Thousands of business people not giving income-correct papers - आय-व्यय के सही कागजात नहीं दे रहे हजारों कारोबारी DA Image

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आय-व्यय के सही कागजात नहीं दे रहे हजारों कारोबारी

आय-व्यय के सही कागजात नहीं दे रहे हजारों कारोबारी

उत्तर बिहार के कारोबारियों के खाता-बही व्यवस्थित नहीं हैं। ज्यादातर कारोबारी अपने खर्च व आय से संबंधित सही कागजात नहीं दे रहे हैं। आयकर विभाग ने मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, मधुबनी, सीतामढ़ी, दरभंगा, शिवहर, पूर्वी व पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सीवान व सारण के 17 हजार कारोबारियों का आंतरिक ऑडिट किया है। इस ऑडिट के लिए कारोबारियों के संबंधित चार्टर्ड अकाउंटेंट की ओर से ही सही से कागजात नहीं दिए जा रहे हैं। इस कारण 17 हजार में से 30 फीसदी करदाताओं की ऑडिट में गड़बड़ी सामने आयी है।

यह गड़बड़ी निकट भविष्य में लापरवाह कारोबारियों पर भारी पड़ सकती है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, सीधे सालाना आय एक से तीन करोड़ की जानकारी दी जाती है। इसमें बच्चों के खर्चों के साथ लग्जरी मद में खर्च की राशि की सूचना दी जाती है। आयकर के प्रावधान के अनुसार, आय कहां से हुई व इसकी जानकारी के साथ जिस मद में खर्च कर रहे हैं उस प्रॉडक्ट की कंपनी व ब्रांड के नाम कागजात में नहीं दे रहे हैं। टैक्स प्रोफेशनल इसको एक परंपरा बना चुके हैं। किस कंपनी की कार खरीदी और क्या ब्रांड है, इसकी जानकारी देनी चाहिए। इसको आयकर विभाग की भाषा में शेड्यूल बोलते हैं। इसको लेकर मुजफ्फरपुर के प्रधान आयकर आयुक्त डीसी बेनुपानी ने काफी संख्या में चार्टर्ड अकाउंटेंट व टैक्स प्रोफेशनलों को ऑडिट में सही कागजात के साथ जानकारी देने को कहा है। साथ ही उन्हें कई निर्देश भी दिए है। उन्होंने कहा कि इससे करदाताओं को लाभ होगा। सही से एसेसमेंट होगा। करदाता कई कार्रवाई से बच सकेंगे। ऑडिट में बड़े करदाताओं के लेखा-जोखा की जांच होती है। कागजात नहीं रहने पर आपत्ति होती है। इसके अनुसार उनको फिर टैक्स देना पड़ता है। इस समस्या से बच जाएंगे। यदि बच्चा किसी कोचिंग, स्कूल में पढ़ रहा है तो उन शैक्षणिक संस्थानों का नाम देना अनिवार्य हैं। इसी तरह अन्य लग्जरी आयटम की जानकारी देनी है। इनके कागजात देने होंगे।

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