नारी शक्ति को संबल: नवादा में बदल रही है आधी आबादी की तस्वीर
नवादा। राजेश मंझवेकरनवादा जिले के पहाड़ी इलाकों से लेकर खेत-खलिहानों और ग्रामीण व कस्बाई इलाके समेत उप-नगरीय व नगरीय समृद्ध क्षेत्र तक, आज महिलाएं केवल घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं हैं।

नवादा। राजेश मंझवेकर नवादा जिले के पहाड़ी इलाकों से लेकर खेत-खलिहानों और ग्रामीण व कस्बाई इलाके समेत उप-नगरीय व नगरीय समृद्ध क्षेत्र तक, आज महिलाएं केवल घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं हैं। बिहार सरकार की महिला सशक्तीकरण की नीतियों ने यहां की बेटियों को स्कूल से लेकर स्वरोजगार तक का एक नया आसमान दिया है। आर्थिक आजादी के लिए वह अपने पर खोल चुकी हैं। मुख्यमंत्री महिला उद्यमी और लखपति दीदी नित नए प्रतिमान गढ़ रही हैं। योजना का कमाल है कि नवादा की महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की राह पर धड़ल्ले से चल चुकी हैं। सबसे बड़ी क्रांति मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना और जीविका के माध्यम से आई है।
महिलाओं की समृद्धि की राह इतनी साजगार बन चुकी है कि कई घरों में वह पुरुषों का हाथ बंटा रही हैं। महिलाएं अब घर में खुशहाली लाने का वाहक बन रही हैं। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना बना रही सबल हाल ही में यानी 16 फरवरी 2026 में राज्य स्तर पर लाखों महिलाओं के खाते में 10,000 की किस्त भेजी गई है। नवादा जिले में भी हजारों महिलाओं ने सिलाई, अगरबत्ती निर्माण और किराना दुकान जैसे छोटे व्यवसायों के लिए आवेदन कर रखा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना अंतर्गत राज्य भर की 25 लाख महिला लाभुकों को 10,000 रुपए प्रति लाभुक की दर से कुल 2,500 करोड़ रुपए की राशि का डीबीटी के माध्यम से अंतरण किया गया। इस क्रम में नवादा जिले की 32 हजार महिलाओं को 32 करोड़ की रोजगार सहायता राशि प्रदान की गयी। इससे पूर्व पहली किस्त के रूप में 2.97 लाख महिलाओं को 10-10 हजार रुपए की राशि भेजी गयी थी। लखपति दीदी अभियान, बना रहा समृद्ध जिले में जीविका दीदियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। जीविका के डीपीएम चंदन कुमार सुमन के हवाले से जीविका के फार्म मैनेजर दीपक कुमार ने बताया कि नवादा जिले में 3.29 लाख जीविका दीदियां हैं। इनमें से 47212 लखपति दीदियां (जिनकी वार्षिक आय 1 लाख से अधिक है) बन चुकी हैं। इनमें नवादा जिले के विभिन्न प्रखंडों की महिलाओं की बड़ी हिस्सेदारी है। इन जीविका दीदियों के स्वालम्बन बीते 02 सितम्बर 2025 को और भी मजबूती मिली, जब ग्रामीण महिलाओं के बीच उद्यमिता विकास को मजबूत करने और समुदाय आधारित उद्यमों के विकास में तेजी आने की राह प्रधानमंत्री द्वारा साजगार बनायी गयी। इसके तहत प्रधानमंत्री ने 105 करोड़ रुपये की राशि जीविका निधि में ट्रांसफर कर उनके हौसलों को और भी उड़ान दी है। प्रधानमंत्री द्वारा बिहार राज्य जीविका निधि साख सहकारी संघ लिमिटेड को दिए गए इस सहयोग राशि से अब जीविका दीदियां आर्थिक समृद्धि की दिशा में ठोस कदम बढ़ा रही हैं। शिक्षा और सुरक्षा, साइकिल से लेकर क्रेडिट कार्ड तक नवादा के जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र में उमड़ने वाली छात्राओं की भीड़ इस बात का सबूत है कि अब बेटियां उच्च शिक्षा से पीछे नहीं हट रहीं। जबकि, कन्या उत्थान योजना के तहत स्नातक पास करने वाली नवादा की हजारों