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28 नवंबर, 2020|10:52|IST

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बीज की महंगाई से आलू रोपाई में किसानों के नहीं ठहर रहे पैर

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मौसम अनुकूल होने से क्षेत्र में आलू रोपने का काम किसान जल्द कर लेना चाहते हैं लेकिन आलू के बीज की मंहगाई की वजह से किसानों के पैर नहीं ठहर रहे हैं। किसान इसके प्रति उदासीन और मायूस हैं। ज्यादातर किसान घर-परिवार के खाने भर आलू रोप लेने की बातें कहते हैं।

क्षेत्र के किसान नरेश माहतो, विश्वनाथ प्रसाद, उदय कुशवाहा, शैलेंद्र कुशवाहा, अमिरक माहतो आदि का का कहना है कि इतने मंहगें बीज लगाना संभव नहीं है। उसके बाद आलू की उपज की परिस्थिति क्या रहेगी। यह भी सोंचना पड़ता है। आज आलू के दाम आसमान छू रहे हैं लेकिन उपज होते ही इसका भाव गिर जाएगा और फिर हम औने-पौने दामों में इसे बेचने पर मजबूर होंगे। रोपाई के बाद खाद, दवा छिड़काव, पटवन और रख-रखाव का काम भी करना है। लेकिन वह तो बाद की बातें है पहले तो बीज की खरीददारी ही समझ में नहीं आ रहा है। सरकारी स्तर पर भी आलू के बीज में कोई अनुदान नहीं मिलता है।

इस साल आलू के बीज की कीमत में दोगुना हुआ ईजाफा

इस साल बाजार में आलू के बीज की कीमत 3100 रूपये प्रति क्विंटल से लेकर 3500 रूपये प्रति क्विंटल तक की है। जो कि पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुना है। पिछले साल 1700 रूपये प्रति क्विंटल से लेकर 2000 रूपये प्रति क्विंटल तक कीमतें थी। कीमतों में इतनी उछाल किसानों के लिए भारी है। गौरतलब हो कि इस साल आलू की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। आलू 34 से 38 रूपये किलो तक बिक रहा है। आढ़त और थोक व्यापारियों के यहां आलू की कीमतें 1500-1600 रूपये प्रति 48 किलों और 46 किलो की बोरी पड़ रहा है।

क्षेत्र में नहीं रखा जाता आलू का बीज

इन क्षेत्रो में आलू के बीज किसान संग्रहित कर नहीं रखते हैं। बीज के मामले में वे पूरी तरह बाजार पर निर्भर हैं। यहां आलू मुख्य रूप से यूपी और पश्चिम बंगाल से मंगाकर बिकता है। वहां के कीमत के अनुसार ही बाजार का कीमत निर्धारित होता है।

हिसुआ के इन गांवों में होती है आलू की खेती

हिसुआ क्षेत्र में आलू की खेती बड़े पैमाने पर नहीं होती है लेकिन किसान आलू लगाते हैं और अच्छी उपज भी करते हैं। पैदावार के बाद इससे नगदी आमदनी भी करते हैं। कोल्ड स्टोर में रखकर इसकी बाद में बिक्री आदि का काम करते हैं। हिसुआ के सोनसा, दोना, तुंगी, मंझवे, सिंधौली, हिसुआ डीह, बस्ती बिगहा के आस-पास सहित कई गांवों में इसकी अच्छी पैदावार होती है।

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  • Web Title:Farmers are not stopping their feet from planting seed potatoes