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मंझिला पंचायत के अमरपुर वार्ड 08 में अब तक नहीं पहुंचा नल का जल

मंझिला पंचायत के अमरपुर वार्ड 08 में अब तक नहीं पहुंचा नल का जल

संक्षेप:

कौआकोल। शिवशंकर सिंहकौआकोल प्रखंड की मंझिला पंचायत के अमरपुर वार्ड संख्या 08 में विकास की गति काफी धीमी है।

Dec 17, 2025 02:37 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नवादा
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कौआकोल। शिवशंकर सिंह कौआकोल प्रखंड की मंझिला पंचायत के अमरपुर वार्ड संख्या 08 में विकास की गति काफी धीमी है। खास कर अनुसूचित जनजाति बहुल इस गांव में विकास के साथ साथ गांव में शिक्षा स्वास्थ्य, सड़क, पानी तथा रोजगार आदि का भी पूर्ण रूप से अभाव है। गांव में मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के तहत नल जल की सुविधा नहीं बहाल किए जाने से लोग पीने की पानी को लेकर काफी परेशान हैं। विभाग द्वारा गांवों में लगाए गए चापाकल या तो मरम्मत के अभाव में बेकार पड़ा हुआ है या फिर पानी का स्तर नीचे चले जाने के कारण मवेशियों के बांधने के काम में आ रहा है।

