सदर अस्पताल में धूल फांक रही छह वेंटिलेटर मशीन
कोविड-19 की तीसरी लहर के बाद इबोला वायरस का प्रकोप बढ़ रहा है। नवादा सदर अस्पताल में तैयारी की कमी है, जबकि वेंटिलेटर और ऑक्सीजन प्लांट की स्थिति भी खराब है। स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी दी है कि मरीजों की जान संकट में पड़ सकती है।

वैश्विक महामारी कोविड-19 की तीसरी लहर के बाद सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन इन दिनों इबोला वायरस का प्रकोप सुनने को मिल रहा है। इसको लेकर एहतियातन जिले के सरकारी अस्पतालों में सारी व्यवस्था की अनिवार्यता पर स्वास्थ्य विभाग का जोर है। इसके बावजूद नवादा सदर अस्पताल में वर्तमान में कुछ भी तैयारी नहीं देखी जा रही है।
तैयारी की कमी
हालांकि अभी इबोला वायरस से जुड़ा कोई मामला नवादा जिले या आसपास नहीं देखा गया है, लेकिन इबोला वायरस से होने वाली परेशानियों के लक्षण के आधार पर सबसे जरूरी वेंटिलेटर है, जो नवादा सदर अस्पताल में उपलब्ध तो है, लेकिन टेक्निशियन के अभाव में यह धूल फांक रही है। जानकारी के अनुसार, कोरोना की पहली लहर के दौरान पीएम केयर फंड से जिले को 06 वेंटिलेटर मशीनें मिली थी। इन्हें नशामुक्ति वार्ड में इन्स्टॉल किया गया था, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर के आ जाने तक इन वेंटिलेटरों को संचालित करने की जहमत किसी ने नहीं उठायी थी। हालांकि, दूसरी लहर के प्रसार के पूर्व राज्य स्वास्थ्य विभाग के द्वारा चिकित्सक और टेक्नीशियन को वेंटिलेटर मशीनों को संचालित करने का प्रशिक्षण दिया गया था।
वेंटिलेटर की स्थिति
लेकिन जब दूसरी लहर का प्रकोप बढ़ा, तो चिकित्सक और टेक्नीशियन दोनों नदारद दिखे। हालांकि कुछ नौसिखिए स्वास्थ्यकर्मियों ने इसे चलाने की कोशिश की, लेकिन वे भी इसमें पूरी तरह सफल नहीं हो सके। अंतत: आउटसोर्स के जरिए किसी प्रकार जरूरत के अनुसार इसका उपयोग किया गया। वर्तमान स्थिति पर जानकारी देते हुए सिविल सर्जन डॉ. बिनोद कुमार ने बताया कि यूं तो अभी तक इबोला को लेकर किसी प्रकार की तैयारी के लिए कोई दिशा-निर्देश नहीं मिल सका है, लेकिन ऐसा होता है तो कोरोना काल की तरह एक बार फिर से आउटसोर्स के माध्यम से सभी वेंटिलेशन का संचालन किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य स्वास्थ्य विभाग संभवत: चिकित्सक और टेक्नीशियन को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी करें, तो जिले से स्वास्थ्यकर्मियों को भेजा जाएगा और फिर इनके माध्यम से सारी व्यवस्था संभाली जाएगी।
आउटसोर्स के माध्यम से संचालन
आधे-अधूरे तरीके से ही हो पाएगी तैयारी अभी को जो ताजा हालात हैं, उनमें तो यही लगता है कि इबोला को लेकर तैयारी संबंधी आदेश के बाद आनन-फानन में आधे-अधूरे तरीके से ही तैयारी हो पाएगी। मरीजों का दबाव बढ़ने पर अंतत: रेफर करने का ही विकल्प बचा रह जाएगा और मरीजों की जान रामभरोसे ही रह जाएगी। सामान्य उपलब्धता की बात की जाए तो गिने-चुने चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम ही बुरे हालात में बेड़ा पार लगाएगी। सदर अस्पताल में लगभग 34 चिकित्सक प्रतिनियुक्त हैं, जिनमें कुछेक ने छुट्टियां भी ले रखी है। महिला एवं प्रसूति विभाग में 07, सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में 05, फिजियोथेरेपी में 02, ईएनटी में 02, दंत विभाग में 01, मंडल कारा में 02 और बालगृह में 01 विशेषज्ञ चिकित्सक आदि ही हैं। अन्य चिकित्सा पदाधिकारी हैं, जो ओपीडी में कार्यरत हैं। इनके कंधों पर संक्रमित मरीजों के इलाज की जिम्मेवारी होगी। ---------------------- वर्जन: सदर अस्पताल में वेंटिलेटर की व्यवस्था है। छह वेंटिलेंटर है, उसे चलाने के लिए चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी को पूर्व में प्रशिक्षण दिया गया था। नई परिस्थितियों में इसके लिए फिर से एक टीम तैयार की जायेगी। वेंटिलेटर के साथ ही फिलहाल बंद पड़े ऑक्सीजन प्लांट चालू करने के लिए टेक्नीशियन की कमी को दूर किया जाएगा। अभी इबोला वायरस को लेकर तैयारी संबंधी कोई दिशा-निर्देश नहीं मिला है, लेकिन निर्देशित किए जाने पर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को समय रहते दुरुस्त कर लिया जाएगा। -डॉ. बिनोद कुमार, सिविल सर्जन, नवादा। ------------------- ऑक्सीजन प्लांट में तकनीकी परेशानी, फिलहाल बंद नवादा। इबोला वायरस के प्रसार के बीच वेंटिलेटर की अनिवार्यता की तरह ऑक्सीजन प्लांट का अधिभार भी बढ़ेगा, लेकिन ऑक्सीजन प्लांट भी बुरे हाल में है और पूरी तरह से बंद है। सदर अस्पताल में बड़े तामझाम के साथ ऑक्सीजन प्लांट लगा था, जिसे स्वास्थ्य विभाग की पहल पर चालू भी किया गया था। लेकिन मरीजों के बेड तक ऑक्सीजन गैस की सप्लाई में बड़ी अड़चन आ गई। प्लांट में आई किसी तकनीकी खामी के कारण मरीजों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन गैस उपलब्ध कराने में समस्या आ रही थी। तत्कालीन डीएम यश पाल मीणा की पहल के बाद जिला स्वास्थ्य समिति को इसमें सुधार को लेकर जिम्मेवारी सौंपी गई थी। हालांकि इसके बाद भी यह पूरी तरह से कारगर साबित नहीं हुई और अंतत: यह निरर्थक ही साबित हुई। इस बीच, कुछ समय पूर्व ऑक्सीजन प्लांट के कुछ उपकरणों की चोरी भी हो गयी। मामला केस-मुकदमा तक पहुंचा, लेकिन सार्थक कुछ भी नहीं हो सका। (नवादा से राजेश मंझवेकर)
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