जर्जर आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को भेजने से कतरा रहे ग्रामीण

Mar 08, 2026 05:26 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नवादा
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​नरहट, एक संवाददाता। पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया और नौनिहालों के बेहतर भविष्य के बड़े-बड़े दावे, पर जमीनी हकीकत इन दावों को मुंह चिढ़ा रही है।

जर्जर आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को भेजने से कतरा रहे ग्रामीण

​नरहट, एक संवाददाता। पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया और नौनिहालों के बेहतर भविष्य के बड़े-बड़े दावे, पर जमीनी हकीकत इन दावों को मुंह चिढ़ा रही है। प्रखंड के देवरा बेलदारी गांव से शिक्षा और बाल विकास की एक ऐसी तस्वीर विभाग के संवेदनशीलता पर गंभीर सवालिया निशान खड़ा करती है। आंगनबाड़ी केंद्र अपनी बदहाली के आंसू रो रहा है, जहां मासूम बच्चों की किलकारियों की जगह अब मवेशियों की आवाजें सुनाई देती है। ​देवरा बेलदारी गांव का आंगनबाड़ी केंद्र वर्तमान में एक जर्जर ढांचे में तब्दील हो चुका है। भवन की छत से प्लास्टर गिर रहा है और दीवारों में आई बड़ी-बड़ी दरारें किसी भी वक्त बड़े हादसे को दावत दे रही है।

आलम यह है कि बारिश के दिनों में छत टपकती है, जिससे अंदर बैठना तो दूर, जरूरी रिकॉर्ड्स को बचाना भी मुश्किल हो जाता है। आंगनबाड़ी का फर्श पूरी तरह उखड़ चुका है और खिड़की-दरवाजे गायब हो चुके हैं। ​सबसे विचलित करने वाली बात यह है कि जिस स्थान पर छोटे बच्चों को खेल-खेल में प्रारंभिक शिक्षा दी जानी चाहिए और उन्हें पोषण मिलना चाहिए, वहां अब गांव के मवेशियों का कब्जा है। केंद्र के ठीक सामने और बरामदे में लोग बेखौफ होकर अपने पशुओं को बांधते हैं। चारों तरफ फैली गंदगी, गोबर के ढेर और बदबू ने इस केंद्र को किसी अस्तबल जैसा बना दिया है। स्वच्छता के दावों के बीच, मासूमों के बैठने की जगह पर पसरी यह गंदगी बीमारियों को सीधा निमंत्रण दे रही है। ​पोषाहार और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा पर संकट ​आंगनबाड़ी केंद्रों का मुख्य उद्देश्य 3 से 6 वर्ष के बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करना और उन्हें कुपोषण से बचाना है। लेकिन देवरा बेलदारी में यह व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जब केंद्र ही सुरक्षित नहीं है, तो वहां पोषाहार का वितरण और शिक्षा की गतिविधियां कैसे संचालित होंगी? यह न केवल बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि शिक्षा के अधिकार का भी खुला उल्लंघन है।​ इस मामले में बाल विकास परियोजना विभाग की भूमिका सुस्त नजर आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते इस भवन की मरम्मत नहीं की गई या इसे किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित नहीं किया गया तो कभी भी कोई अप्रिय घटना घट सकती है। ​अभिभावकों में डर और आक्रोश है। ​जर्जर भवन और गंदगी के कारण गांव के अभिभावकों में गहरा डर व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि हम अपने कलेजे के टुकड़ों को ऐसे मौत के कुएं में कैसे भेज दें। दीवारें कब गिर जाए, कोई ठिकाना नहीं। ऊपर से गंदगी इतनी है कि बच्चा स्कूल जाने के बदले बीमार होकर घर लौटेगा। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों को इसकी सूचना दी, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। परिणामस्वरूप, अभिभावक अपने बच्चों को केंद्र भेजने से हिचकिचा रहे हैं, जिससे बच्चों का प्रारंभिक शैक्षणिक और शारीरिक विकास पूरी तरह बाधित हो रहा है।

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