जेल में फांसी स्थल पर शहीद खुदीराम बोस को किया नमन
मुजफ्फरपुर में शहीद खुदीराम बोस की 115वीं शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। अधिकारियों ने जेल में उनकी सेल पर माल्यार्पण किया और फांसी स्थल पर पौधा लगाया। शहीद के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए...

मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। जेल गेट सोमवार तड़के तीन बजे खुला। 18 साल की उम्र में देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर चढ़ जाने वाले अमर शहीद खुदीराम बोस के प्रति दिल में श्रद्धा लिए लोगों ने जेल में प्रवेश किया। प्रमंडलीय आुयक्त, डीआईजी, डीएम, एसएसपी समेत बड़ी संख्या में अधिकारियों की टीम जेल में पहुंची। रंगीन बल्बों और हुमाद की खुशबू जेल में चारों ओर फैली हुई थी। वार्ड की खिड़कियों से बंदी झांक कर देख रहे थे। अधिकारियों की टीम पहले शहीद खुदीराम बोस के सेल पर पहुंची। अंदर जाने से पहले उन्होंने अपने जूते उतारे।
देश के लिए शहादत देने वाले शहीद के प्रति हर दिल में अकीदत है। सेल में रखे शहीद के चित्र पर फूल-माला अर्पित किया गया। इसके बाद सभी फांसी स्थल पर गए। वहां मद्धिम आवाज में एक बार विदाई दे मां घुरे आसी, हांसी-हांसी परबो फांसी, देखबे जोगोत वासी.. का रिकॉर्ड बज रहा था। अमर शहीद ने सूली पर चढ़ने से पहले यही गीत गाया था और वंदे मातरम कहते हुए फांसी पर झूल गए थे। 11 अगस्त, 1908 की अहले सुबह 3:50 बजे अमर शहद खुदीराम बोस को फांसी दी गई थी। शहीदी दिवस पर ठीक उसी समय पर अधिकारियों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण किया और मौजूद लोगों ने राष्ट्र गीत गाया और दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद अधिकारियों की टीम जेल परिसर स्थित पार्क में पहुंचे। यहां अमर शहीद की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। मेदिनापुर से लाई गई मिट्टी में फांसी स्थल पर पौधा लगाया गया। काली मंदिर का प्रसाद अर्पित किया गया। कार्यक्रम में तिरहुत प्रक्षेत्र के कमिश्नर राज कुमार, डीआईजी चंदन कुशवाहा, डीएम सुब्रत सेन, एसएसपी सुशील कुमार, ग्रामीण एसपी राजेश सिंह प्रभाकर, सिटी एसपी कोटा किरण कुमार, एएसपी टाउन सुरेश कुमार, मिठनपुरा थानाध्यक्ष जन्मेजय समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
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