
केजी रेलखंड पर सुविधाओं का अभाव, महिलाएं होती हैं परेशान
नवादा स्टेशन पर अमृत भारत योजना के तहत सुविधाओं की कमी के चलते महिला यात्रियों को मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं। शौचालयों की अनुपस्थिति, गंदगी और अव्यवस्था के कारण महिलाएं असुरक्षित महसूस कर रही हैं। यात्रियों ने रेल प्रशासन से सुविधाओं में सुधार की मांग की है, लेकिन समस्या अभी भी बनी हुई है।
नवादा। हिन्दुस्तान संवाददाता भारतीय रेलवे एक ओर जहां अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत रेलवे स्टेशनों के कायाकल्प और विश्वस्तरीय सुविधाओं का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं किऊल-गया रेलखंड की हकीकत इन दावों के बिल्कुल उलट है। इस रेलखंड पर स्थित अधिकांश स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाओं का इस कदर अकाल है कि यात्रियों, विशेषकर महिलाओं को सफर के दौरान हर कदम पर शर्मिंदगी और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। सबसे भयावह स्थिति स्वच्छता और प्रसाधन सुविधाओं की है, जहां एक अदद चालू शौचालय तक नसीब नहीं है। इसका जीता-जागता उदाहरण नवादा स्टेशन है। महिलाओं के लिए नवादा स्टेशन पर ट्रेन के इंतजार में समय बिताना किसी सजा से कम नहीं है।
अमृत भारत योजना की चमक के पीछे सिसकती बुनियादी सुविधाएं महिला यात्रियों की गरिमा दांव पर लगा रही हैं। आमजनों ने मुखर हो कर कहा कि भारतीय रेल को देश की जीवनरेखा कहा जाता है। आधुनिक भारत के निर्माण में रेलवे की भूमिका को और सुदृढ़ करने के लिए केंद्र सरकार अमृत भारत स्टेशन योजना के जरिए स्टेशनों का कायाकल्प कर रही है। लेकिन, बिहार के नवादा जिले से गुजरने वाले किऊल-गया (केजी) रेलखंड की धरातली हकीकत इन सुनहरे दावों को आईना दिखा रही है। यहां विकास की बातें केवल फाइलों और होर्डिंग्स तक सीमित हैं, जबकि हकीकत में यात्री, विशेषकर महिलाएं, अमानवीय परिस्थितियों में सफर करने को मजबूर हैं। आधुनिकता के दावों के बीच शर्मसार होती महिलाएं नवादा स्टेशन पर उतरते ही विकास के दावों की पोल खुल जाती है। एक ओर जहां स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने की योजना है, वहीं दूसरी ओर एक महिला यात्री के लिए सबसे बुनियादी जरूरत-एक चालू और साफ शौचालय-तक उपलब्ध नहीं है। यह केवल एक सुविधा का अभाव नहीं है, बल्कि महिला यात्रियों की गरिमा और उनके मौलिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है। अमृत भारत योजना के तहत चल रहे निर्माण कार्यों के क्रम में निर्मित शौचालयों को जरा सा भी सुविधायुक्त नहीं रह गया है। वैकल्पिक व्यवस्था के नाम पर रेलवे ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इसका परिणाम यह है कि लंबी दूरी की यात्रा करने वाली महिलाओं, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को घंटों तक अपनी शारीरिक आवश्यकताओं को रोककर रखना पड़ता है, जो उनके स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा है। प्लेटफॉर्म पर हर तरफ निर्माण सामग्री बिखरी नवादा स्टेशन को इस महत्वाकांक्षी योजना में शामिल तो किया गया, लेकिन निर्माण की प्रक्रिया इतनी अव्यवस्थित है कि यात्रियों के लिए स्टेशन परिसर किसी युद्धक्षेत्र से कम नहीं लगता। प्लेटफॉर्म पर हर तरफ निर्माण सामग्री बिखरी पड़ी है। लोहे की छड़ें यात्रियों के चलने के रास्ते में बाधा पैदा करती हैं। रात के अंधेरे में इनसे टकराकर चोटिल होना आम बात हो गई है। निर्माण कार्य के कारण उड़ने वाली धूल ने यात्रियों का दम घोंट रखा है। अस्थमा और एलर्जी के मरीजों के लिए नवादा स्टेशन पर 15 मिनट रुकना भी भारी पड़ रहा है। भीषण गर्मी हो या