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1 अगस्त, 2020|1:45|IST

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कैसे हो बैंकों की सुरक्षा, 15 फीसदी में ही सुरक्षा गार्ड

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दाउदनगर-औरंगाबाद पथ पर जिनोरिया गांव के समीप एनएच 139 पर इंडियन बैंक में 70 लाख की गुरुवार को हुई दिनदहाड़े लूट की घटना के बाद आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान ने बैंकों की सुरक्षा की पड़ताल की। इस दौरान नवादा जिले में बैंकों की सुरक्षा के मिले आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं।

जिले में को-ऑपरेटिव व दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक समेत विभिन्न बैंकों की कुल 137 शाखाएं हैं। इनमें से चार प्राइवेट बैंकों एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, आईडीबीआई व एक्सिस बैंक की शहर में स्थित शाखाएं भी शामिल हैं। को- ऑपरेटिव व दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंकों को तो ही छोड़ ही दीजिए। इनमें से शायद ही किसी बैंक की शाखाओं में सुरक्षा गार्ड हैं। बाकी के बैंकों में चार प्राइवेट बैंकों के अलावा जिले में जितने भी व्यावसायिक बैंक हैं, उनमें से महज 15 फीसदी बैंकों में ही सुरक्षा गार्ड उपलब्ध हैं। स्थाई पुलिस बलों की सुरक्षा चेस्ट वाले कुछ ही बैंकों को हासिल है। बाकी की सुरक्षा या तो सीसीटीवी या फिर सिक्यूरिटी अलार्म अथवा भगवान के भरोसे है। ऐसे में बैंककर्मी से लेकर ग्राहकों तक में हमेशा असुरक्षा का खौफ बना रहता है।

एटीएम का भी हाल बदहाल

सुरक्षा कारणों से एटीएम की स्थिति तो और भी बदहाल है। जिले में एटीएम की कुल संख्या 84 है। इनमें प्राइवेट समेत विभिन्न बैंकों के 66 एटीएम हैं। जबकि 18 व्हाईट लेबल एटीएम हैं जो गैर बैंकिंग संस्थाओं द्वारा संचालित हैं। इनमें से कई एटीएम 24 घंटे खुले रहते हैं। परंतु शहर से लेकर गांवों तक के प्राय: एटीएम में सुरक्षा गार्ड नहीं हैं। पड़ताल के दौरान इस बात का खुलासा हुआ कि महज बीस फीसदी एटीएम में ही गार्ड हैं, जबकि शेष गार्डरहित एटीएम हैं। इनकी सुरक्षा या तो सीसीटीवी करता है या फिर इसके भीतर लगी सेफ्टी डिवाइस से दिल्ली या मुम्बई स्थित कंट्रोल रूम मॉनिटर करता है। पुलिस से लेकर बैंक अधिकारियों तक के कहने के बाद भी बैंक कॉस्ट कटिंग के नाम पर इनमें सुरक्षा गार्ड नहीं देते।

सीएसपी की सुरक्षा संचालक पर

ग्राहक सेवा केन्द्र (सीएसपी) की सुरक्षा तो पूरी तरह से इसके संचालकों पर है। जिले में विभिन्न बैंकों के साढ़े तीन सौ से अधिक ग्राहक सेवा केन्द्र हैं। इनमें एसबीआई व पीएनबी के अकेले दो सौ से अधिक सीएसपी विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। इनके अलावा केनरा बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, इलाहाबाद बैंक व दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंकों के भी एटीएम हैं। दस हजार के अधिकतम लेनेदेन (ट्रांजैक्शन) की लिमिट के बाद प्राय: सीएसपी में लाखों कैश होते हैं, फिर भी सुरक्षा शून्य है। बैंक एग्रिमेंट में ही सुरक्षा का दायित्व संचालकों पर है।

2007 में हुई थी बैंक लूट

नवादा सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया की विजय बाजार स्थित शाखा में फरवरी 2007 में 28 लाख की लूट हुई थी। सुबह करीब दस बजे करीब जब मैनेजर व अन्य स्टॉफ बैंक खोलने जा रहे थे। उसी समय बदमाश भी मैनेजर व स्टॉफ के साथ बैंक के भीतर घुस गये। पिस्टल की नोंक पर बदमाशों ने चेस्ट खुलवाया तथा मैनेजर व स्टॉफ को चेस्ट में बंद कर 27.75 लाख लेकर भाग निकले। करीब आधे घंटे बाद अन्य स्टॉफ के आने पर घटना की जानकारी पुलिस को मिली। घटना का अब तक खुलासा नहीं हो सका।

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हाल में हुई घटनाओं पर एक नजर

06 फरवरी-

शहर के गढ़पर स्थित एक्सिस बैंक एटीएम में लूट की कोशिश। एटीएम पैनल उखाड़ा पर कन्ट्रोल रूम की सूचना पर रात में पहुंची पुलिस के कारण टली घटना।

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13 फरवरी-

सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया की विजय बाजार शाखा के नीचे लगे एटीएम का पैनल, लॉक व की- बोर्ड बदमाशों ने तोड़ा। परंतु कैश बॉक्स तक नहीं पहुंच सके बदमाश।

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02 जुलाई-

गोपाल नगर में एसबीआई का एटीएम लूटने की साजिश का खुलासा। नाले के नीचे से बनाई गयी थी सुरंग। सफाई में सुरंग से गैस सिलिंडर, कटर आदि बरामद।

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02 जून-

सीएसपी संचालक से कौआकोल में 2.30 लाख लूटे। संचालक जमुई में चलाता था सीएसपी। रुपये लेकर घर आने के दौरान बदमाशों ने दिया घटना को अंजाम।

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25 जून-

सीएसपी संचालक से पकरीबरावां में 2 लाख लूटे। संचालक कौआकोल में चलाता था सीएसपी। पकरीबरावां से रुपये लेकर लौटने के दौरान रास्ते में हुई घटना।

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बैंक अधिकारी बोले:-

सुरक्षा की व्यवस्था सभी बैंक अपने स्तर से करते हैं। इसकी जिम्मेवारी उनके प्रबंधन की है। जिलास्तरीय सुरक्षा समिति (डीएलएससी) की बैठक में सभी बैंकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उनके प्रबंधन से बात कर इसे मजबूत करने के निर्देश दिये जाते हैं। एटीएम में गार्ड की व्यवस्था को लेकर भी यही निर्देश हैं। अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यक्ता होने पर एसपी कार्यालय को आवेदन देकर पुलिसबल लिये जा सकते हैं।

- अनूप कुमार साहा, एलडीएम, नवादा।

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पुलिस कप्तान बोले:-

बैंकों को सुरक्षा गार्ड उनके स्तर से लगाना है। चेस्ट ब्रांचेज में ही स्थाई पुलिसबल की व्यवस्था है। गश्ती के क्रम में पुलिस प्रतिदिन संबंधित क्षेत्रों के बैंकों का जायजा लेती है। साथ ही पुलिस द्वारा बैंकों की नियमित सुरक्षा ऑडिट की जाती है। ऑडिट के दौरान सीसीटीवी व सिक्यूरिटी अलार्म की भी जांच की जाती है। बैंक अधिकारियों के साथ बैठक में उन्हें सुरक्षा को लेकर लोकल थाने के संपर्क में रहने के निर्देश दिये जाते हैं।

हरि प्रसाथ एस, एसपी, नवादा।

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  • Web Title:How to protect banks only 15 percent security guards