
देवोत्थान एकादशी : भगवान विष्णु से की गई मनोकामना सिद्धि की प्रार्थना
संक्षेप: नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता।समस्त पापों से मुक्ति व मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला देवोत्थान एकादशी व्रत श्रद्धालुओं ने शनिवार को किया।
नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। समस्त पापों से मुक्ति व मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला देवोत्थान एकादशी व्रत श्रद्धालुओं ने शनिवार को किया। देव प्रबोधिनी या देव उठावनी एकादशी के नाम से भी जाने जाने वाले देवोत्थान एकादशी पर श्रद्धालुओं ने विधि पूर्वक पूजन कर सर्वकल्याण की कामना की। इसी के साथ चातुर्मास का समापन भी हो गया। सनातन धर्म में सभी एकादशियों में सर्वोत्तम देवोत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु का शयन काल समाप्त हो जाने के साथ ही विवाह आदि शुभ और मांगलिक कार्यों का आरंभ हो जाएगा। देवोत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु के जागरण के साथ ही विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे सभी शुभ कार्य पुन: शुरू हो जाएंगे।

शुभ मुहूर्त में श्रद्धालुओं ने किया पूजन देव जागरण या उत्थान होने के कारण देवोत्थान एकादशी पर श्रद्धालुओं ने शुभ मुहूर्त में पूजन किया। कार्तिक माह की एकादशी पर ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 50 मिनट से सुबह 05 बजकर 41 मिनट तक रहा। वहीं अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक रहा। पूजा के शुभ मुहूर्त का ध्यान रख कर श्रद्धालुओं ने पूजन किया। पर्व पर उपवास रख कर सारे विधान पूर्ण करने के साथ ही श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण भी किया। विधि-विधान से की जाने वाली पूजा-अर्चना और विशेष अनुष्ठान के क्रम में श्रद्धालुओं ने प्रात: काल स्नान करके व्रत का संकल्प लिया और भगवान विष्णु की विधिवत पूजा की। इस दिवस पर अनेक श्रद्धालुओं ने अपने घर में तुलसी विवाह का भी आयोजन किया। तुलसी के पौधे को विशेष रूप से सजाया गया और उसके साथ शालीग्राम का विवाह कराया गया। भक्तों दिनभर व्रत रखकर श्री हरि विष्णु के नाम का स्मरण किया जबकि अनेक श्रद्धालुओं ने रात में जागरण भी किया। एकादशी व्रत पर चावल से रखा परहेज एकादशी व्रत के नियमों के अनुपालन के क्रम में श्रद्धालुओं ने चावल का सेवन नहीं किया। खान-पान के साथ ही सभी ने व्यवहारिकता और सात्विकता का पालन किया। पति-पत्नी ने ब्रह्नाचार्य का पालन किया जबकि किसी से भी कठोर शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया। नियमानुकूल सभी श्रद्धालुओं ने सुबह जल्दी उठने और शाम के समय नहीं सोने का खास ख्याल रखा। शहर के ज्योतिषाचार्य पंडित धर्मेन्द्र झा ने बताया कि एकादशी के दिन चावल खाने से प्राणी रेंगने वाले जीव की योनि में जन्म पाता है। लेकिन द्वादशी को चावल खाने से इस योनि से मुक्ति मिलती है। पौराणिक कथा के अनुसार, माता शक्ति के क्रोध से बचने के लिए महर्षि मेधा ने शरीर त्याग कर दिया और उनका अंश पृथ्वी में समा गया। चावल और जौ के रूप में महर्षि मेधा उत्पन्न हुए, इसलिए चावल और जौ को जीव माना जाता है। जिस दिन महर्षि मेधा अंश पृथ्वी में समाया था, उस दिन एकादशी तिथि थी। इसलिए इस दिन चावल खाने से परहेज करने की परम्परा श्रद्धालुओं ने निभाई। ------------------- ईख की बिक्री रही परवान पर नवादा। देवोत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु को ईख का प्रसाद अनिवार्य रूप से चढ़ाया जाता है। इसको लेकर ईख का बाजार काफी दमदार रहा। सामान्य ईख 40 रुपए जबकि लाल ईख 50 रुपए पीस की दर पर बिका। शहर के प्रजातंत्र चौक समेत इंदिरा चौक, स्टेशन के समीप स्थित रेलवे क्रॉसिंग आदि प्रमुख स्थानों के अलावा शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर ईख के गट्ठर रख कर बिक्री की गई और सुबह से लेकर देर शाम तक लोग खरीदारी के लिए पहुंचते रहे। जेठान के मौके पर हर सनातनी के हाथों में ईख नजर आता रहा। कोई चार से पांच तो कोई एक का ही टुकड़ा कराकर विधान की परम्परा निभाते दिखे।

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