बेटियों को 50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि सीधे उनके खाते में मिल रही है। इंटर पास अविवाहित लड़कियों को भी 25,000 दिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना से शिक्षा के स्तर में सुधार और बाल विवाह में कमी आ रही है। साथ ही, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के जरिए तकनीकी और उच्च शिक्षा के लिए नवादा की बेटियां मात्र 1 प्रतिशत ब्याज पर 4 लाख रुपए तक का लोन ले रही हैं। इससे मेडिकल और इंजीनियरिंग में बेटियों की बढ़ती संख्या एक नई इबारत लिख रही है। महिला उद्यमी योजना के तहत 10 लाख रुपए तक की मदद छोटे उद्योगों की शुरुआत के लिए दिया जाना, महिला उद्यमियों की सफलता में मील का पत्थर साबित हो रहा है। ------------------ कुछ चुनौतियां भले ही आ रही आड़े नवादा। योजनाओं की जमीनी हकीकत की पड़ताल करने पर कुछ चुनौतियां भी सामने आयी हैं। डिजिटल साक्षरता की कमी सबसे बड़ी बाधा बन रही है। नवादा के कौआकोल और मेसकौर जैसे सुदूर इलाकों में आज भी कई महिलाएं ऑनलाइन फॉर्म भरने या बैंक ट्रांजेक्शन के लिए दूसरों पर निर्भर हैं। इससे बिचौलियों का डर बना रहता है। आधार कार्ड में सुधार या आवासीय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए प्रखंड कार्यालयों के चक्कर लगाना आज भी एक बड़ी बाधा है। कई पात्र महिलाएं सतत जीविकोपार्जन योजना जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं की जानकारी न होने के कारण लाभ से वंचित रह जाती हैं। लेकिन, इससे इतर नवादा की सशक्त होती महिलाओं को अब ठोस पहचान मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। बहरहाल, सरकार की योजनाओं ने जो बीज बोया है, इसकी सफलता से अंतिम पायदान पर खड़ी महिला तक को जोड़ कर महिला दिवस को सार्थकता प्रदान करने पर जोर है, ताकि नवादा की हर बेटी साक्षर हो और हर मां आत्मनिर्भर। जीविका से जुड़ कर फ्लेक्स आदि के प्रिंटिंग प्रेस का कार्य कर रही हूं। जीविका ने जीवन को एक दिशा दी है। 2021 में कादिरगंज बाजार में प्रेस की शुरुआत की। महज 25 हजार रुपए से शुरू किया गया यह कारोबार आज मुझे आर्थिक रूप से सम्पन्न बनाने में सहायक साबित हुआ है। -ममता देवी, जीविका दीदी, गोपालगंज, जमुआवां पटवासराय, नवादा। 2015 में जीविकी से जुड़ने के बाद जैसे-तैसे आजीविका चलाने के दौर से बाहर निकल कर 50 हजार रुपए का लोन ले कर शृंगार सामग्री का ठेला पर फेरी शुरू कर दिया। बेहतर आमदनी होने लगी तो गौपालन में भी हाथ आजमाया। वर्तमान में अपने पति की भी मददगार साबित हो रही हूं। -मंजू देवी, जीविका दीदी, सोखोदेवरा, कौआकोल, नवादा। 26 सितम्बर 2025 को मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से प्राप्त राशि के साथ कुछ अपनी राशि मिला कर किराना की दुकान खोल सकी, जिससे आमदनी शुरू हुई तो उत्साह जगा। आमदनी का कोई नियमित साधन नहीं रहने की बुरी परिस्थिति से इसके बाद जो एक बार उबर सकी तो फिर अब सब कुछ ठीकठाक है। -रिंकी कुमारी, जीविका दीदी, भरोसा, नवादा सदर। 2014 से कपड़ों की सिलाई से आजीविका शुरू करने के बाद 2020 में लॉकडाउन के कारण दुकान बंद करने की नौबत आ गयी। 2023 में दोबारा फतेहपुर बाजार में 30 हजार रुपए का लोन लेकर कारोबार शुरू किया, जो आज मेरे घर को समृद्धि प्रदान करने में सहायक साबित हो रहा है। -डॉली कुमारी, जीविका दीदी, मोतीनगर, बकसंडा, अकबरपुर, नवादा।
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