सामान्य मौसम, स्टेशन पर लगे वाटर कूलर की अनुपलब्धता रहती है। यात्रियों को मजबूरन ऊंचे दामों पर बाहर से पानी खरीदना पड़ता है, जो रेलवे की मुफ्त पेयजल व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाता है। निराशाजनक तो यह है कि बोतलबंद पानी भी चालू ब्रांड के उपलब्ध हो पा रहे हैं। सुविधाओं के नाम पर सिफर है केजी रेलखंड केजी रेलखंड पर सफर करना किसी चुनौती से कम नहीं है। कहने को तो नवादा स्टेशन को अमृत भारत योजना में शामिल कर करोड़ों के बजट का प्रावधान किया गया है, लेकिन धरातल पर निर्माण के नाम पर केवल धूल और अधूरा ढांचा नजर आता है। स्टेशनों पर पीने के पानी की उचित व्यवस्था नहीं है, और जो वाटर कूलर लगे भी हैं, वे महीनों से सफेद हाथी बने हुए हैं। बैठने के लिए बेंचों की संख्या नगण्य है, जिसके कारण बुजुर्गों और बच्चों को घंटों तपती धूप या ठंड में प्लेटफॉर्म पर जमीन पर बैठने को मजबूर होना पड़ता है। महिलाओं के लिए सुविधा के नाम पर शून्य इस रेलखंड की सबसे बड़ी त्रासदी महिला यात्रियों की सुरक्षा और निजता से जुड़ी है। स्टेशनों पर शौचालय या तो बने ही नहीं हैं, और यदि कहीं कागजों पर मौजूद हैं, तो उनमें ताले लटके रहते हैं या वे इस कदर गंदगी से भरे हैं कि अंदर जाना नामुमकिन है। महिला यात्रियों के लिए एक शौचालय तक उपलब्ध न होना स्वच्छ भारत मिशन के दावों की पोल खोलता है। लंबी दूरी की यात्रा या ट्रेनों के विलंब होने की स्थिति में महिलाओं को शौच आदि के लिए झाड़ियों का सहारा लेना पड़ता है या ट्रेन आने का इंतजार करना पड़ता है, जो बेहद शर्मनाक और अमानवीय है। शिकायतों पर मौन है रेल प्रशासन यात्रियों का आरोप है कि इस संबंध में स्टेशन मास्टर से लेकर उच्चाधिकारियों तक कई बार लिखित और डिजिटल माध्यमों से शिकायतें की गईं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। रेल प्रशासन की संवेदनहीनता का आलम यह है कि शिकायतों पर संज्ञान लेना तो दूर, यात्रियों को उचित जवाब तक नहीं दिया जाता। अमृत भारत योजना के तहत चल रहे कार्यों की कछुआ चाल ने यात्रियों की मुसीबतें और बढ़ा दी हैं। निर्माण सामग्री प्लेटफॉर्म पर बिखरी रहती है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। विकास के दावों के बीच रेंग रही व्यवस्था स्थानीय नागरिकों और दैनिक यात्रियों का कहना है कि केजी रेलखंड हमेशा से उपेक्षा का शिकार रहा है। ट्रेनों का लेट-लतीफ होना तो यहां की नियति है, लेकिन अब बुनियादी सुविधाओं का छिन जाना बर्दाश्त से बाहर है। रात के समय स्टेशनों पर पर्याप्त रोशनी न होना सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा जोखिम है। सीसीटीवी कैमरे कई जगहों पर काम नहीं कर रहे, जिससे असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बना रहता है। ----------------------- महिला यात्रियों की व्यथा: 1.रेलवे बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन केजी रेलखंड के स्टेशनों पर उतरते ही डर लगने लगता है। सबसे बड़ी समस्या शौचालय की है। घंटों ट्रेन का इंतजार करना पड़ता है, लेकिन महिलाओं के लिए कोई सुरक्षित और साफ जगह नहीं है। हमें अपनी गरिमा को ताक पर रखकर सफर करना पड़ता है। क्या रेल प्रशासन को हमारी परेशानी नहीं दिखती? अमृत भारत के नाम पर बस दिखावा हो रहा है। -रिंकी कुमारी, पुरानी बाजार, नवादा। 2.मैं सामान्यत: आए दिन इस रेलखंड का उपयोग करती हूं। स्टेशन पर पीने का पानी तक साफ नहीं मिलता। शौचालय की स्थिति तो इतनी खराब है कि उसे इस्तेमाल करने के बारे में सोचना भी बीमारी को न्योता देना है। अक्सर शौचालय में ताले लटके रहते हैं। शिकायत करने पर कोई सुनने वाला नहीं है। एक छात्रा के तौर पर यह बहुत असुरक्षित और असहज महसूस कराता है। -तरुणा चौरसिया, न्यू एरिया, नवादा। 