्जन चुनाव में व्यस्तता के कारण नियमित रूप से जांच नहीं हो पा रही थी। सोमवार से नियमित जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। नवीन कुमार पांडेय, जिला परिवहन पदाधिकारी

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