
राजनीति विज्ञान में 6 सहायक प्राध्यापकों की पोस्टिंग रोकी
मुजफ्फरपुर में विश्वविद्यालय सेवा आयोग द्वारा राजनीति विज्ञान में 60 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की गई थी, लेकिन 6 की पोस्टिंग दस्तावेजों में कमी के कारण रोक दी गई है। तीन सहायक प्राध्यापक अनुपस्थित रहे और एक का दस्तावेज समय पर नहीं मिला। विवि प्रशासन ने दस्तावेजों की जांच के लिए कमेटी का गठन किया है।
मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता विश्वविद्यालय सेवा आयोग की तरफ से राजनीति विज्ञान में नियुक्त 60 सहायक प्राध्यापकों में 6 सहायक प्राध्यापकों की पोस्टिंग विवि प्रशासन ने रोक दी है। बीआरएबीयू के रजिस्ट्रार प्रो समीर कुमार शर्मा ने बताया कि छह सहायक प्राध्यापकों के दस्तावेजों में कमी थी, इसलिए इन शिक्षकों की पोस्टिंग रोकी गई है। 60 सहायक प्राध्यापकों में तीन उपस्थित नहीं हुए और एक का दस्तावेज देर से मिला। बाकी शिक्षकों की पोस्टिंग कर दी गई है। विवि सूत्रों के अनुसार अनुपस्थित रहने वाले तीन सहायक प्राध्यापकों के दस्तावेजों पर भी शक जाहिर की जा रही है। विवि प्रशासन ने पांच से आठ जनवरी तक राजनीति विज्ञान के सहायक प्राध्यापकों के दस्तावेजों की जांच के लिए कमेटी का गठन किया गया था।
बीआरएबीयू में इससे पहले भी होम साइंस और अंग्रेजी में दस्तावेज पूरे नहीं होने पर सहायक प्राध्यापकों की पोस्टिंग रोकी गई है। कॉलेज में पद नहीं, दे दिया अनुभव प्रमाण पत्र बीआरएबीयू में चल रहे अनुभव प्रमाण पत्रों की जांच में एक नया मामला सामने आया है। जिस संबद्ध कॉलेज में शिक्षक का पद ही नहीं है, उस कॉलेज ने सहायक प्राध्यापक पद के अभ्यर्थी को अनुभव प्रमाण पत्र दे दिया। इतना ही नहीं, विवि प्रशास ने उसे पास कर विवि सेवा आयोग को भी भेज दिया। इसके बाद अभ्यर्थी को अनुभव में आयोग से 10 में 10 अंक भी मिल गए। सूत्रों ने बताया कि संबद्ध कॉलेजों में भी शिक्षक के पद को विवि के सिंडिकेट और सीनेट से अनुमोदित कराना पड़ता है। लेकिन, जिस संबद्ध कॉलेज से अनुभव प्रमाण पत्र जारी किया गया, वहां शिक्षक का पद ही अनुमोदित नहीं था। विवि से जुड़े लोगों का कहना है ऐसे कई मामले हैं जहां बिना पद के ही अनुभव प्रमाण पत्र बांट दिए गए हैं और अभ्यर्थी बीआरएबीयू समेत अन्य विवि में पढ़ा भी रहे हैं। प्राध्यापकों की जांच में लग रही सिफारिश की छौंक बीआरएबीयू में चल रही सहायक प्राध्यापकों की जांच में सिफारिश का छौंक लगा है। विवि में सहायक प्राध्यापकों की जांच को एक कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी 2020 से 2025 तक हुए सहायक प्राध्यापकों के अनुभव प्रमाण पत्रों की जांच कर रही है। सूत्रों ने बताया कि सहायक प्राध्यापकों की जांच में बख्श देने के लिए कई लोग सिफारिश कर रहे हैं और सदस्यों को अपना होने की दुहाई दे रहे हैं। इसके अलावा नव नियुक्त सहायक प्राध्यापकों की पोस्टिंग के लिए भी विवि प्रशासन के पास सिफारिश फोन पहुंच रहे हैं। नये नियुक्त सहायक प्राध्यापक मुख्यालय में ही रहना चाहते हैं, खासकर मुजफ्फरपुर या हाजीपुर। ग्रामीण क्षेत्र के कॉलेजों से वह दूरी बना रहे हैं।

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