3.काम के सिलसिले में अक्सर केजी रेलखंड पर सफर करना पड़ता है। ट्रेनों की लेटलतीफी के बीच स्टेशन पर रुकना मजबूरी है, पर वहां मूलभूत सुविधाएं सिरे से नदारद हैं। महिलाओं के लिए बने वेटिंग रूम गंदगी का ढेर हैं। प्रसाधन सुविधाओं के अभाव में हमें घंटों प्यासा रहना पड़ता है ताकि वॉशरूम जाने की जरूरत न पड़े। यह कैसा विकास है, जहां महिलाओं के लिए न्यूनतम सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं? -प्रगति श्रीवास्तव, कृष्णा नगर, नवादा। 4.अमृत भारत स्टेशन पर शौचालय की कमी महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा कष्टदायी है। सरकार कहती है कि स्टेशनों को आधुनिक बना रहे हैं, लेकिन हमें तो पुराने दिन ही अच्छे लगते थे। कम से कम इतने बुरे हाल तो नहीं थे। उम्र के बढ़ते पड़ाव पर बुजुर्गों के लिए सामान्य रूप से बैठना मुश्किल है, लेकिन स्टेशन पर गिने-चुने ही बेंच हैं। बुजुर्गों के लिए यह सफर किसी सजा से कम नहीं है। -कौशकी कुमारी, राम नगर, नवादा। ------------------- केजी रेलखंड को मिला सौतेला व्यवहार नवादा। किऊल-गया रेलखंड बिहार के दो महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ता है। यह रेलखंड न केवल यात्रियों बल्कि माल ढुलाई के लिए भी महत्वपूर्ण है। बावजूद इसके, इस रेलखंड को हमेशा सौतेला व्यवहार मिला है। दोहरीकरण और विद्युतीकरण के काम में पहले तो देरी और फिर इसका लाभ अनुकूल तरीके से नहीं मिल पाने इसकी स्थिति ने इसकी सेवाओं को और भी दयनीय बना दिया है। नवादा स्टेशन इस पूरे खंड का एक प्रमुख केंद्र है, और यहां की अव्यवस्था पूरे रेलखंड की छवि खराब कर रही है। इधर, प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन का नारा यहां के ट्रैक पर बिखरे कचरे और बंद पड़े शौचालयों में दफन नजर आता है। सफाई कर्मचारी केवल वीआईपी दौरों के समय सक्रिय होते हैं। सामान्य दिनों में डस्टबिन कचरे से लबालब रहते हैं और प्लेटफॉर्म पर आवारा मवेशियों का घूमना आम बात है। नवादा स्टेशन की वर्तमान स्थिति अमृत भारत की कल्पना के बिल्कुल विपरीत है। विकास का मतलब केवल पत्थर और सीमेंट की इमारतें खड़ी करना नहीं, बल्कि उन इमारतों में बुनियादी मानवीय सुविधाओं का होना भी है। --------------------- रेल प्रशासन से कुछ जरूरी मांगें कर रहे आम यात्री नवादा। रेल प्रशासन से कुछ मांगें लगातार की जा रही हैं। रेल यात्री विशेषत: महिला यात्री तत्काल सुविधायुक्त शौचालय की मांग कर रही हैं। बल्कि पिंक शौचालय वाली सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी कही जा रही है। आवश्यकतानुसार महिलाओं के लिए पर्याप्त संख्या में पोर्टेबल बायो-टॉयलेट्स लगाने पर महिला यात्रियों का जोर है। इसके अलावा प्लेटफॉर्म पर पर्याप्त संख्या में बेंचों की तत्काल उपलब्धता, वाटर कूलरों की 24 घंटे की सेवा, स्टेशन के हर कोने में हाई-मास्ट लाइटें, महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती बढ़ाने तथा शिकायतों पर केवल टिकट न कटे, बल्कि धरातल पर समाधान भी दिखे, ऐसी मांगें लगातार उठायी जा रही हैं। निराश यात्रियों ने कहा कि यदि नवादा स्टेशन पर स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो यह केवल यात्रियों की परेशानी नहीं, बल्कि रेल प्रशासन की अक्षमता का एक बड़ा प्रमाण होगा। विकास की रेंगती रफ्तार ने आम जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है। अब समय है कि अमृत भारत केवल कागजों पर नहीं, बल्कि यात्रियों के अनुभव में भी अमृत घोले।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




