मोदी सरकार ने सम्राट चौधरी सरकार को दिया झटका, मिट्टी जांच के लिए भेजे प्रस्ताव में कर दी 75% कटौती

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राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मिट्टी जांच की जाती है। इस योजना में केंद्र सरकार 60 फीसदी राशि देती है, जबकि 40 फीसदी राशि राज्य सरकार खर्च करती है। पिछले साल 3 लाख मिट्टी नमूना जांच में 50 हजार प्राकृतिक खेती वाली जमीन की मिट्टी नमूना जांच की गई थी।

Samrat Choudhary Narendra Modi

बिहार के किसानों की मिट्टी जांच के लिए भेजे गए प्रस्ताव पर केंद्र ने झटका दे दिया है। केंद्र सरकार ने बिहार के प्रस्ताव में 75 फीसदी की कटौती कर दी है। राज्य की ओर से 2026-27 में 6 लाख मिट्टी नमूना जांच का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया था। लेकिन केंद्र ने डेढ़ लाख मिट्टी नमूना जांच के लिए मंजूरी दी है। मिट्टी जांच के लिए केंद्र द्वारा प्रस्ताव में कटौती किये जाने के बाद अब कृषि विभाग नये सिरे से जिलावार लक्ष्य तय कर रहा है। जिलावार लक्ष्य तय होने के बाद इसे फिर केंद्र सरकार को भेजेगा।

इसके पहले 2025-26 में बिहार को 3 लाख मिट्टी नमूना जांच का लक्ष्य मिला था। पिछले साल की तुलना में लक्ष्य आधा कर दिया गया है। इससे पहले 2024-25 में 5 लाख मिट्टी नमूना जांच का लक्ष्य रखा गया था। 2023-24 में 2 लाख मिट्टी नमूना जांच का लक्ष्य दिया था। हालांकि, बिहार ने केंद्र द्वारा दिये गये हर साल के लक्ष्य को समय पर पूरा किया है।

केंद्र प्रायोजित योजना में 40 फीसदी राशि राज्य सरकार खर्च करती है

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मिट्टी जांच की जाती है। इस योजना में केंद्र सरकार 60 फीसदी राशि देती है, जबकि 40 फीसदी राशि राज्य सरकार खर्च करती है। पिछले साल 3 लाख मिट्टी नमूना जांच में 50 हजार प्राकृतिक खेती वाली जमीन की मिट्टी नमूना जांच की गई थी। प्राकृतिक खेती वाले मिट्टी की जांच हर साल की जाती है।

जबकि सामान्य खेती के लिए मिट्टी जांच हरेक तीन साल पर करना होता है। मिट्टी जांच से पता चलता है कि इसमें किस पोषक तत्व की कमी है या अधिकता। किसानों को डिजिटल रूप में स्वायल (मिट्टी) हेल्थ कार्ड मिलता है। मिट्टी बिहार एप (biharsoilhelth.in) को भारत सरकार के पोर्टल से लिंक किया गया है। स्वायल हेल्थ कार्ड किसानों के वाट्सएप पर उपलब्ध करा दिया जाता है।

तीन साल की होती है मिट्टी जांच की वैधता

मिट्टी जांच की इसकी वैद्यता तीन साल की होती है। इसमें 106 विभिन्न प्रकार के फसल, फल और सब्जी आदि के लिए उर्वरक की अनुशंसा बता दी जाती है। मिट्टी जांच के आधार पर ही कृषि वैज्ञानिक खेतों में आवश्यक रसायनिक खाद देने की सलाह देते हैं। मिट्टी में कमी के आधार पर खाद का प्रयोग करने से फसल की उत्पादकता बढ़ती है। साथ ही अनावश्यक रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं होता है।

हरेक जिले में है मिट्टी जांच प्रयोगशाला

राज्य के सभी 38 जिलों में मिट्टी जांच प्रयोगशाला है। हरेक प्रमंडल स्तर पर 46 मिट्टी जांच प्रयोगशाला है। 3 रेफरल मिट्टी जांच प्रयोगशाला है। 4 गुण नियंत्रण प्रयोगशाला और 7 बीज परीक्षण प्रयोगशाला हैं।

Nishant Nandan

लेखक के बारे में

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एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे निशांत नंदन डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले इलेक्ट्रॉनिक/प्रसारण मीडिया में लंबे समय तक काम कर चुके हैं। निशांत ने अपने करियर की शुरुआत ETV बिहार से की थी। इसके बाद वो मौर्य न्यूज, आर्यन न्यूज, न्यूज वर्ल्ड इंडिया जैसे संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। साल 2018 में इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के साथ डिजिटल पत्रकारिता का सफर शुरू करने के बाद निशांत साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। निशांत मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। आरा में शुरुआती शिक्षा के बाद इन्होंने नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। और पढ़ें
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