कॉमर्शियल गैस की बढ़ी कीमतों से बिगड़ सकता है जायका

Newswrap हिन्दुस्तान, नवादा
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देशभर में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 993 रुपए बढ़ गए हैं। इसका प्रभाव खानपान और छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा। खाने-पीने की वस्तुओं के दाम 10 से 20 फीसदी तक बढ़ सकते हैं। होटल और रेस्टोरेंट की लागत में वृद्धि से ग्राहकों पर असर पड़ेगा। प्रशासन ने मुनाफाखोरी पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

कॉमर्शियल गैस की बढ़ी कीमतों से बिगड़ सकता है जायका

देशभर में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 993 रुपए बढ़ गए हैं। जिले में इसका असर सीधे तौर पर खानपान, छोटे कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ने की आशंका है। इस अप्रत्याशित वृद्धि के कारण 10 से 20 फीसदी तक खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं। ​कीमतों में इस उछाल का सबसे पहला और सीधा प्रहार होटल, ढाबे और रेहड़ी-पटरी वालों पर पड़ने वाला है। कुछ जानकारों के अनुसार, किसी भी होटल या रेस्टोरेंट की कुल परिचालन लागत का लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा एलपीजी पर खर्च होता है। अब 993 रुपए की भारी वृद्धि के बाद यह गणित पूरी तरह बिगड़ गया है। नवादा के स्थानीय बाजारों से मिले प्रारंभिक संकेतों के अनुसार, खाने-पीने की वस्तुओं के दाम 10 से 20 फीसदी तक बढ़ सकते हैं। जो समोसा या चाय पहले एक निश्चित दाम 10 से 12 रुपए पर उपलब्ध थी, अब उसके लिए ग्राहकों को 15 से 20 रुपए तक खर्च करनी होगी।

वर्तमान स्थिति

शहर स्थित राजश्री गैस एजेंसी के संचालक सह चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स के जिलाध्यक्ष राजेश्वर प्रसाद राजेश ने वर्तमान स्थिति स्पष्ट किया कि फिलहाल उपलब्धता सामान्य है। मांग के अनुकूल आपूर्ति जारी है। जब कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति बंद की गयी थी, तब थोड़ी खींचतान थी लेकिन अब एक बार फिर से गोदामों से होने वाली सप्लाई का दबाव घट गया है। उन्होंने बाजार के हालात पर कहा कि कुछ गिने-चुने साग्रमी पर भले ही एलपीजी खर्च अधिक हो जाए, लेकिन अमूमन खाने-पीने की वस्तुओं पर महज पांच से छह फीसदी तक ही एलपीजी खर्च आता है, इसलिए एलपीजी की कीमतों में वृद्धि के बाद भी सामग्रियों की मूल्य वृद्धि बाजार को बहुत प्रभावित नहीं करेगी।

छोटे कारोबारियों की चुनौतियाँ

इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि छोटे कारोबारी अब संसाधनों में कटौती की योजना बना सकते हैं। शहर स्थित खाना-खजाना के संचालक रजत शर्मा ने बताया कि जो परिस्थितियां बन रही हैं, उसमें लागत में वृद्धि तो होनी ही है। यदि लागत कम नहीं रह सकी, तो मजबूरन कारोबार को ही सीमित करना होगा। इसका असर अपने स्टाफ पर भी पड़ेगा। जब आपूर्ति बंद की गयी थी, तब ऐसी आशंका थी कि अब जब सब सही होगा तो कीमतें बढ़ेंगी, लेकिन एकबारगी इतनी वृद्धि की उम्मीद नहीं थी।

खाने का जायका प्रभावित

आम आदमी के लिए बाहर खाना अब एक शौक यानी विलासिता बनता जा रहा है। एलपीजी की कीमतों में वृद्धि का असर स्वाद को भी सीमित करेगा, यह भय सताने लगा है। कैटरिंग सेवाओं के रेट रातों-रात बढ़ जाएंगे। जानकार बताते हैं कि शादियों के सीजन में कैटरर्स ने कम से कम प्रति प्लेट 50 से 100 रुपए तक की वृद्धि कर सकते हैं। इन हालातों में स्नैक्स, मिठाइयां और पैकेज्ड फूड भी इस महंगाई से अछूते नहीं रहेंगे। होटल मालिकों द्वारा मेन्यू में बदलाव करने की नौबत रहेगी। संभावना यह जताई जा रही है कि कई महंगे और अधिक गैस खपत वाले व्यंजनों की उपलब्धता को सीमित या गायब कर ही दिया जाएगा।

उत्पादन लागत में वृद्धि

एलपीजी का उपयोग केवल खाना पकाने तक सीमित नहीं है। बेकरी उद्योग, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स जैसी छोटी मैन्यूफैक्चरिंग इकाइयां पूरी तरह गैस पर निर्भर हैं। उत्पादन लागत बढ़ने पर कंपनियां या तो दाम बढ़ाएंगी या फिर पैकेट के वजन में कटौती करेंगी। परिवहन और प्रोसेसिंग खर्च बढ़ने से बिस्कुट, ब्रेड और अन्य बेकरी उत्पाद महंगे होना तय है।

वैकल्पिक ऊर्जा का बढ़ता बाजार

जैसे ही गैस महंगी हुई, बाजार में विकल्प खोजे जाने लगेंगे और इस कारण यहां भी आग लगना तय है। स्पष्ट है कि यहां भी राहत नहीं मिलने वाली है। गैस के दाम बढ़ते ही लकड़ी और कोयले की मांग में अचानक बढ़ोत्तरी होगी। हालांकि कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की अनुपलब्धता के समय से ही स्थानीय बाजार में इसके दामों में भी तेजी देखी जा रही थी, जिसमें और भी वृद्धि हो सकती है। ऐसे में कारोबारियों के पास सस्ता विकल्प चुनने का रास्ता भी बंद होता दिख रहा है।

प्रशासन की सक्रियता

इस संकट के बीच प्रशासन छोटे कारोबारियों को राहत देने के लिए कुछ कदम उठाए तो ही बात बन सकती है, जिसको लेकर सक्रियता दिख रही है। जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि मुनाफाखोरी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। एलपीजी की आपूर्ति को लेकर भी जिला आपूर्ति विभाग को निर्देश दे दिए गए हैं कि वे स्टॉक और वितरण की नियमित निगरानी करें ताकि कृत्रिम किल्लत न हो, जबकि होटल और ढाबों पर भी कीमतों को नियंत्रण को लेकर ठोस कदम उठाने की बात आमजन कर रहे हैं। (नवादा से राजेश मंझवेकर)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत कितनी बढ़ी है?
कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 993 रुपए बढ़ गए हैं।

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