मलमास 17 मई से शुरू, 19 साल बाद ज्येष्ठ माह में होंगे आठ बड़े मंगल
वर्ष 2026 धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, जिसमें ज्येष्ठ माह 59 दिनों का होगा। 17 मई से मलमास प्रारंभ होगा, जिसके कारण हनुमान भक्तों को पूरे आठ बड़े मंगल की पूजा का अवसर मिलेगा। इस दौरान मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा, लेकिन यह आध्यात्मिक उन्नति के लिए सर्वोत्तम समय है।

धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से वर्ष 2026 अत्यंत ही विशिष्ट फलदायी होने वाला है। इस वर्ष पंचांगीय गणना के अनुसार ज्येष्ठ का महीना पूरे 59 दिनों का होगा। इसका मुख्य कारण ज्येष्ठ माह में अधिक मास यानी मलमास का समावेश होना है। आगामी 17 मई से मलमास प्रारंभ हो रहा है, जो 15 जून तक चलेगा। इस खगोलीय और धार्मिक घटनाक्रम के कारण 19 वर्षों के बाद एक ऐसा दुर्लभ संयोग बना है, जिसमें हनुमान भक्तों को पूरे आठ बड़े मंगल की पूजा करने का अवसर प्राप्त होगा।
मांगलिक कार्यों पर रहेगा विराम
नवादा शहर के ज्योतिषाचार्य पंडित धर्मेंद्र झा कहते हैं कि सूर्य और चंद्रमा की गणना में जो अंतर आता है, उसे संतुलित करने के लिए पंचांग में हर तीन साल पर एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास अथवा मलमास कहा जाता है। चूंकि इस मास में सूर्य की संक्रांति नहीं होती, इसलिए इसे मलमास भी कहते हैं। इस अवधि में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, और नामकरण जैसे मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह विराम लग जाता है। हालांकि, यह समय आध्यात्मिक उन्नति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
भगवान विष्णु को समर्पित है यह मास
शास्त्रों के अनुसार, मलमास के स्वामी भगवान विष्णु हैं। पंडित धर्मेन्द्र झा ने बताया कि इस महीने में की गई भक्ति का फल सामान्य महीनों की तुलना में कई गुना अधिक होता है। श्रद्धालु इस दौरान विष्णु सहस्रनाम का पाठ, श्रीमद्भागवत गीता का अध्ययन और भजन-कीर्तन करते हैं। दान-पुण्य के लिए भी यह समय सर्वश्रेष्ठ है।
19 साल बाद आठ बड़े मंगल का महासंयोग
इस वर्ष ज्येष्ठ मास का प्रारंभ 2 मई से हो चुका है, जो 29 जून तक चलेगा। ज्येष्ठ के महीने में पड़ने वाले मंगलवार को बड़ा मंगल कहा जाता है। हनुमान जी की विशेष आराधना के लिए समर्पित इस पर्व में आमतौर पर चार या पांच मंगलवार होते हैं। परंतु, इस बार मलमास के कारण ज्येष्ठ की अवधि बढ़ने से पूरे आठ बड़े मंगल का संयोग बन रहा है। पंडित धर्मेंद्र झा के अनुसार, इससे पहले ऐसा महासंयोग वर्ष 2007 में देखा गया था। अब 19 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा के बाद भक्तों को यह अवसर मिल रहा है। ------------------- राजगीर में होगा 33 कोटि देवताओं का वास नवादा। नवादा से सटे राजगीर का महत्व इस अवधि में विश्वव्यापी हो जाता है। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि शास्त्रों में उल्लेख है कि मलमास के दौरान सभी 33 कोटि देवी-देवता राजगीर के पवित्र कुंडों और पहाड़ियों पर वास करते हैं। नवादा और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु राजगीर के ब्रह्मकुंड में स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करने पहुंचते हैं। श्रद्धालु भक्तों को सलाह देते हुए पंडित धर्मेंद्र झा ने कहा कि इस दौरान हनुमान जी को चोला चढ़ाना, सुंदरकांड का पाठ करना और गरीबों को भोजन कराना विशेष फलदायी होगा। मलमास के दौरान सात्विक जीवन अपनाते हुए निरंतर नाम जप करने से ग्रहों के अशुभ प्रभाव भी शांत होते हैं। नवादा के मंदिरों में भी इस दुर्लभ संयोग को लेकर तैयारियां अभी से शुरू हो गई हैं। -------------------- आठ बड़े मंगल की तिथियां: पहला: 5 मई दूसरा: 12 मई तीसरा: 19 मई चौथा: 26 मई पांचवां: 2 जून छठा: 9 जून सातवां: 16 जून आठवां: 23 जून (नवादा से राजेश मंझवेकर)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


