World famous tourist spot of crusher in possession of encroachment - अतिक्रमणकारियों के कब्जे में कोल्हुआ का विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल DA Image

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अतिक्रमणकारियों के कब्जे में कोल्हुआ का विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल

सरैया प्रखंड के कोल्हुआ स्थित विश्व प्रसिद्ध अशोक स्तंभ अधिकारियों के उदासीन रवैये के कारण उपेक्षा का दंश झेल रहा है। विदेशी पर्यटकों की दृष्टि से जिले का एक मात्र पर्यटन स्थल आजादी के सात दशक बाद भी सुविधाओं से महरुम है।

प्रवेश द्वार पर अबैध दुकानदारों द्वारा किया गया अतिक्रमण व विदेशी सैलानियों को जबरन सामान खरीदने के लिए दबाव बनाया जाना तथा बिजली पानी की समस्या यहां की सबसे बड़ी समस्या है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में विदेशी पर्यटक आते हैं, जिनकी सुरक्षा की जवाबदेही एक मात्र चौकीदार के सहारे है। यहां विदेशी पर्यटकों के लिए दो सौ और भारतीय पर्यटकों के लिए 15 रुपये प्रवेश शुल्क रखा गया है। इसके हिसाब से महीने में लाखों रुपये की आमदनी होती है। उसके बाद भी सुविधा भगवान भरोसे होना पर्यटकों को काफी खलता है।

अतिक्रमणकारियों की जोर जबरदस्ती

अशोक स्तंभ परिसर में घुमने और भगवान बुद्ध की आराधना के लिए आने वाले पर्यटकों को सबसे अधिक परेशानी अतिक्रमणकारियों के कारण होती है। प्रवेश द्वार के दोनों किनारों पर गुमटी व टेंट लगाकर धड़ल्ले से खोली गई दुकानों के कारण गाड़ियां गेट तक नहीं पहुंच पाती हैं। आने-जाने वाले पर्यटकों को दुकानदार जबरन आठ से 10 गुणा अधिक दामों में सामान खरीदने का दबाव बनाते हैं। सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण पर्यटक चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते हैं।

काफी जद्दोजहद के बाद भी यहां पार्किंग की व्यवस्था नहीं हो पाई है। मजबूरन पर्यटकों को मुख्य सड़क के इर्द गिर्द गाड़ियां लगाकर पैदल ही गेट तक जाना पड़ता है। जबकि पार्किंग के लिए जमीन अधिग्रहण करने संबंधी आदेश की फाइल कार्यालय में धूल फांक रही है।

वैशाली में बिजली विभाग की ओर से स्पेशल बौद्ध फीडर की स्थापना की गई। लेकिन दुर्भाग्य की आज तक भगवान बुद्ध की प्रियस्थली तक बिजली नहीं पहुंच पाई है। परिसर में बने शौचालय की साफ सफाई अच्छी नहीं होने के कारण पर्यटकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

जानकारी हो की अशोक स्तंभ का निर्माण मौर्य वंश के तीसरे शासक सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म स्वीकार करने के बाद बौद्ध धर्म के सबसे बड़े व शक्तिशाली केन्द्र माने जाने वाले वैशाली के परिक्षेत्र स्थित कोल्हुआ में करवाया था।

बयान::::

विश्व के बौद्ध धर्मावलंबी जिन दो जगहों के दर्शन के लिए वैशाली आते है उसमें से पहला बुद्ध का रैलिक स्तूप और दूसरा है कोल्हुआ। यहां न स्तरीय शौचालय है न पेयजल और नहीं सुरक्षा व्यवस्था। -डॉ. विजय सुमन, शोधकर्ता

पर्यटन की दृष्टि से कोल्हुआ का अशोक स्तंभ बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है। इसका समुचित विकास नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। अतिक्रमण के कारण पर्यटकों को परेशानी होती है। -मृत्युंजय कुमार शाही

अशोक स्तंभ के विकास के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों ने आश्वासन दिया। अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई नहीं होने से स्थिति ज्यादा खबरा है। डीपीआर भी बना लेकिन सब कागज पर ही रह गया। -मोतीलाल शुक्ला

कोल्हुआ से अतिक्रमण हटाने, बिजली की व्यवस्था करने आदि के लिए कई बार प्रस्ताव पारित हुआ लेकिन आज तक कुछ भी नहीं हुआ। इससे पर्यटकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। -रौशन कुमार

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