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बाल अधिकार के बावजूद नहीं संवर रही बाल श्रमिकों की जिंदगी

बाल अधिकार की पूरी व्यवस्था के बावजूद बाल श्रमिकों की जिंदगी नहीं संवर रही है। हालांकि जिला श्रम प्रवर्तन कार्यालय बाल अधिकार के तहत बाल श्रमिकों को पुनर्वास संबंधी लाभ देने के लिए तत्पर...

बाल अधिकार के बावजूद नहीं संवर रही बाल श्रमिकों की जिंदगी
हिन्दुस्तान टीम,नवादाThu, 13 Jun 2024 02:45 PM
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नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता।
बाल अधिकार की पूरी व्यवस्था के बावजूद बाल श्रमिकों की जिंदगी नहीं संवर रही है। हालांकि जिला श्रम प्रवर्तन कार्यालय बाल अधिकार के तहत बाल श्रमिकों को पुनर्वास संबंधी लाभ देने के लिए तत्पर है। चुनावी आचार संहिता हट जाने के बाद संबंधित योजनाओं पर अमल में तेजी आने की उम्मीद है। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस प्रति वर्ष 12 जून को मनाया जाता है। सभी के लिए सामाजिक न्याय के तहत बाल श्रम का अंत करने समेत शिक्षा आदि का अधिकार उपलब्ध कराने का उद्देश्य इस दिवस का है, लेकिन इसका व्यापक असर नहीं दिख पाता है। आज भी जिले भर में गरीब व मजदूर तबके के बच्चों को अपनी उम्र से ज्यादा बड़े जोखिम भरे कार्यों में लिप्त देखा जाता है। विभागीय लोग इसकी खुलेआम अनदेखी करते हैं।

शहर हो या ग्रामीण क्षेत्र लगभग गरीब व सुविधाविहीन बच्चे धुमन्तु का जीवन जी रहे हैं तथा बाल श्रम करने को बाध्य हैं। शहर के स्टेशन रोड, रेलवे लाइन स्थित स्लम एरिया, तमाम मुसहर टोला आदि स्थानों के बच्चे बाल श्रम कर कमाई कर तो रहे हैं लेकिन इस का उपयोग नशीले पदार्थ के सेवन में कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में सुलेशन, आयोडेस्क, कोरेक्स जैसे केमिकल और दवाओं का नशा के लिए सेवन कर रहे हैं। इन्हीं परिस्थितियों से बाहर निकालने के लिए प्रति वर्ष 12 जून को विश्व बाल श्रम दिवस आयोजित कर सरकारों, नियोक्ताओं, श्रमिक संगठनों, नागरिक व समाज को बाल श्रमिकों को उनकी दुर्दशा से दूर करने और उनकी मदद के लिए कार्य करने पर जोर दिया जाता है।

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