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मुजफ्फरपुरमदद करने वालों की इबादत होती है कबूल

हिन्दुस्तान टीम,मुजफ्फरपुरPublished By: Newswrap
Sun, 02 May 2021 10:10 PM
मदद करने वालों की इबादत होती है कबूल

माह-ए-रमजान अल्लाह की इबादत के साथ इंसानियत का ख्याल रखने का मौका देता है। रोजेदार गरीबों को मदद करते हैं। आम-अवाम की खुशहाली के लिए दुआ मांगी जाती है। यह फरमाते हुए कमरा मोहल्ला निवासी ऑल इंडिया शिया पसर्नल लॉ बोर्ड के सदस्य सैयद यावर हुसैन बयान करते हैं कि माह-ए-रमजान के 30 दिनों तक लगातार रोजा रखकर रोजेदार खुद को पाक व नेक बनाता है।

इंसानियत को मजबूत बनाने के लिए एक दूसरों की मदद की जाती है। गरीबों का विशेष ख्याल रखा जाता है। गरीब लोगों की मदद भी इबादत का हिस्सा माना जाता है। रोजेदार सैयद यावर हुसैन बताते हैं कि बड़ी अफसोस की बात है कि दुनिया व हमारा मुल्क कोरोना महामारी से जुझ रहा है। इस मुश्किल घड़ी में इंसानियत की हिफाजत के लिए बड़ी संख्या में मदद के लिए हाथ बढ़ने लगे है। अल्लाह मदद करने वालों की इबादत जरूर कबूल करता है। कोरोना बीमारी को खत्म करने के लिए प्रोटोकॉल पालन करने की गुजारिश की जा रही है।

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