सर्वर की सुस्त रफ्तार के फेर में घंटों फंसे रहते हैं किसान
नवादा में पीएम किसान सम्मान निधि के लाभ के लिए किसान निबंधन प्रक्रिया में अनेक चुनौतियाँ आ रही हैं। सर्वर डाउन रहने के कारण किसान पंजीकरण शिविरों में घंटों तक इंतजार कर रहे हैं। तकनीकी समस्याएँ और आधार-मोबाइल लिंकिंग में कठिनाई किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। सरकार को इन समस्याओं का समाधान करना चाहिए।

नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी कृषि योजनाओं, विशेषकर पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ पात्र किसानों तक पहुंचाने के लिए शुरू की गई फार्मर रजिस्ट्री यानी किसान निबंधन प्रक्रिया जिले में चुनौतियों के जाल में फंस गई है। नवादा की विभिन्न पंचायतों में लगाए गए पंजीकरण शिविरों की जमीनी हकीकत यह है कि डिजिटल इंडिया का सपना सर्वर डाउन के चक्कर में दब रहा है। जो काम महज पांच मिनट में पूरा होना चाहिए, उसके लिए जिले के अन्नदाता को पूरा दिन शिविरों में भूखे-प्यासे गुजारना पड़ रहा है। प्लॉट नंबर शो नहीं करने पर अलग ही बाधा आ रही है।
बॉर्डर एरिया में जमीन वाले किसानों का एफआर हो ही नहीं रहा है। सभी सरल निबंधन प्रक्रिया की मांग उठाते दिख रहे हैं। शिविरों में तकनीकी टीम और किसान दोनों ही लाचार नजर आ रहे हैं। यूं तो पोर्टल को बेहद यूजर-फ्रेंडली बनाने का दावा किया गया था, लेकिन वास्तविकता यह है कि सर्वर घंटों डाउन रहता है। आधार-मोबाइल लिंकिंग की अनिवार्य प्रक्रिया में ओटीपी का न आना सबसे बड़ा सिरदर्द साबित हो रहा है। 502 और 504 वाले एरर बार-बार परेशान कर रहे हैं। कई बार तो पोर्टल पर किसान का प्लॉट नंबर (खेसरा) ही प्रदर्शित नहीं होता, जिससे संबंधित जमीन का विवरण दर्ज करना असंभव हो जाता है। ई-केवाईसी का कार्य अमूमन ठीकठाक हो जा रहा है, लेकिन फार्मर रजिस्ट्री यानी एफआर सिर्फ राजस्व कर्मचारी की निगरानी में ही किए जाने के कारण उनका इंतजार भी परेशानीदायक साबित हो रहा है, क्योंकि एक कर्मचारी पर एक से अधिक शिविरों का जिम्मा सौंपा गया है। बॉर्डर एरिया के किसानों की अलग ही पीड़ा नवादा जिले की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि कई किसानों के घर नवादा में हैं, लेकिन उनकी जमीनें समीपस्थ जिलों जैसे गया, शेखपुरा या नालंदा के बॉर्डर पर पड़ती हैं। ऐसे किसानों के लिए यह निबंधन प्रक्रिया एक पहेली बन गई है। सॉफ्टवेयर में अन्य जिले की जमीन का विवरण दर्ज करने में तकनीकी बाधाएं आ रही हैं, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों के किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उनका सवाल है कि यदि वे नवादा के निवासी हैं, तो उनकी पड़ोसी जिले की जमीन का निबंधन यहां क्यों नहीं हो पा रहा? काशीचक प्रखंड के रेवरा-जगदीशपुर निवासी किसान अरविंद कुमार बताते हैं कि उनकी जमीन बॉर्डर एरिया शेखपुरा जिले के कोसरा में है, लेकिन उनका एफआर नहीं हो पा रहा है। ऐसे में वह कहते हैं कि बॉर्डर एरिया की जमीन वाले किसानों के लिए पोर्टल पर विशेष विकल्प दिया जाए। शिविरों में निबंधन के लिए आधार कार्ड और अद्यतन (करेंट) रसीद की मांग की जा रही है। इस कारण किसानों को दस्तावेजों की उपलब्धता में कोई बाधा नहीं है, लेकिन तकनीकी बाधा से परेशानी बड़ी हो कर रह गयी है। रजिस्ट्री एक बेहतरीन कदम है, इससे बिचौलियों का होगा अंत एक अनुमान के अनुसार, यदि सर्वर सही काम करे तो एक दिन में एक ऑपरेटर 100 से अधिक निबंधन कर सकता है। लेकिन वर्तमान बाधाओं के कारण यह संख्या 20 से 30 के बीच सिमट गई है। नवादा के जागरूक किसानों का कहना है कि सरकार को चाहिए कि वह पोर्टल की बैंडविड्थ बढ़ाए और ग्रामीण क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट की वैकल्पिक व्यवस्था करे, ताकि लक्ष्य समय पर पूरा हो सके। किसान कहते हैं कि फार्मर रजिस्ट्री एक बेहतरीन कदम है, जिससे बिचौलियों का अंत होगा, लेकिन इसकी सफलता इसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। नवादा के किसान तकनीकी रूप से उतने समृद्ध नहीं हैं कि वे इन बारीकियों को समझ सकें। