बच्चों की पढ़ाई पर महंगाई की मार, कॉपियों और किताबों के दाम बढ़े
नवादा जिले में आम परिवारों के बजट को उधारी देने वाली मुश्किलें बढ़ गई हैं क्योंकि वैश्विक संकट और ईंधन की कीमतों में वृद्धि के कारण पेपर से लेकर स्कूल वाहन तक के खर्च में तेजी से वृद्धि हुई है।

वैश्विक स्तर पर चल रहे युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव की तपिश अब नवादा जिले के आम परिवारों के बजट को झुलसाने लगी है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मची उथल-पुथल का सीधा असर अब जिले के बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर भी पड़ रहा है। कागज के कच्चे माल यानी पल्प के आयात में आ रही दिक्कतों और ईंधन की कीमतों में अनिश्चितता के कारण कॉपियों, किताबों, स्टेशनरी और स्कूल वैन के खर्च में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। नया सत्र शुरू होते ही अभिभावकों की जेब पर दोहरी मार पड़ रही है।
बजट की चुनौतियाँ
सबसे मुश्किल यह है कि इस बजट में कटौती की कोई गुंजाइश भी नहीं है। जो खर्चे बढ़े हैं, उस से बचने का कोई अन्य विकल्प भी नहीं है। इन हालातों में अभिभावकों को अन्य तरह की कटौती को बाध्य होना पड़ रहा है।
ईंधन की अनिश्चितता, स्कूल वैन और ऑटो का किराया बढ़ा
वैश्विक संकट का दूसरा सबसे बड़ा प्रहार ईंधन यानी पेट्रोल-डीजल की कीमतों और उसकी आपूर्ति की अनिश्चितता पर हुआ है।
मध्यमवर्गीय परिवारों की बढ़ी हुई है चिंता
इस अचानक आई महंगाई से सबसे ज्यादा प्रभावित मध्यम और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवार हो रहे हैं।
पाठ्य सामग्री की दो माह पूर्व बनाम वर्तमान कीमत
सामग्री/सेवा दो माह पूर्व कीमत वर्तमान कीमत प्रतिशत वृद्धि साधारण रफ कॉपी (प्रति पीस) 30 45 50% क्लासमेट / ब्रांडेड कॉपी (प्रति पीस) 60 80 33% ड्राइंग बुक व कलर सेट 120 160 33% स्टेशनरी किट (पेंसिल, बॉक्स आदि) 150 200 33% स्कूल वैन किराया (प्रति बच्चा/औसत दूरी) 800/माह 1,100/ 37% ऑटो/ई-रिक्शा किराया (लोकल रूट) 600/माह 850/माह 41% (नवादा से राजेश मंझवेकर)
मुख्य अद्याय
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