
हजरत ख्वाजा अब्दुल्ला चिश्ती की दरगाह पर हुआ उर्स-ए-ख्वाजा
नवादा के छोटा शेखपुरा में वक्फ संख्या 2301 पर उर्स-ए-ख्वाजा का आयोजन श्रद्धा और सूफियाना माहौल में हुआ। हजारों श्रद्धालुओं ने दरगाह पर हाजिरी लगाई, चादरपोशी की और अमन-चैन व भाईचारे की दुआ मांगी। मुख्य अतिथि फखरुउद्दीन अली अहमद चामो ने समाज में प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। जिले के नरहट प्रखंड के छोटा शेखपुरा में वक्फ संख्या 2301 स्थित दरगाह हजरत ख्वाजा अब्दुल्ला चिश्ती पर आयोजित उर्स-ए-ख्वाजा पूरी श्रद्धा, अकीदत और सूफियाना माहौल के बीच सम्पन्न हुआ। इस पावन अवसर पर दूर-दराज़ से आए हजारों श्रद्धालुओं ने दरगाह पर हाजिरी लगाई, चादरपोशी की, फातिहा पढ़ी और अमन-चैन, भाईचारे तथा अपने-अपने जीवन की खुशहाली के लिए मुरादें मांगीं। इस ऐतिहासिक और रूहानी आयोजन के क्रम में मुख्य अतिथि जिला सुन्नी वक्फ बोर्ड नवादा के चेयरमैन फखरुउद्दीन अली अहमद चामो ने कहा कि उर्स जैसे आयोजन समाज को जोड़ने, नफरत को मिटाने और प्रेम, सेवा व भाईचारे की भावना को मजबूत करने का काम करते हैं।
उन्होंने दरगाह की रिवायती और साझा विरासत को संजोए रखने और सामाजिक सौहार्द को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उर्स के दौरान दरगाह परिसर या ख्वाजा… या ख्वाजा… की सदाओं से गूंज उठा। सूफी परंपरा की रूहानियत ने हर दिल को छुआ और यह संदेश दिया कि इबादत के साथ इंसानियत, प्रेम और सद्भाव ही असल रास्ता है। उर्स में सभी समुदायों के लोगों की सहभागिता ने गंगा-जमुनी तहजीब को एक बार फिर जीवंत कर दिया। शिविर के आयोजक शमीम उद्दीन अंसारी, सदस्य जिला औकाफ कमेटी नवादा समेत साजिद हुसैन ने उर्स के ऐतिहासिक और रूहानी महत्व पर प्रकाश डाला। मौके पर शेखपुरा पैक्स अध्यक्ष सह मुखिया प्रतिनिधि सत्येंद्र सिंह, नरहट मुखिया एहतेशाम कैसर गुड्डू, जमुआरा मुखिया संजय सिंह समेत तहसीन आलम, महबूब काजमी, आफताब मंसूरी, ओसामा खालिद, रिजवान अख्तर, हसीबुल रसीद, शमीम नाज, मोहम्मद कैसर आदि मौजूद रहे।

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