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि वह केवल शिविर न लगाए, बल्कि उन शिविरों में आने वाली तकनीकी समस्याओं का तत्काल निवारण भी सुनिश्चित करे। अन्यथा, डिजिटल किसान बनाने की यह मुहिम केवल फाइलों में ही सिमट कर रह जाएगी। ------------------------------------ भदौनी शिविर: निबंधन शिवर में सुबह से ही किसानों की कतारें नवादा, हिसं। भदौनी पशु हाट के समीप लगाए गए किसान निबंधन शिवर में सुबह से ही किसानों की कतारें देखी गईं। यहां महिला-पुरुष किसान मौजूद मिले, लेकिन इन शिविरों में पहुंचने वाले किसान मुख्य रूप से सर्वर की धीमी गति से परेशान हैं। निबंधन के लिए आधार कार्ड व अद्यतन रसीद अनिवार्य रूप से मांगी जा रही है। यूं तो सब कुछ अनुकूल रहने पर बेहद सहूलियत से निबंधन हो जा रहा है, लेकिन सर्वर की परेशानी ने नाक में दम कर रखा है। सर्वर घंटों डाउन रह रही है, जिस कारण पांच मिनट के काम में घंटों लग जा रहे हैं। ऐसे में आधार-मोबाइल लिंकिंग के क्रम में ओटीपी न आने के कारण घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। ई-केवाईसी करा कर बैठे किसानों ने कहा कि राजस्व कर्मचारी अमित कुमार का भी इंतजार करना पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें एक से अधिक शिविर में सेवा देनी है। ---------------------- रेवरा-जगदीशपुर: सर्वर और डिजिटल सूचना का झोल नवादा, हिसं। काशीचक प्रखंड के रेवरा-जगदीशपुर स्थित पंचायत सरकार भवन में जारी शिविर में किसान बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं, लेकिन सर्वर और डिजिटल सूचना के झोल में पड़ कर परेशानी महसूस कर रहे हैं। यहां डिजिटली उपलब्ध सूचना में नाम में स्पेलिंग (वर्तनी) की समस्या आ रही है। यदि आधार कार्ड और जमीन के दस्तावेजों में नाम के एक अक्षर का भी अंतर है, तो सिस्टम उसे स्वीकार नहीं कर रहा है। किसानों का कहना है कि छोटी-सी मानवीय भूल के लिए उन्हें बार-बार दौड़ना पड़ रहा है। रेवरा-जगदीशपुर के शिविर में मौजूद किसानों ने बताया कि सभी किसानों के निबंधन को लेकर प्लॉट नंबर शो नहीं कर रहा है, जिससे कार्य में बाधा आ रही है। शिविर में काशीचक बीएओ रौशन कुमार समेत स्थानीय मुखिया शंकर कुमार, कृषि समन्वयक संतोष कुमार व राजस्व कर्मचारी रूदन कुमार सिंह आदि मौजूद थे। ------------------- गोनावां: सर्वर ले रही धैर्य की परीक्षा नवादा। किसान निबंधन शिविर में सर्वर डाउन रहने से पांच मिनट का काम कितनी देर में निपट सकेगा, यह बताने में सभी असमर्थ मिले। नेटवर्क न होने के कारण कई बार प्रक्रिया अंतिम चरण में जाकर फेल हो जा रही थी, जिससे फिर से शुरुआत करनी पड़ रही थी। पीएम किसान सम्मान निधि तथा कृषि विभाग की विभिन्न किसानोपयोगी योजनाओं का लाभ निर्बाध रूप से लाभुकों को मिल सके, इसके लिए कराए जा रहे फार्मर रजिस्ट्री के वर्तमान में चल रहे पंजीकरण शिविरों की जमीनी हकीकत काफी चुनौतीपूर्ण रहने से किसानों का धैर्य चूकता दिख रहा था। इन परेशानियों को लेकर कई किसानों ने मांग की है कि निबंधन की प्रक्रिया को और सरल बनाया जाए और शिविरों में ही तमाम त्रुटि सुधार की व्यवस्था हो, ताकि सहजता से निबंधन हो सके। मौके पर नवादा सदर बीएओ समेत कर्मचारी अमित कुमार व किसान सलाहकार शाहनवाज रशीद मौजूद रहे। -------------------------- किसानों की व्यथा: सभी का फोटो नाम से 1.हम सुबह सात बजे से ही कतार में खड़े हैं, लेकिन अब दोपहर हो गई है और ऑपरेटर कह रहे हैं कि सर्वर काम नहीं कर रहा। अभी तक ई-केवाईसी ही करा पा रहा हूं, लेकिन बाधाएं अनेक आ रही हैं। समझ नहीं आता कि अब कितनी देर तक यहां बैठना पड़ेगा?-केशर चौहान, किसान। 2.हम किसान हैं। हमारे लिए समय बेहद कीमती है। कई काम छोड़ कर शिविर में पहुंचे हैं। तमाम दिक्कतों के कारण कार्य में लगातार बाधा आ रही है। प्रशासन को इसका समाधान निकालना चाहिए, ताकि किसानों को इतनी परेशानी न उठानी पड़े। -महेन्द्र चौहान, किसान। 3.डिजिटल इंडिया की बातें तो बहुत होती हैं, लेकिन यहां एक ओटीपी आने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। मोबाइल हाथ में लेकर टावर खोजते फिरते हैं। जब ओटीपी आता है, तब तक सर्वर डाउन हो जाता है। पांच मिनट के काम में पूरा दिन और मजदूरी बर्बाद हो रही है। -पार्वती देवी, किसान। 4.शिविरों में सबसे बड़ी समस्या प्लॉट नंबर शो न होने की है। जमीन की रसीद हाथ में है, लेकिन पोर्टल पर विवरण नहीं मिल रहा। इन जटिलताओं ने हमारी परेशानी और बढ़ा दी है। सरकार को किस प्रकार फिल्टर करना है, करे, लेकिन परेशानी में किसानों को न धकेले। -रामचंद्र साव, किसान।

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