
राजस्व कचहरी का हाल जर्जर, आवश्यक कागजात हो रहे बर्बाद
कौआकोल, एक संवाददाता। राजस्व कचहरी कौआकोल का हाल विभागीय देखरेख के अभाव में जर्जर हो रहा है। भवन की दीवार तथा छौनी छप्पर पूरी तरह से जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच गया है।
कौआकोल, एक संवाददाता। राजस्व कचहरी कौआकोल का हाल विभागीय देखरेख के अभाव में जर्जर हो रहा है। भवन की दीवार तथा छौनी छप्पर पूरी तरह से जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच गया है। जहां अंचल क्षेत्र के विभिन्न राजस्व कर्मचारियों को बैठकर कामकाज को निपटाना होता है। गर्मी तथा ठंड के मौसम में तो किसी तरह बैठकर राजस्व कर्मचारियों द्वारा बैठकर काम काज निपटा लिया जाता है, पर बरसात के दिनों में उस भवन में बैठकर काम काज निपटाना मुश्किल हो जाता है। छप्पर का जर्जर होने के कारण बरसात के दिनों में पानी अंदर कमरा में ही गिरता है। बांस बल्ला भी टूट टूटकर गिरने लगा है।
खपड़ा आदि भी गिरकर बर्बाद हो रहा है। अब तो भवन का दीवार भी टूटना प्रारंभ हो गया है। बावजूद कर्मियों को उसी भवन में बैठकर काम काज करना पड़ता है। उन कमरों में बैठकर काम करने वाले कर्मियों द्वारा प्लास्टिक डालकर किसी तरह काम काज को निपटाते हैं। भवन का जर्जर अवस्था में होने के कारण कचहरी में रखे प्रखंड के विभिन्न पंचायतों के भूमि से संबंधित रिकॉर्ड बर्बाद हो रहा है। जिससे विभाग के साथ भू-स्वामियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस राजस्व कचहरी में प्रखंड के लालपुर, महुडर, पहाड़पुर, बरौनी, सेखोदेवरा, मंझिला, दरावां, देवगढ़ तथा कौआकोल पंचायत के किसानों की भूमि से संबंधित रिकॉर्ड रखें हुए हैं। जो रखरखाव एवं भवन के जर्जर रहने के कारण पूरी तरह से असुरक्षित हैं। विभिन्न पंचायतों के भूमि से संबंधित बहुत से रिकॉर्ड सड़कर बर्बाद भी हो चुके हैं। बावजूद कचड़े की ढेर की तरह कागजों उसी भवन में छोड़ दिया गया है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि उस जर्जर कचहरी के भवन से सभी रिकॉर्ड को वहां से हटाकर अंचल कार्यालय में ही अगर रख दिया जाए तो उसे बर्बाद होने से बचाया जा सकता है। पर लापरवाही के चलते किसी भी अधिकारी और कर्मचारी का ध्यान इस तरफ नहीं जा पा रहा है। जर्जर हालत में पहुंच चुके भवन को भी सरकारी स्तर टेंडर के माध्यम गिराकर राजस्व विभाग द्वारा कचहरी की भूमि का पैमाइश करा कर उसका घेराबंदी कर राजस्व कचहरी के लिए नये भवन का निर्माण करा दिए जाने से अतिक्रमण के शिकार से बचाया जा सकता है। विभाग की अनदेखी के कारण हो रहा है अतिक्रमण का शिकार विभाग की अनदेखी के कारण स्थानीय लोगों के द्वारा राजस्व कचहरी कौआकोल की भूमि का तेजी से अतिक्रमण किया जा रहा है। जिस पर न तो किसी अधिकारी का ध्यान जा पा रहा है और न ही किसी जनप्रतिनिधि का। लिहाजा दिन प्रतिदिन राजस्व कचहरी की भूमि का एरिया का सिकुड़ता चला जा रहा है। कचहरी परिसर से ही आने जाने का रास्ता तथा कचड़ा फेंकने का स्थान बना दिया गया है। जेपी सेनानी के प्रांतीय सदस्य जयप्रकाश यादव ने बताया कि इस कचहरी की मरम्मती कराए जाने तथा अतिक्रमणकारियों के चंगुल से मुक्त कराए जाने के लिए स्थानीय अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया। बावजूद किसी भी अधिकारी का ध्यान इस कचहरी की ओर नहीं जा पा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर विभाग इसी तरह लापरवाही बरतती रही तो कुछ ही दिनों में कचहरी की भूमि का अतिक्रमण कारियों द्वारा अतिक्रमण कर लिया जाएगा। बता दें कि जमींदारी काल के ही निर्मित इस राजस्व कचहरी में पहले अंचल के सभी कर्मचारी संबंधित पंचायत के भूमि की रिकॉर्ड के साथ रहते थे। उनका निवास भी वहीं होता था। आम जनता को उन कर्मचारियों से मिलकर काम काज कराने में सहुलियत होती थी। पर कचहरी का हाल जर्जर हो जाने से न तो वहां कर्मचारी रहते हैं और न ही कोई रिकॉर्ड ही सुरक्षित हैं। जो आने वाले दिनों में भू-स्वामियों के लिए परेशानी खड़ी करेगा।

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