उक्त वार्ड में सरकारी मदद से लगाए गए चापाकल मरम्मत के अभाव में यूं ही बेकार पड़ा हुआ है। अमरपुर गांव में सिर्फ अनुसूचित जनजाति की आबादी है। सरकार इसके विकास के लिए तरह-तरह की योजनाएं चला रखी है। इसके बावजूद इस गांव में निवास करने वाले लोगों तक विकास की किरण नहीं पहुंच सकी है। रोजगार के अभाव में लोग आर्थिक तंगी से जूझने को विवश हैं। इन जनजाति समुदाय के विकास के प्रति न तो कोई जनप्रतिनिधि गंभीर है और न ही पदाधिकारी। ग्रामीण भोला राय बताते हैं कि पानी, शिक्षा तथा रोजगार की समस्या उनके गांव के लिए कोई नई बात नहीं है। जब से उन्होंने अपना होश संभाला है तब से लगातार पानी, शिक्षा और रोजगार की समस्या से जूझते चले आ रहे हैं। पर आज तक किसी ने उन लोगों को इन मूलभूत समस्याओं से निजात दिलाने के लिए प्रयास नहीं किया। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों द्वारा आपस में चंदा कर एक चापाकल लगाने का काम किया गया। पर जैसे ही फाल्गुन का महीना प्रवेश करता है, चापाकल पानी देना बंद कर देता है। जब बारिश का मौसम आता है, तब चापाकल से पानी निकलना शुरु होता है। बाकी के छह महीना दूसरे गांव से पानी ढोकर दैनिक उपयोग में लाया जाता है। पीने के लिए प्रत्येक दिन बोतल वाला पानी खरीदना पड़ता है। जो काफी कष्टदायक और खर्चीला साबित हो रहा है। जिनके यहां परिजनों की संख्या कम है, वे कम खर्च में ही निपट जा रहे हैं। पर जिनके यहां परिजनों की संख्या अधिक है, उनके लिए पानी खरीदकर पीना मुश्किल हो रहा है। ---------------- गांव में स्कूल तक नहीं, यातायात की भी सुविधा नहीं गांव में न तो शिक्षा के नाम पर कोई विद्यालय है और न ही विकास के नाम पर यातायात की ही कोई सुविधा है। लोगों को पैदल ही बाजार आदि जाने पड़ते हैं। समस्या संबंधी शिकायतें सुनी जाती हैं, पर कार्रवाई कुछ नहीं होता। इन समस्याओं को लेकर कई बार ग्रामीणों द्वारा प्रखंड कार्यालय जाकर बीडीओ से शिकायत कर बिगड़े हुए चापाकलों की मरम्मत कराने का आग्रह किया गया, पर आश्वासन के सिवा कुछ भी नहीं मिला। अंत में थक-हार कर लोग दूसरे गांव से पानी ढोकर अपना काम करने लगे। इस परिस्थिति में ग्रामीणों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। गांव में पूर्व से लगे चापाकल भी मरम्मत नहीं हो पाने के कारण बिगड़े पड़े हुए हैं। नतीजतन, ग्रामीणों को दूसरे गांव की बधार स्थित सबमर्सिबल से पानी ढोकर लाने की विवशता है। अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा इस पेयजल संकट से निजात दिलाने को सकारात्मक पहल भी नहीं की जा रही है। ---------------- पीने के पानी के लिए लगानी पड़ती है दौड़ मंझिला के वार्ड संख्या आठ में तकरीबन 150 की आबादी है। जो पेयजल संकट से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य , सड़क तथा रोजगार की समस्या का सामना कर रही है। पीने के पानी के लिए प्रतिदिन महिलाओं को मंझिला गांव की बधार स्थित सबमर्सिबल की ओर दौड़ लगाना पड़ता है या फिर दूसरे में घरों में लगे सबमर्सिबल से पानी लाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में नल-जल योजना तथा पहाड़ी चापाकल लगाने के लिए बीडीओ से लेकर क्षेत्रीय विधायक तक दर्जनों बार दौड़ लगाता गया, पर परिणाम शून्य ही रहा। सभी जगह से सिर्फ आश्वासन ही मिले। लिहाजा, ग्रामीण पीने से लेकर दैनिक उपयोग के लिए पानी की व्यवस्था करने में परेशान हैं। पीएचईडी विभाग भी पूरी तरह से निष्क्रिय बना हुआ है। बार-बार ग्रामीणों द्वारा बिगड़े पड़े चापाकलों की मरम्मत के लिए आग्रह किए जाने के बावजूद विभाग के अधिकारियों के उपर किसी तरह का प्रभाव नहीं पड़ रहा है। पीएचईडी विभाग के अधिकारी न तो कभी कौआकोल आते हैं और न ही समस्या को लेकर गंभीर हैं। अन्य समस्याओं की भी इसी प्रकार से अनदेखी जारी है। ---------------- स्थानीय विधायक से किया गया आग्रह भी गया बेकार ग्रामीणों की शिकायत है कि गांव में पानी विकराल बनी समस्या के बारे में स्थानीय विधायक से निजात दिलाने के लिए आग्रह किया गया। गांव के मुख्य चौराहों पर एक-दो जगह पर पहाड़ी चापाकल लगाने की पहल की भी गयी, पर आज तक उनके द्वारा किसी तरह का पहल नहीं किया गया। यहां तक कि उन्होंने गांव में बिगड़े हुए चापाकलों की मरम्मत तक कराने की किसी तरह की कोशिश नहीं की। अंत में ग्रामीण उनसे आग्रह करना छोड़ दिया। ग्रामीणों की शिकायत है कि वोट के समय