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मोती बिगहा छठ घाट की सफाई अभी नहीं, दिवाली बाद होगा शुरू

शहर के मोती बिगहा स्थित छठ घाट की सफाई अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। छठ घाट के आसपास गंदगी अटा पड़ा है। झाड़ आदि से तालाब का बाहरी और अंदरूनी परिसर अपना स्वरूप खो चुका है। यूं तो यहां 25 वर्ष पूर्व से...

मोती बिगहा छठ घाट की सफाई अभी नहीं, दिवाली बाद होगा शुरू
हिन्दुस्तान टीम,नवादाWed, 01 Nov 2023 02:00 PM
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नवादा, नगर संवाददाता।
शहर के मोती बिगहा स्थित छठ घाट की सफाई अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। छठ घाट के आसपास गंदगी अटा पड़ा है। झाड़ आदि से तालाब का बाहरी और अंदरूनी परिसर अपना स्वरूप खो चुका है। यूं तो यहां 25 वर्ष पूर्व से ही सूर्य मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो गया था लेकिन अर्थाभाव के कारण यह अटका पड़ा था। उत्साही और धार्मिक विचारधारा वाले लोगों ने अभी छह माह पूर्व यहां सूर्य प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ करा कर मंदिर में पूजनोत्सव शुरू कराया है, जिसके बाद उम्मीद है कि इस बार के छठ पूजा में माहौल कुछ अलग ही रहेगा। हालांकि मंदिर का कार्य बाधित रहने के क्रम में ही लगभग 15 वर्ष पूर्व यहां तालाब का निर्माण करा दिया गया था और तब से ही छठ व्रती अर्घ्य देने का पुण्यलाभ कमा रही हैं।

छह हजार व्रती पहुंचते हैं यहां

यहां की व्यवस्था संभालने वाले मंदिर सह छठ पूजा समिति के अध्यक्ष विलास कुमार और उनके सहयोगी राजेश कुमार तथा संतोष सिन्हा बताते हैं कि छठ पूजन के पूर्व घाट और मंदिर परिसर को चकाचक कर लिया जाएगा। दीपावली के बाद से इस कार्य को अंजाम देना शुरू किया जाएगा। नगर परिषद ने आज तक कभी भी कोई सहयोग नहीं किया है। गत बार नगर परिषद का चुनाव था तो कुछ नेतागण जरूर अपनी उपस्थिति यहां दर्शाने पहुंचे थे लेकिन इस बार किसी की आवाजाही नहीं दिख रही है। ऐसे में इस बार भी बीते वर्षों की भांति जनसहयोग से ही साफ-सफाई के साथ ही लाइटिंग आदि का कार्य संपादित कराए जाने की तैयारी है। समिति कार्यकर्ताओं ने बताया कि यहां कार्तिक और चैती छठ में एक समान श्रद्धालु जुटते हैं। लगभग छह हजार व्रती हर बार यहां अर्घ्य प्रदान करने आते हैं और सूर्य षष्ठी पूजन पूर्ण करते हैं। व्रतियों की सुविधा के लिए घाट में पम्पसेट चला कर पानी का इंतजाम किया जाता है। इस बार बढ़ती भीड़ के मद्देनजर समीप ही एक अन्य जलकुंड बनाने की योजना है। जबकि सूर्य मंदिर स्थित छठ घाट से लेकर रोड तक लगभग आठ सौ फीट तक व्रतियों की सुविधा के लिए कार्पेट लगाने की भी तैयारी है, जो प्रति वर्ष किया जाता है।

कई महिलाओं ने उठाया है यहां से छठ

जनश्रुति के आधार पर संतोष सिन्हा ने बताया कि यहां किसी अन्य के साथ छठ पूजन में आने वाली महिलाओं ने मन में कोई कामना रखी और यह त्वरित रूप से पूर्ण हो गया तो उन्होंने यहां से नया छठ उठाने का निर्णय लिया। यह वर्तमान में एकदम सामान्य सी बात हो कर रह गयी है। इस कारण लोगों की मान्यता बनती जा रही है कि यहां का पूजन फलदायी है। औलाद के साथ ही विवाह की मनोकामना पूर्ण होने के अलावा जटिल और असाध्य बीमारियों से निजात पाने के कई उदाहरण भी सामने हैं। ऐसे में इस घाट पर आने वाले श्रद्धालु बस यहीं के हो कर रह जाते हैं। सामान्यत: राम नगर, मोती बिगहा और लोहानी बिगहा की श्रद्धालु यहां आते हैं लेकिन वीआईपी कॉलोनी समेत गोनावां की 75 फीसदी व्रती भी अब यहीं आ कर अर्घ्य प्रदान करना पसंद करने लगी हैं। धीरे-धीरे यहां की ख्याति बढ़ती ही जा रही है।

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