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26 नवंबर, 2020|10:00|IST

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सदर अस्पताल में आशा की मौत, परिजनों का हंगामा

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जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था दिन-ब-दिन लचर होती जा रही है। स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही का खामियाजा मरीज और उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है। आम आदमी के स्वास्थ्य के देखभाल की बात कौन करें? अब तो विभाग के कर्मियों के प्रति भी स्वास्थ्यकर्मी बेहद लापरवाह रवैया अपना रहे हैं। बुधवार को कुछ ऐसा ही वाक्या सदर अस्पताल में देखने को मिला है। रोह के ओहारी गांव की एक आशा कार्यकर्ता की इलाज के दौरान मौत हो गई। उनके इलाज में लापरवाही बरते जाने से गुस्साए परिजनों ने सदर अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में तोड़फोड़ की और विभागीय लापरवाही के विरुद्ध हल्ला बोला। घटना सुबह करीब आठ बजे की है। रोह पीएचसी से जुड़ी ओहारी गांव की 45 वर्षीय आशा कार्यकर्ता अहिल्या देवी के परिजन उन्हें गंभीर स्थिति में लेकर सदर अस्पताल पहुंचे थे। इस बीच इमरजेंसी में रहे स्वास्थ्यकर्मियों ने शिफ्ट बदलने का हवाला देकर उन्हें ओपीडी में भेज दिया, जहां से उन्हें सर्जिकल वार्ड में ही एक बेड पर इलाज के लिए भर्ती लिया गया। जांच और इलाज के दौरान ही करीब साढ़े आठ बजे आशा कार्यकर्ता ने दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत थी, लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों ने ऑक्सीजन सिलिंडर लगाने में कोताही बरती। मरीज की मौत के बाद परिजनों ने सर्जिकल वार्ड में हंगामा किया और वार्ड के नर्सिंग कक्ष में रहे टेबल-कुर्सी आदि पर गुस्सा उतारा। जिसके बाद अस्पताल में अफरातफरी मच गई। घटना की सूचना पर नगर थाने की पुलिस पहुंची और मामले को शांत कराया। इधर, मृतका के परिजन शव को लेकर गांव के लिए निकल गए। मृतक आशा कार्यकर्ता ओहारी ग्रामीण दयानंद प्रसाद की पत्नी है।

शिफ्ट बदलने के दौरान बढ़ जाती है लापरवाही

सदर अस्पताल में गंभीर मरीजों के साथ लापरवाही बरतने का यह पहला मामला नहीं है। बल्कि हर दो-तीन महीने के अंतराल में कोई-न-कोई मामला उजागर होते ही रहता है। कोरोना संक्रमण काल के गंभीर दिनों में जिला मुख्यालय निवासी एक परिवार की बच्ची ने भी ऑक्सीजन के अभाव में दम तोड़ दिया था। कुछ मामलों में परिजन चुप्पी साधकर शव को लेकर घर लौट जाते हैं, तो कुछेक मामलों पर तीव्र प्रतिक्रिया होती है। बुधवार की घटना शिफ्ट बदलने के दौरान घटी। सर्जिकल वार्ड में शुक्रवार की रात 09 बजे से शनिवार सुबह 08 बजे तक डॉ. सतीश चन्द्र सिन्हा और डॉ. शशिकांत ड्यूटी में थे। साथ में जीएनएम मंजू कुमारी, अमृता कुमारी, एएनएम उर्मिला सिन्हा और पुरुष कार्यकर्ता श्यामनंदन रॉय तैनात थे। इधर, इमरजेंसी में जीएनएम नीलम कुमारी, प्रतिक्षा पटेल, एएनएम सरिता कुमारी, चंचला कुमारी और स्वास्थ्य कार्यकर्ता अमित कुमार ड्यूटी पर थे। इसी दौरान परिजनआशा कार्यकर्ता अहिल्या को लेकर सदर अस्पताल पहुंचे। लेकिन मरीज की गंभीर स्थिति पर किसी ने संज्ञान नहीं लिया और शिफ्ट बदलने की हड़बड़ी में स्वास्थ्यकर्मियों अगली शिफ्ट के लोगों के भरोसे मरीज को छोड़कर चले गए।

अगली शिफ्ट के डॉक्टर व कर्मियों ने भी नहीं दिया ध्यान

शनिवार की पहली शिफ्ट सुबह 08 बजे से दोपहर बाद अपराह्न 02 बजे तक की है। इस शिफ्ट में चिकित्सक डॉ. बी.पी. सिन्हा और डॉ. अजय कुमार की ड्यूटी लगी थी। इमरजेंसी में जीएनएम कुमारी मीना सिन्हा, अंशु कुमारी, एएनएम सोनी कुमारी, अंजू कुमारी और स्वास्थ्य कार्यकर्ता विकास कुमार काम पर आए थे, जबकि सर्जिकल वार्ड में जीएनएम ललिता कुमारी, पूजा कुमारी, एएनएम मंजू देवी, एएनएम सरोज किडो और स्वास्थ्य कार्यकर्ता गोरेलाल राजवंशी ने ड्यूटी ज्वाइन की थी। दो शिफ्टों के चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मियों की भारी-भरकम फौज भी आशा कार्यकर्ता को सही इलाज नहीं दे पायी। बताया गया कि मरीज की स्थिति को किसी भी डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी ने गंभीरता से नहीं लिया।

अस्पताल में मच गयी अफरातफरी

महिला की मौत के बाद सुबह-सुबह अचानक शोर-शराबे व हंगामे के कारण सदर अस्पताल में अफरातफरी मच गयी। भीड़ काफी आक्रोशित थी। कर्मियों के मुताबिक भीड़ ने वार्ड व डॉक्टर के चैम्बर में घुसकर कुर्सी-टेबल आदि पटकना शुरू कर दिया। इससे वहां पर भगदड़ मच गई। अस्पताल के कर्मी अस्पताल छोड़कर बाहर निकल भागे। इस बीच मौके पर नगर थाने की पुलिस ने पहुंचकर भीड़ को शांत कराया। काफी देर के बाद भीड़ का गुस्सा शांत हुआ और सामान्य स्थिति बहाल करायी गयी। इस बीच मृतका के परिजन महिला की लाश लेकर अस्पताल से निकल गये।

सीएस ने चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मियों से मांगा स्पष्टीकरण

मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन डॉ. विमल प्रसाद सिंह ने ड्यूटी में रहे डॉक्टर समेत स्वास्थ्यकर्मियों से स्पष्टीकरण की मांग की है। आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान ने मामले को लेकर लापरवाह स्वास्थ्यकर्मियों पर हुई कार्रवाई को लेकर सिविल सर्जन से ब्यौरा मांगा। जिसपर सिविल सर्जन ने बताया कि सुबह आठ बजे स्वास्थ्यकर्मियों का शिफ्ट बदलता है। ऐसे में दोनों शिफ्ट के चिकित्सक समेत स्वास्थ्यकर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। अब देखना यह है कि क्या सिर्फ इमरजेंसी वार्ड के स्वास्थ्यकर्मियों पर कार्रवाई होती है या सर्जिकल वार्ड के स्वास्थ्यकर्मी कार्रवाई की जद में आते हैं? सिविल सर्जन ने स्पष्ट तौर पर बताया है कि दोषी स्वास्थ्यकर्मियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जायेगा।

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  • Web Title:Asha dies in Sadar hospital family uproar