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गंगा दशहरा व्रत से होता है दस पापों का नाश

हिन्दुस्तान टीम,नवादाPublished By: Newswrap
Wed, 16 Jun 2021 04:30 PM
गंगा दशहरा व्रत से होता है दस पापों का नाश

नवादा। नगर संवाददाता

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी को गंगा नदी का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। इसलिए इस दिन गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है। इस साल 20 जून को गंगा दशहरा मनाया जाएगा। गंगा दशहरा का विधिपूर्वक व्रत करने से दस पापों से मुक्ति मिलती है। यह बातें ज्योतिषाचार्य सह वास्तुविद् पंडित धर्मेन्द्र झा ने कही। उन्होंने कहा कि इस दिन गंगा नदी में स्नान करने तथा उपवास और दान करने का विशेष महत्व है। ब्रह्मपुराण में कहा गया है कि हस्त नक्षत्र से संयुक्त ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी दस प्रकार के पापों का नाश करने वाला होता है। इस बार 75 साल बाद दिव्य योग बन रहा है जिसमें व्रत रखना अति शुभदायी है।

विधिपूर्वक करें यह व्रत, होगा बड़ा लाभ

पंडित धर्मेन्द्र झा ने कहा कि विधिपूर्वक व्रत रखने से जातक को अनेक लाभ होते हैं। साधक को उपवास रख कर गंगाजी के तट पर या समीप के किसी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करना चाहिए। इसके बाद गंगाजी का पूजन विधिपूर्वक करना चाहिए। अंत में ‘ऊं नम: शिवाय नारायण्यै दशहरायै गंगायै नम: मंत्र का जाप करें। इसके बाद ‘ऊं नमो भगवती ऐं ह्रीं श्रीं हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे मां पावय पावय स्वाहा मंत्र का पाठ कर पांच बार पुष्पांजलि अर्पण करें। गंगाजी के साथ ही गंगाजी को अवतरित करने वाले ऋषि भागीरथ जी एवं हिमालय का पूजन भी अवश्य करें। अंत में दस-दस मुट्ठी अनाज एवं अन्य वस्तु ब्राह्मणों को दान करें। इस दिन सत्तू का दान बेहद शुभ माना जाता है। सबसे अंत में गंगा दशहरा की कथा सुनकर व्रत का समापन करें।

इन दस पापों से मिलती है मुक्ति

पं.धर्मेन्द्र झा बताते हैं कि गंगा दशहरा का व्रत रखने से दस पापों से मुक्ति मिलती है। बिना अनुमति के दूसरे की वस्तु ले लेना, हिंसा, परस्त्रीगमन, कटु वचन बोलना, झूठ बोलना, पीठ पीछे बुराई या चुगली करना, निष्प्रयोजन बातें करना, दूसरे की वस्तु का अन्यायपूर्ण तरीके से ले लेने का सोचना, दूसरे के अनिष्ट का चिंतन करना और नास्तिक बुद्धि रखना यह दस पाप हैं, जिससे इस व्रत को रखने पर मुक्ति मिलती है। यह व्रत रखने से जातक के जीवन का सारा पाप कट जाता है।

व्रत का शुभ मुहूर्त:

गंगा दशहरा- 20 जून 2021, दिन- रविवार

दशमी तिथि प्रारंभ- 19 जून 2021, दिन-शनिवार, शाम 6:50 बजे से

दशमी तिथि समाप्त- 20 जून 2021, दिन- रविवार, शाम 4:25 बजे तक

21 जून को है निर्जला एकादशी

ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है। सभी 24 एकादशियों में यह एकादशी सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। इस साल यह 21 जून सोमवार को पड़ रहा है। इस दिन कठोर नियमों का पालन करते हुए भगवान विष्णु का भजन-कीर्तन और उपवास-पूजन करने से अनेकों लाभ मिलते हैं।

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