
वन मिनट :: वोटिंग का आधार दलीय नहीं, व्यक्तिपरक होने को युवाओं की प्राथमिकता
फोटो : पंकज जी बिहार विधानसभा चुनाव के मौके पर यह सवाल बड़ा मौजू
फोटो : पंकज जी बिहार विधानसभा चुनाव के मौके पर यह सवाल बड़ा मौजू हो जाता है कि वोटिंग का आधार दलीय हो या व्यक्तिपरक। इस बारे में युवाओं ने अपनी राय बेबाकी से रखी। कहा कि हम युवा देश के भविष्य हैं। इसलिए हमारे उपर ज्यादा जिम्मेदारी है। इस बारे में यहीं कहना है कि व्यक्तिपरक मतदान से ही सबसे योग्य और कुशल व्यक्ति को चुना जा सकता है। इससे राजनेताओं की जवाबदेही बढ़ती है, क्योंकि वे जानते हैं कि उन्हें अपनी जाति के कारण नहीं, बल्कि अपने प्रदर्शन के आधार पर चुना जाएगा। इससे वे बेहतर काम करने के लिए प्रेरित होते हैं।

यह स्पष्ट है कि एक आदर्श लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए मतदान का आधार व्यक्तिपरक होना चाहिए। भारतीय राजनीति में जाति का प्रभाव एक जटिल मुद्दा है, जिसे पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। स्मृति सिंह, भगवानपुर। एक मजबूत लोकतंत्र के निर्माण के लिए, यह आवश्यक है कि मतदाता इन पहचानों से ऊपर उठकर उम्मीदवार की योग्यता, नीतियों और बिहार के विकास के प्रति प्रतिबद्धता के आधार पर निर्णय लें। सनाया गौतम, पताही। जब मतदाता उम्मीदवार की व्यक्तिगत खूबियों के आधार पर मतदान करते हैं, तो यह सुनिश्चित होता है कि सभी समुदायों को समान अवसर मिले और कोई भी वर्ग हाशिए पर न रहे। विशाल कुमार, नीम चौक। वोटिंग का आधार दलीय हो या व्यक्तिपरक इस सवाल के जवाब में मेरा यहीं कहना है कि दलीय आधार पर मतदान मताधिकार नहीं रह जाएगा वह तो विवशता बनकर रह जाएगा। इसलिए व्यक्तिपरक मतदान सर्वोपरि है। अमर कुमार पंखा टोली। जब मतदाता जाति से प्रभावित हुए बिना वोट देते हैं, तो यह राजनीतिक दलों को जातिगत आधार पर राजनीति करने की बजाय विकास और कल्याणकारी नीतियों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करता है। वर्षा रानी, भगवानपुर। व्यक्तिपरक मतदान से सबसे योग्य और कुशल व्यक्ति को चुना जा सकता है। यह उम्मीदवार के अनुभव, ईमानदारी और नेतृत्व क्षमता जैसे गुणों पर ध्यान केंद्रित करता है, जो देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। व्यक्तिपरक मतदान से राजनेताओं की जवाबदेही बढ़ती है, क्योंकि वे जानते हैं कि उन्हें अपनी जाति के कारण नहीं, बल्कि अपने प्रदर्शन के आधार पर चुना जाएगा। इससे वे बेहतर काम करने के लिए प्रेरित होते हैं। सुष्मिता कुमारी, कांटी। उम्मीदवार की व्यक्तिगत खूबियों के आधार पर मतदान करने से सभी समुदायों को समान अवसर मिलते हैं और कोई भी वर्ग हाशिए पर न रह पाता है। आंचल कुमारी, मार्कन। हम तो यहीं कहना चाहेंगे कि जब बात राज्य व देश की हो तो अपना स्वार्थ छोड़कर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। मैं व्यक्तिपरक मतदान को ही प्राथमिकता दूंगा। अनुराज कुमार, आमगोला। मतदाता दलीय आधार पर वोटिंग की बातों को नजरअंदाज कर स्वविवेक से निर्णय लें। उम्मीदवार की योग्यता, नीतियों और देश के विकास के प्रति प्रतिबद्धता के आधार पर वोट करें। रोहित कुमार सिंह, पारू। व्यक्तिपरक मतदान को प्राथमिकता देने के कई कारण हैं। इससे नीति-आधारित शासन कार्य करता है। उसकी जवाबदेही राज्य व देश के प्रति और बढ़ जाती है। प्रियाशु, मुजफ्फरपुर।

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