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20 अक्तूबर, 2020|11:36|IST

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वर्षों से वीरान पड़े एपीएचसी के अब बहुरेंगे दिन

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नवादा। मनमोहन कृष्ण

नवादा के ग्रामीण इलाकों में नागरिकों को इलाज की सुविधा मिले, इसके लिए जिले के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में डॉक्टरों की बंपर बहाली की गई है। जिले के 30 एडिशनल प्राईमरी हेल्थ सेंटर (एपीएचसी) में करीब 60 डॉक्टर नियुक्त किए गए हैं। इनकी बहाली से वर्षों से वीरान पड़े एपीएचसी के दिन बहुरने के आसार है। इतना ही नहीं सदर अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल रजौली, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में भी चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति हुई है। बिहार तकनीकी सेवा आयोग ने बिहार स्वास्थ्य़ सेवा संवर्ग के अंतर्गत सामान्य चिकित्सा पदाधिकारी पर जिले में 106 चिकित्सक औपबंधिक तौर पर बहाल किए हैं। इसके पहले जुलाई माह में जिले को 22 विशेषज्ञ चिकित्सकों का भी तोहफा मिल चुका है। अगस्त महीने में 70 ए ग्रेड नर्सों की बहाली की गई है। देखा जाएं, तो नवादा जिले को पिछले दो-तीन महीनों के दौरान करीब 02 सौ की संख्या में डॉक्टर और नर्सों का भारी-भरकम फौज मिला है। उम्मीद यह है कि बंपर बहाली के बाद जिले के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधा पटरी पर लौट आएगी।

जिले की स्वास्थ्य सेवा को मिलेगा बल

पिछले कई वर्षों से सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों का भारी टोटा रहा। जिले की करीब 30 लाख आबादी को पर्याप्त चिकित्सा सुविधा देने में सरकारी अस्पताल विफल रहें। जिले का स्वास्थ्य विभाग समाज के एक बड़े तबके को बुनियादी स्वास्थ्य सेवा देने में भी सक्षम नहीं था। एक समय हालात इतने बदतर थे कि जिला अस्पताल में 70 चिकित्सकों की जगह मात्र 23 डॉक्टर मरीजों के इलाज में जुटे रहते थे। फिलहाल, जिले में एकसाथ 106 सामान्य चिकित्सा पदाधिकारी और 22 विशेषज्ञ चिकित्सक बहाल हुए हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवा सुदृढ़ होने की उम्मीद जगी। ग्रामीण स्तर से लेकर जिला अस्पताल तक में मरीजों को बेहतर इलाज का लाभ मिल सकेगा।

एसडीएच, रजौली सहित सीएचसी व पीएचसी में आए डॉक्टर

जिला अस्पताल के साथ-साथ सबडिविजनल हॉस्पिटल (एसडीएच), रजौली सहित जिले के 05 कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर (सीएचसी) और 04 प्राईमरी हेल्थ सेंटर (पीएचसी) में नए पदस्थापित चिकित्सक सेवा देंगे। प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि सदर अस्पताल में 12, एसडीएच, रजौली में 07 और सीएचसी, अकबरपुर में 03, सीएचसी गोविंदपुर में 03, सीएचसी हिसुआ में 04, सीएचसी नरहट में 04 और सीएचसी पकरीबरावां में 04 चिकित्सकों को बहाल किया गया है। साथ ही पीएचसी काशीचक में 01, पीएचसी मेसकौर में 01 और पीएचसी रजौली और नवादा सदर में 02-02 डॉक्टर प्रतिनियुक्त किए गए हैं। लंबे समय से जिले में चिकित्सकों की कमी थी। जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा था। फिलहाल, चिकित्सकों की बहाली से मरीजों को सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिल सकेगी।

महिलाओं को मिलेगी बड़ी राहत

जिले के सरकारी अस्पतालों में महिला डॉक्टरों की भारी कमी थी। ऐसे में आधी आबादी को काफी मुश्किलों से गुजरना पड़ा है। आम तौर पर महिलाएं पुरुष डॉक्टर के समीप अपनी समस्याएं कहने में काफी झिझकती है। खास कर ग्रामीण इलाकों में परेशानी अधिक है। स्थिति यह है कि कई मामलों में गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य सुरक्षा और आवश्यक परामर्श को लेकर जीएनएम और एएनएम के भरोसे रहना पड़ता है। ग्रामीण इलाकों के सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं का प्रसव भी जीएनएम व एएनएम स्वास्थ्यकर्मियों के बदौलत होता है। नई बहाली में करीबन 28 महिला डॉक्टर बहाल हुई हैं, इनमें कई की प्रतिनियुक्ति ग्रामीण क्षेत्र के एपीएचसी, पीएचसी और सीएचसी में की गई है। महिला चिकित्सकों की बहाली से ग्रामीण महिलाओं को काफी हद तक सुविधा मिलने के आसार जगे हैं।

