
गोविंदपुर के सकरी नदी में बालू खुदाई के दौरान मिली प्रतिमा
नवादा/गोविंदपुर, हिसं/निसं।गोविंदपुर पंचायत के पंच वाहिनी स्थल से सटे सकरी नदी में शनिवार की दोपहर बालू की खुदाई के दौरान भगवान विष्णु की प्रतिमा मिली। तकरीबन तीन फीट ऊंची प्रतिमा मिली है।
नवादा/गोविंदपुर, हिसं/निसं। गोविंदपुर पंचायत के पंच वाहिनी स्थल से सटे सकरी नदी में शनिवार की दोपहर बालू की खुदाई के दौरान भगवान विष्णु की प्रतिमा मिली। तकरीबन तीन फीट ऊंची प्रतिमा मिली है। यह खबर मिलते ही काफी संख्या में ग्रामीण नदी पहुंचे और प्रतिमा का दर्शन किया। ग्रामीणों ने मूर्ति को सावधानी पूर्वक नदी से बाहर निकाला और उसे सराय टोला स्थित शिव मंदिर परिसर में रखा। पूजा-अर्चना के लिए लोगों की भीड़ जुट गई। बताया जाता है कि जेसीबी से सकरी नदी में बालू की खुदाई की जा रही थी। इसी क्रम में भगवान विष्णु की प्रतिमा मिली। यह खबर जंगल में आग की तरह फैल गई और काफी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ वहां पर जुट गई।
ग्रामीणों द्वारा प्रतिमा की पहचान भगवान विष्णु की मूर्ति के रूप में की गई है। इधर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के वरिष्ठ मूर्ति विशेषज्ञ डॉ.जलज कुमार तिवारी ने इस मूर्ति को नागराज का बताया है। बुद्ध स्मृति पार्क संग्रहालय, पटना के प्रभारी सह नवादा के पूर्व क्यूरेटर डॉ.शिव कुमार मिश्र ने बताया कि यह मूर्ति पालकालीन है। उन्होंने बताया कि नारद: संग्रहालय में पहले से भी नागराज की एक मूर्ति है। नालंदा एवं नवादा जिले में पूर्व मे भी नागराज की मूर्तियां मिली हैं। नालंदा के पुरातात्विक संग्रहालय एवं पटना संग्रहालय में भी ऐसी मूर्तियां रखी हुई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नियमानुसार इसे सरकारी संग्रहालय में रखा जाना चाहिए। इन्डियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट 1878 के आलोक में जिला कलेक्टर का यह दायित्व है कि पुरातात्विक साक्ष्य को सरकारी संग्रहालय में जमा कराएं। बिहार पुलिस मैनुअल 1978 के अनुसार भी पुलिस का यह दायित्व है कि इसे संग्रहालय में जमा कराएं। मूर्ति की शुरू हो गयी है पूजा-अर्चना शिव मंदिर परिसर में भगवान विष्णु की प्रतिमा रखते ही महिलाओं का हुजूम उमड़ पड़ा और पूजा-अर्चना शुरू कर दी। ग्रामीणों में प्रतिमा मिलने को लेकर धार्मिक उत्साह तो बढ़ा ही है, साथ-साथ एक पुरातात्विक महत्व की संभावना को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। नदी में खुदाई के दौरान प्रतिमा मिलना क्षेत्र में कौतूहल का विषय बना हुआ है। प्रतिमा जिस पत्थर से बनी है उसे अत्यंत दुर्लभ और बहुमूल्य बताया जा रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि यह मूर्ति सदियों पुरानी हो सकती है और किसी प्राचीन स्थापत्य कला का महत्वपूर्ण अवशेष है।

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