रास्ते का अभाव बना जी का जंजाल, महादलितों की परेशानी चरम पर

Newswrap हिन्दुस्तान, नवादा
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बिहार के रजौली प्रखंड के सतगिर गांव के रविदास टोला में 20 वर्षों से रास्ते का अभाव है। इससे 500 लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने अधिकारियों के पास शिकायत की, लेकिन समाधान नहीं हुआ है। कुछ लोग रास्ते के निर्माण में बाधा डाल रहे हैं, जिससे गांव में तनाव बढ़ रहा है।

रास्ते का अभाव बना जी का जंजाल, महादलितों की परेशानी चरम पर

रजौली प्रखंड क्षेत्र की जोगियामारण पंचायत के वार्ड संख्या 12 स्थित सतगिर गांव के रविदास टोला में विगत 20 वर्षों से एक अदद रास्ते का अभाव बरकरार है। इस कारण वार्ड के 60 घरों के लगभग 500 लोगों का जीना दूभर हो गया है। वर्तमान के आधुनिक समय में भी इन महादलितों के घर तक मोटरसाइकिल और ई-रिक्शा नहीं जा पा रहा है। रास्ते के अभाव में लोगों की आम जिंदगी बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। ग्रामीण जैसे-तैसे कर समय काट रहे हैं। लेकिन किसी भी आपातकालीन समय में लोगों को खून के आंसू रोने पड़ते हैं। महादलित टोले के छोटे बच्चे बारिश के दिनों में स्कूल तक जाना छोड़ देते हैं, जबकि बड़े बच्चे 500 मीटर के रास्ते में रहे कीचड़ से संघर्ष कर पढ़ाई को विवश रहते हैं।

बीते कई वर्षों से यहां के लोग इस अभाव से उत्पन्न संकट के बीच घुट-घुट कर जीने को मजबूर हैं। रविदास टोला के ग्रामीणों द्वारा मुखिया प्रतिनिधि मुकेश यादव के पास समस्या रखी गई, लेकिन उनके द्वारा व्यापक समाधान अबतक नहीं किया जा सका है। ग्रामीणों ने कहा कि गांव के कुछ दबंग लोग नहीं चाहते हैं कि हमारा विकास हो। इस कारण ही रास्ता का यह मामला अटका पड़ा है। इस कारण गांव में हमेशा तनाव भी बना रहता है। ग्रामीणों ने रास्ते की समस्या को लेकर बीडीओ, सीओ, थानाध्यक्ष आदि को लिखित आवेदन देकर समाधान की मांग रखी है। हालांकि बीडीओ ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए शीघ्र ही रास्ते के लिए दो खेमें में बंट गए हैं लोग रविदास टोला में रास्ता निर्माण को लेकर गांव के लोग दो खेमों में बंट गए हैं। एक तरफ गांव के ही कारू प्रसाद, अशोक प्रसाद, उमेश प्रसाद, सत्येंद्र प्रसाद, रामचंद्र प्रसाद, नंदलाल प्रसाद, इंद्रदेव प्रसाद और उपेंद्र प्रसाद रास्ते के लिए जमीन देने को तैयार हैं, तो दूसरी तरफ भुवनेश्नर प्रसाद, बालो प्रसाद, रामोतार प्रसाद, सकलदीप प्रसाद, उमेश प्रसाद, रामस्वरूप प्रसाद, मनी प्रसाद एवं रंजीत कुमार यादव रास्ता के निर्माण में बाधक बने हुए हैं। काफी खींचतान के बावजूद कोई रास्ता नहीं निकल पाने से एक जरूरी कार्य अटका पड़ा है। ------------------- ग्रामीणों की व्यथा: सभी फोटो नाम से बीते 20 वर्षों से भी अधिक समय से उनके परिजन और गांव के लोग रास्ते को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं, किंतु आजतक कोई समाधान नहीं निकल पा रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी मां की तबियत काफी खराब होने पर बेहद मुश्किल से अपने कंधों पर लादकर अस्पताल लेकर जाना संभव हो सका था। बेहद मुश्किल से वह स्वस्थ हो सकीं। -दिलीप कुमार, स्थानीय ग्रामीण। गांव के कुछ यादव समुदाय के लोगों द्वारा रास्ते को अवरुद्ध कर दिया गया है। इस कारण गर्भवती महिलाओं को खाट आदि पर लादकर सड़क तक ले जाया जाता है। जबकि, बारिश के दिनों में प्रसव के समय तो जच्चा-बच्चा की जान पर बन आती है। सभी लोगों को अपने घरों से निकलना तक दूभर हो जाता है। -शांति देवी, स्थानीय ग्रामीण महिला। बारिश के दिनों में यह गांव पूरे पंचायत से कट कर रह जाता है। बारिश के दिनों में न तो गांव के शादी या अन्य उत्सव में कोई आ पाता है और न ही गांव के लोग किसी रिश्तेदार के घर जा पाते हैं। पहले जमीन परती हुआ करता था,तो आवागमन में दिक्कत नहीं थी। किंतु अब रास्ते इतने संकीर्ण हो गए हैं जीना दुश्वार हो गया है। - कौशल्या देवी, 90 वर्षीया ग्रामीण महिला। कई वर्षों से रास्ता निर्माण को लेकर पगडंडी के दोनों ओर 2-2 फीट जमीन की मांग की जा रही है। जमीन के बदले मुआवजा देने को भी ग्रामीण तैयार हैं, लेकिन आजतक इस पर सहमति नहीं बन पा रही है। कई लोग रास्ते के नाम पर जमीन देने को तैयार हैं, किंतु अनेक लोगों द्वारा बाधा उत्पन्न की जा रही है। -विजय कुमार दास, स्थानीय ग्रामीण। रजौली से राजेश कुमार

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