
बैंकों की हड़ताल से करोड़ों का कारोबार ठप, नहीं क्लियर हुए चेक
नवादा में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर 5 दिनों की बैंक हड़ताल हुई। इससे बैंकों में ताले लगे रहे, करोड़ों का लेन-देन प्रभावित हुआ। लोग एटीएम के बाहर परेशान रहे, चेक क्लीयर नहीं हो पाए। बुजुर्ग और छात्र सबसे अधिक प्रभावित हुए। सरकारी योजनाओं की किश्तें भी नहीं पहुंच पाईं।
नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर मंगलवार को बैंकों की हड़ताल रही। इस वजह से लगभग सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों में ताले लटके रहे, जिससे करोड़ों रुपये का लेन-देन प्रभावित हुआ। वहीं सुबह से ही लोग बैंकों के बाहर चक्कर लगाते रहे। कई लोग शाम तक एटीएम से कैश निकालने में जुटे रहे। वहीं हजारों चेक क्लीयर नहीं हो पाए। हड़ताल का सबसे मारक असर नकद निकासी पर पड़ा। दोपहर 1:00 से 3:00 बजे के बीच जब शहर के मुख्य चौक-चौराहों पर एटीएम की स्थिति का जायजा लिया गया, तो तस्वीर काफी चिंताजनक दिखी। प्रजातंत्र चौक स्थित एसबीआई के एटीएम में रुपये खत्म हो चुके थे आम लोग हड़ताल के बीच एक एटीएम से दूसरे एटीएम कार्ड लेकर भटकते रहे, लेकिन निराशा ही हाथ लगी।
समीप ही स्थित पंजाब नेशनल बैंक के एटीएम का शटर आधा गिरा मिला, जिससे उपभोक्ताओं को समझ नहीं आ रहा था कि मशीन चालू है या बंद। प्रसाद बिगहा स्थित केनरा बैंक के एटीएम में भीड़ देखी गई। पांच दिवसीय बैंक हड़ताल का सीधा प्रहार जिले के थोक और खुदरा कारोबार पर पड़ा है। व्यापारियों के अनुसार, नवादा जैसे व्यावसायिक केंद्र में एक दिन की हड़ताल से लगभग 25 करोड़ रुपए का टर्नओवर प्रभावित हुआ है। जबकि इस हड़ताल से पूर्व तीन दिनों की बैंक बंदी से आमजनों की परेशानी चार दिनों तक खिंच गयी। ऐसे में कारोबार चरमरा कर रह गया। गोला रोड स्थित स्थानीय व्यवसाई पंकज साव और दीपू साव ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि हड़ताल ने हमारी कमर तोड़ दी है। चेक क्लीयरेंस पूरी तरह रुक गया है। बाहर की मंडियों से माल मंगवाया था, लेकिन पेमेंट नहीं हो पाने के कारण ट्रांसपोर्टेशन फंस गया है। व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल ट्रांजेक्शन के दौर में भी बड़े भुगतानों के लिए बैंकिंग परिचालन अनिवार्य है, जिसके अभाव में पूरा सप्लाई चेन ध्वस्त हो गया है। गरीबों और पेंशनभोगियों की बेबसी हड़ताल की सबसे परेशान करने वाली तस्वीर उन बुजुर्गों की थी, जो अपनी सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भरोसे जीवित हैं। प्रखंड मुख्यालय पहुंचे दर्जनों वृद्धों को खाली हाथ और नम आंखों के साथ वापस लौटना पड़ा। नवादा के एक बुजुर्ग चंद्रदेव प्रसाद ने रुंधे गले से बताया, साहब, दवा खत्म हो गई है। पैसे निकालने आए थे कि दवा खरीद लेंगे, लेकिन यहां तो ताला लटका है। अब किसी से उधार मांगना पड़ेगा। चंद्रदेव जैसे सैकड़ों लाभार्थी ऐसे थे जिन्हें हड़ताल की पूर्व जानकारी नहीं थी और वे मीलों पैदल चलकर बैंक पहुंचे थे, लेकिन अंततः उन्हें बैरंग लौटना पड़ा। सरकारी योजनाओं की किश्तें फंसी, छात्र भी बेहाल हड़ताल के कारण न केवल व्यक्तिगत काम, बल्कि सरकारी योजनाओं की रफ्तार भी सुस्त पड़ गई। प्रधानमंत्री आवास योजना समेत कई अन्य कल्याणकारी योजनाओं की किश्तें लाभार्थियों के खातों में नहीं पहुंच पाईं। घर बनाने की आस में बैठे गरीब अब हड़ताल खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, नवादा में रहकर पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं के सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया है। छात्र रोहित कुमार ने बताया कि घर से पैसे खाते में आ चुके हैं, लेकिन बैंक बंद है और एटीएम में कैश नहीं है। मेस का बिल भरना था, जो अब नहीं हो पाएगा। आज का खाना दोस्तों से उधार लेकर खाना पड़ेगा। असल में तीन दिन की बंदी के बाद की यह हड़ताल अधिक भारी पड़ गयी क्योंकि बैंक लगातार चार दिन बंद पड़ गए। ------------------ संयुक्त बैंक यूनियंस के 09 घटक दलों की रही हड़ताल नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर 05 दिनों की बैंकिंग की एकमात्र मांग को लेकर जिले के बैंक कर्मियों ने पूर्ण हड़ताल कर दी। इस आंदोलन में बैंक यूनियंस के कर्मचारी एवं अधिकारियों के संयुक्त 09 घटक दलों के सदस्य शामिल हुए, जिससे जिले की बैंकिंग व्यवस्था पूरी तरह ठप रही। नवादा जिला के एआईबीईए के महासचिव सौरभ रंजन ने बताया कि बैंक कर्मी लंबे समय से 5-डे बैंकिंग की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 08 मार्च 2024 को ही यूनाइटेड फोरम और इंडियन बैंक एसोसिएशन के बीच इस समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, लेकिन सरकार की अनुमति अब तक लंबित है। हाल ही में 22 और 23 जनवरी 2026 को डी.एफ.एस. के साथ हुई बैठक भी बेनतीजा रही, जिसके बाद हमें हड़ताल जैसा कड़ा कदम उठाना पड़ा। हड़ताल में एसबीआई, पीएनबी, बीओआई और केनरा बैंक सहित सभी प्रमुख बैंकों के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए। केनरा बैंक से सौरभ, रंजीत, कुतुबुद्दीन, आदित्य और मधुसूदन, बैंक ऑफ इंडिया से गौरव व विनोद, पीएनबी से कार्यानंद व हरेंद्र और एसबीआई से समरजीत समेत दर्जनों बैंककर्मियों ने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की।

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