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23 सितम्बर, 2020|3:02|IST

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वूमेन इक्वलिटी डे : शिक्षा से जेंडर गैप को पाटने में जिले की बेटियां आगे

कक्षा तीन में लड़कों की संख्या 60043, लड़कियां 58369, कक्षा चार में यह आंकड़ा 68324 और 67657 का। कक्षा पांच में लड़के 68 हजार तो बेटियां 69612।  9वीं-10वीं तक आते-आते यह आंकड़ा 36 हजार, 39 हजार और 34 हजार 38 हजार का। कक्षा 12वीं तक आते-आते बेटों की संख्या 5 लाख 65 हजार तो बेटियों की संख्या 5 लाख 70 हजार 472 पर पहुंच जाती है।
तीन साल पहले यह अंतर महज सैकड़ा में होता था। शिक्षा के जरिए जेंडर गैप को इस तरह से पाटने में जिले की बेटियां सूबे में कई जिले से आगे हैं। कक्षा बढ़ने के साथ कम संख्या में रहने वाली बेटियों की संख्या अब बेटों से अधिक हो रही है। कक्षा एक से पांच तक कम संख्या में रहने वाली बेटियों की संख्या कक्षा छह के बाद 2-4 हजार तक अधिक हो रही है।
पूर्वी चंपारण, भागलपुर, शिवहर समेत अन्य जिलों में बेटियों की संख्या बेटों से कम हो रही है। वहीं, जिले में कक्षा एक से 12वीं तक 5 लाख 65 हजार बेटे हैं तो बेटियों की संख्या 5,70,472 पर पहुंच गई है। सूबे के सीतामढ़ी, वैशाली, गया में भी बेटियों की कुल संख्या बेटों से 2-3 हजार अधिक है। शिक्षाविदों के अनुसार बेटियां अपनी पढ़ाई पूरी करने के प्रति गंभीर हैं। ऐसे में कक्षा बढ़ने के साथ ही यह आंकड़ा भी बदल रहा।

साइकिल, पोशाक समेत अन्य योजनाओं के साथ ही सोच भी बदल रही
शिक्षाविद् शशिकांत झा, डॉ. फुलगेन पूर्वे कहते हैं कि पिछले कुछ सालों में साइकिल, पोशाक समेत अन्य योजनाओं की वजह के साथ बदलती सोच का भी यह परिणाम है। स्कूलों में लड़के बीच में पढ़ाई छोड़ दे रहे। वहीं, लड़कियां अपनी पढ़ाई पूरी करने के प्रति गंभीर हैं। डीईओ अब्दुसलाम अंसारी कहते हैं कि 10वीं और 12वीं के बाद भी बच्चियों को कई योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। इसका भी एक सकारात्मक असर है।

जिले जहां लड़कियों की संख्या लड़कों से आगे
गया: लड़के 4 लाख 70 हजार 27 तो लड़कियां 4 लाख 72 हजार 192
वैशाली: 3 लाख 43 हजार 346 तो लड़कियां 3 लाख 46 हजार
सीतामढ़ी: 4 लाख 4 हजार 711 तो लड़कियां 4 लाख 6 हजार 663

 

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  • Web Title:Women Equality Day : District daughters ahead in bridging the gender gap with education