बच्चों की पढ़ाई पर महंगाई की मार, कॉपियों और किताबों के दाम बढ़े
वैश्विक स्तर पर चल रहे युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव की तपिश अब नवादा जिले के आम परिवारों के बजट को झुलसाने लगी है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मची उथल-पुथल का सीधा असर अब जिले के बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर...

वैश्विक स्तर पर चल रहे युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव की तपिश अब नवादा जिले के आम परिवारों के बजट को झुलसाने लगी है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मची उथल-पुथल का सीधा असर अब जिले के बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर भी पड़ रहा है। कागज के कच्चे माल यानी पल्प के आयात में आ रही दिक्कतों और ईंधन की कीमतों में अनिश्चितता के कारण कॉपियों, किताबों, स्टेशनरी और स्कूल वैन के खर्च में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। नया सत्र शुरू होते ही अभिभावकों की जेब पर दोहरी मार पड़ रही है। सबसे मुश्किल यह है कि इस बजट में कटौती की कोई गुंजाइश भी नहीं है।
जो खर्चे बढ़े हैं, उस से बचने का कोई अन्य विकल्प भी नहीं है। इन हालातों में अभिभावकों को अन्य तरह की कटौती को बाध्य होना पड़ रहा है। कुल मिला कर यह ऐसा दर्द बन पड़ा है, जिसे अभिभावकों द्वारा न छिपाते बन रहा है और न ही बताते बन रहा है। नवादा शहर के मेन रोड, पुरानी बाजार, पुरानी कचहरी रोड और अस्पताल रोड, स्टेशन रोड आदि स्थित पुस्तक विक्रेताओं का कहना है कि कागज बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात होता है। प्रजातंत्र चौक के समीप के पुस्तक विक्रेता पंकज कुमार कहते हैं वैश्विक संकट के कारण सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो गई है, जिससे पेपर मिलों की उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है। नतीजतन, जो रफ कॉपी दो महीने पहले 30 रुपये में मिल रही थी, वह अब 45 रुपये पार कर चुकी है। फेयर कॉपियों और ड्राइंग बुक्स की कीमतों में भी 30% से 40% तक का उछाल आया है। इसके अलावा पेंसिल, रबर, ज्योमेट्री बॉक्स जैसी स्टेशनरी वस्तुएं भी महंगी हो गई हैं। इधर, अभिभावकों का कहना है कि स्कूल फीस तो हर साल बढ़ती ही है, लेकिन इस बार कॉपियों और किताबों के दामों ने घरेलू बजट का संतुलन ही बिगाड़ दिया है। ईंधन की अनिश्चितता, स्कूल वैन और ऑटो का किराया बढ़ा वैश्विक संकट का दूसरा सबसे बड़ा प्रहार ईंधन यानी पेट्रोल-डीजल की कीमतों और उसकी आपूर्ति की अनिश्चितता पर हुआ है। नवादा जिला मुख्यालय समेत वारिसलीगंज, रजौली और हिसुआ आदि जैसे उप नगरीय इलाकों में संचालित होने वाले निजी स्कूलों के वाहनों का किराया अचानक बढ़ा दिया गया है। स्कूल वैन और ऑटो चालकों का तर्क है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों और मेंटेनेंस खर्च के कारण वे पुराने किराए पर गाड़ियां नहीं चला सकते। नवादा शहर के कन्हाई नगर के एक अभिभावक सुधीर कुमार ने बताया कि पहले दो बच्चों का स्कूल वैन का किराया 1,600 रुपये प्रति माह जाता था, जिसे वैन वाले ने एकमुश्त बढ़ाकर 2,200 रुपये कर दिया है। विरोध करना संभव ही नहीं है। मध्यमवर्गीय परिवारों की बढ़ी हुई है चिंता इस अचानक आई महंगाई से सबसे ज्यादा प्रभावित मध्यम और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवार हो रहे हैं। नवादा के प्रजातंत्र चौक पर किताबें खरीद रहे एक अभिभावक रमेश शर्मा ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि दो बच्चों का एडमिशन, नई किताबें और ड्रेस खरीदने में ही इस बार पिछले साल की तुलना में 4,000 से 5,000 अधिक खर्च हो रहे हैं। ऊपर से हर महीने वैन का बढ़ा हुआ किराया अलग से देना होगा। फिलहाल, नवादा के अभिभावक बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता से समझौता न करने की मजबूरी में अपनी अन्य जरूरतों में कटौती करने को मजबूर हैं। ------------------ पाठ्य सामग्री की दो माह पूर्व बनाम वर्तमान कीमत (रुपए में): सामग्री/सेवा दो माह पूर्व कीमत वर्तमान कीमत प्रतिशत वृद्धि साधारण रफ कॉपी (प्रति पीस) 30 45 50% क्लासमेट / ब्रांडेड कॉपी (प्रति पीस) 60 80 33% ड्राइंग बुक व कलर सेट 120 160 33% स्टेशनरी किट (पेंसिल, बॉक्स आदि) 150 200 33% स्कूल वैन किराया (प्रति बच्चा/औसत दूरी) 800/माह 1,100/ 37% ऑटो/ई-रिक्शा किराया (लोकल रूट) 600/माह 850/माह 41% (नवादा से राजेश मंझवेकर)
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