ही विधायक और सांसद के लोग गांव पहुंचते हैं। इसके बाद न तो वे लोग नजर आते हैं और न ही विधायक व सांसद। सांसद से भी इस समस्या को अवगत कराकर निदान करने के लिए आग्रह करने का मन बनाया गया, पर सांसद का कभी कौआकोल का दौरा नहीं होने से बात नहीं बन सकी। ----------------------- बुनियादी सुविधाओं से वंचित गांव की अनदेखी से लोग हैं निराश कौआकोल। कौआकोल प्रखंड की मंझिला पंचायत के अमरपुर गांव में आजादी के सात दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी ग्रामीण बुनियादी नागरिक सुविधाओं से महरूम हैं। यह गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से कटा हुआ महसूस कर रहा है, जहां की प्रमुख समस्याएं सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य हैं। गांव की तमाम बड़ी समस्याओं के बीच जर्जर और खराब सड़कें भी परेशानीदायक बनी हुई हैं। अमरपुर को मुख्य सड़क से जोड़ने वाली संपर्क पथ की स्थिति अत्यंत दयनीय है। यह मार्ग पूरी तरह से कच्चा और कीचड़ भरा है। बरसात के मौसम में तो यहां पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने के बावजूद सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो सका है। शिक्षा के क्षेत्र, खासकर लड़कियों की शिक्षा पर इसका सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करें तो गांव में कोई व्यवस्था नहीं है। मामूली बीमारी या आपातकालीन स्थिति में ग्रामीणों को इलाज के लिए 10 किलोमीटर दूर स्थित अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ता है। कई बार गंभीर मामलों में समय पर इलाज न मिल पाने के कारण स्थिति बिगड़ जाती है। सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य के अलावा, गांव में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती है। कई हैंडपंप खराब पड़े हैं और जो चालू हैं उनका पानी भी गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरता। बिजली की समस्या भी बनी रहती है। अनियमित बिजली आपूर्ति से ग्रामीण परेशान हैं। ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन और जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि वे अमरपुर गांव की इन गंभीर बुनियादी समस्याओं पर तत्काल ध्यान दें और आवश्यक विकास कार्य शुरू कराएं, ताकि यहां के लोगों को भी एक सम्मानजनक और सुविधापूर्ण जीवन जीने का मौका मिल सके। ---------------------- लोगों की व्यथा: अमरपुर गांव में किसी भी प्रकार की सरकारी सुविधा मुहैया नहीं है। गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य सड़क, पानी तथा रोजगार की सुविधा पूरी तरह से नगण्य है। सरकार की बहुमुखी सात निश्चय योजना के तहत आने वाला नल-जल योजना का लाभ भी ग्रामीणों को नहीं मिल सका है। लोग पीने से लेकर दैनिक उपयोग के लिए पानी जुटाने में परेशान हैं। ग्रामीणों की समस्या को कोई सुनने वाला नहीं है। -भोला राय, ग्रामीण। गांव में आंगनबाड़ी केंद्र से लेकर प्राथमिक विद्यालय तथा अस्पताल कुछ भी नहीं हैं। लिहाजा, गांव के लोग हर तरह की मूलभूत सुविधाओं से महरूम हैं। शिक्षा की की कोई व्यवस्था नहीं रहने से गांव की पूरी आबादी अंगूठा छाप है। हमारी कोई सुनने वाला भी नहीं है। ऐसे में लगता नहीं कि आने वाले दिनों में भी हमारा कोई भला हो पाएगा। हमारी समस्याओं की अनदेखी घोर निराशाजनक है। -मनोज राय, ग्रामीण। स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा पदाधिकारियों की लापरवाही के कारण इस गांव तक विकास की किरणों से पूरी तरह से दूर है। गांव के विकास के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा अधिकारियों को ध्यान देने की आवश्यकता है। हम ग्रामीणों ने यथासंभव अनेक प्रयास किए, लेकिन परिस्थतियां कभी अनुकूल बन ही नहीं सकीं। अब तो हम सबने में उम्मीद भी छोड़ दी है कि हमारा कुछ भला हो सकेगा। -कारु राय, ग्रामीण। पंचायत के अमरपुर गांव के वार्ड संख्या आठ में मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। वहां विकास की दरकार है। गांव में विकास की विभिन्न योजनाओं को धरातल पर उतारने की जरूरत है। आजादी के इतने साल बीत जाने के बावजूद भी यहां न तो कोई विद्यालय की व्यवस्था हो सकी है और न ही आंगनबाड़ी केंद्र का ही। जिससे सरकार की अशिक्षा दूर करने की मुहिम धूल फांक रहा है। -रामचंद्र सिंह, ग्रामीण।

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