एसएनसीयू में 03 चिकित्सक हुए हैं बहाल

सदर अस्पताल स्थित सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में 03 डॉक्टर पदस्थापित किए गए हैं। नए डॉक्टरों की बहाली से शिशु रोग विशेषज्ञों का अभाव दूर होगा। फिलहाल, सदर अस्पताल के एसएनसीयू में डॉक्टरों की कमी के कारण बच्चें व उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालांकि एसएनसीयू में कुछ विशेषज्ञ चिकित्सक बहाल है, लेकिन कई मौकों पर बच्चों और उनके परिजनों का परेशानी का सामना करना पड़ता है। नए डॉक्टरों की बहाली के बाद एसएनसीयू की व्यवस्था में भी सुधार के आस जगे हैं। फिलहाल, एसएऩसीयू की कई मशीनें महीनों से खराब पड़ी है। बहाल डॉक्टरों की लगातार बने रहने पर इन मशीनों को भी दुरुस्त किया जा सकेगा।

स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी गति, लाभांवित होगी जनता

पिछली जनगणना के बाद जिले की आबादी में तेजी से इजाफा हुआ है। दस वर्षों में जिले की जनसंख्या करीब 07 से 08 करोड़ बढ़ी हैं। लेकिन आबादी के अनुपात में सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवा में बढ़ोत्तरी नहीं की गई। हाल के दिनों में जिले के सरकारी अस्पतालों में रिक्तियों की संख्या में भी वृद्धि हुई। बड़ी संख्या में स्वास्थ्य़कर्मी सेवानिवृत हुए। लेकिन उनकी जगह नए डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मी की बहाली नहीं हुई। इन सबका सीधा असर स्वास्थ्य सेवा पर पड़ा। मरीजों को मिलनेवाली स्वास्थ्य सुविधाओं में कमी आयी। जिसके कारण लोगों ने निजी चिकित्सा संस्थानों का रूख किया। जहां मरीज और उनके परिजनों का लगातार आर्थिक दोहन होता रहा है। कई मौकों पर मरीज को जान तक गंवानी पड़ी है। फिलहाल, जिले में एकसाथ 106 चिकित्सकों की पदस्थापना से स्वास्थ्य सुविधाओं में काफी हद तक सुधार के आसार बन रहे हैं।

वर्जन

बिहार तकनीकी सेवा आयोग ने सूबे के सरकारी अस्पतालों में 3186 चिकित्सा पदाधिकारियों को औपबंधिक तौर पर बहाली की है। नवादा जिला के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में 106 सामान्य चिकित्सा पदाधिकारियों को प्रतिनियुक्त किया गया है। इनमें 88 डॉक्टरों ने पदभार ग्रहण कर लिया है। जिला स्वास्थ्य विभाग रोगियों की सेवा में सदैव तत्पर रहा है। नए डॉक्टरों की बहाली से ग्रामीण स्तर पर भी मरीजों को स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी।

डॉ. अशोक कुमार, प्रभारी सिविल सर्जन, नवादा

30 एपीएचसी में बहाल किए गए है डॉक्टर

जिले के 30 एडिशनल पीएचसी में 60 की संख्या में डॉक्टर बहाल किए गए हैं। वारिसलीगंज के अपसढ़, कोचगांव, चकवाय टोलाबिगहा और मिल्की, कौआकोल के बड़राजी, बरौन और फुलडीह, काशीचक के बौरी, लालबिगहा और मधेपुर, नरहट के डेढ़गांव, खनवां और पुनौल, अकबरपुर के जलालपुर, माखर, नेमदारगंज और पचरूखी, सदर प्रखंड के नेया, पथरा ईंग्लिश, कादिरगंज और ओढ़नपुर, सिरदला के कुशाहन व लौंद, रोह के मरुई और साथे, हिसुआ के मंझवे, पकरीबरावां के धमौली, नारदीगंज के डोहरा, रजौली के बसरौन और मेसकौर के रसलपुरा स्थित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर दो-दो चिकित्सक अब अपनी सेवाएं देंगें।

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