
मेसकौर बाजार में सामुदायिक शौचालय की स्थिति हुई जर्जर
मेसकौर बाजार में सामुदायिक शौचालय जर्जर हालत में है, जिससे स्थानीय लोग परेशान हैं। शौचालय का निर्माण पांच वर्ष पहले हुआ था, लेकिन पानी की कमी के कारण यह कभी उपयोग में नहीं आया। अब शौचालय झाड़ियों में तब्दील हो गया है, और लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं। प्रशासन को इस स्थिति का सुधार करने की आवश्यकता है।
मेसकौर, निज प्रतिनिधि मेसकौर बाजार स्थित सामुदायिक शौचालय लोगों को मुंह चिढ़ा रहा है। आलम यह है कि शौचालय पूरी तरह जर्जर हाल में पहुंच चुका है। आसपास गंदगी का अंबार लगा है। चारों तरफ झाड़ियां उग आई हैं। उचित देखरेख के अभाव में यह शौचालय पूरी तरह उपयोग विहीन होकर रह गया है। हालांकि लोगों का कहना है कि सामुदायिक शौचालय के निर्माण के वक्त ही पानी की व्यवस्था नहीं की जा सकी थी। जिसके कारण लोग शौचालय का उपयोग नहीं कर पाए। धीरे-धीरे यह जर्जर हाल में पहुंच गया। स्थानीय लोगों की मानें तो तकरीबन पांच वर्ष पूर्व मेसकौर बाजार में सामुदायिक शौचलय का निर्माण कराया गया था।
इस पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे। इसके बावजूद कभी भी यह शौचालय उपयोग करने लायक नहीं रहा। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह पानी का नहीं होना था। शौचालय में पानी की व्यवस्था नहीं किए जाने के कारण लोग इस शौचालय का उपयोग नहीं कर सके। अब इस शौचालय की हालत बिल्कुल खराब हो गई है। ऐसे में मेसकौर में लाखों रूपए की राशि खर्च किए जाने के बावजूद योजना फिसड्डी साबित हो कर रह गई है। प्रखंड मुख्यालय स्थित सामुदायिक शौचालय की स्थिति तो यह है कि उद्धघाटन के कुछ ही दिनों बाद देखरेख व पानी के अभाव में जर्जर हालत बनी है। खिड़की और दरवाजा उखड़ गये हैं और शौचालय झाड़ी में तब्दील हो गया है। गौरतलब है कि मेसकौर को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। इसके तहत लोगों के घर शौचालय का निर्माण कराया गया। लेकिन वह शौचालय भी बेकार हो गया है। आलम यह है कि स्वच्छता अभियान के तहत निर्मित शौचालय जलावन का सामान रखने के उपयोग में आ रहा है। लोग खुले में शौच का त्याग कर रहे हैं। प्रतिदिन हजारों लोगों का होता है आवागमन गौरतलब है कि मेसकौर बाजार में प्रतिदिन हजारों लोगों का आवागमन होता है। कोई सरकारी कार्यालयों में कामकाज के लिए पहुंचते हैं तो कोई जरूरत के हिसाब से खरीदारी करने के लिए। ऐसे में लोगों को शौच महसूस होने पर तमाम प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोग खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत महिलाओं को उठानी पड़ती है। लोगों की मानें तो मेसकौर बाजार में प्रतिदिन करीब पांच हजार लोगों को आना-जाना लगा रहता है। इसके बावजूद बाजार में सामुदायिक शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है। पांच वर्ष शौचालय का निर्माण तो कराया गया, लेकिन वह भी बेकार साबित हो गया। स्थानीय लोगों ने प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए बाजार में सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराने की मांग की है। बीडीओ अश्विनी कुमार ने बताया कि यह जानकारी मिली है कि शौचालय की स्थिति काफी दयनीय है और सामुदायिक शौचालय झाड़ी में तब्दील हो गई है। पर्याप्त सुधार कर लोगों की समस्या से निजात दिलाने का कोशिश की जाएगी।

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