
ब्रेल केवल लिपि नहीं, जीवन की रोशनी है : डॉ. शिवाजी
मुजफ्फरपुर में विश्व ब्रेल दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. शिवाजी कुमार ने ब्रेल लिपि के जनक लुई ब्रेल के संघर्ष और योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने दृष्टिबाधितों के लिए शिक्षा, सूचना और सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन पर जोर दिया। कार्यक्रम में 60 से अधिक विशेष बच्चे उपस्थित थे।
मुजफ्फरपुर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। विश्व ब्रेल दिवस के अवसर पर रविवार को रामदयालु नगर स्थित सेमिनार हॉल में एक संगोष्ठी हुई। इसमें बतौर मुख्य अतिथि पूर्व राज्य आयुक्त नि:शक्तता डॉ. शिवाजी कुमार ने कहा कि ब्रेल केवल लिपि नहीं, यह दृष्टिबाधितों के लिए जीवन की रोशन है। रानी लक्ष्मीबाई महिला विकास समिति द्वारा संचालित सफल विशेष विद्यालय व छात्रावास तथा मुजफ्फरपुर पीडब्ल्यूडी संघ के संयुक्त तत्वावधान में संगोष्ठी हुई। मुख्य अतिथि डॉ. शिवाजी ने ब्रेल लिपि के जनक लुई ब्रेल के जीवन, संघर्ष एवं ऐतिहासिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि लुई ब्रेल का जन्म चार जनवरी 1809 को फ्रांस के कूपव्रे गांव में हुआ था।
एक दुर्घटना के कारण बाल्यावस्था में ही वे दृष्टि बाधित होने के बावजूद अदम्य साहस का परिचय देते हुए मात्र 15 वर्ष की आयु में छह-बिंदु आधारित नई लिपि का विकास किया। उसी का नाम ब्रेल लिपि हुआ जिसने विश्वभर के दृष्टिबाधितों के जीवन को नई दिशा दी। उन्होंने समावेशी शिक्षा, सुलभ सूचना, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 तथा केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया। अध्यक्षता पीडब्ल्यूडी संघ के जिला कार्यक्रम समन्वयक लालू तुरहा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन कमला देवी ने किया। मौके पर संस्था की अध्यक्ष मैरी सिन्हा, कोषाध्यक्ष उषा मनाकी, दीपांजलि, संगीता कुमारी, दृष्टिबाधित छात्र अमन सोनी, मंटू कुमार, सीमा कुमारी, संतोष निराला तथा विशेष छात्र अभिज्ञान भारद्वाज, प्रत्यूष, शिवम कुमार सहनी, प्रिंस राज, उत्कर्ष मौर्य सहित 60 से अधिक दृष्टिबाधित एवं विशेष बच्चे उपस्थित रहे।

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