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अपनी बुराई को दुरुस्त करने वाला ही होता कामयाब इंसान

अपनी बुराई को दुरुस्त करने वाला ही होता कामयाब इंसान

हम नेक बनकर समाज को खुशहाल बना सकते हैं। हमें अपने अंदर की बुराई को खत्म करना होगा। ये बातें लखनऊ से आए मौलाना उरूज उल हसन मिसम ने रविवार को ब्रह्मपुरा स्थित मीर हसन वक्फ एस्टेट के बड़ा इमाम बाड़ा में कही। वे यहां आयोजित मजलिस-ए-चेहल्लुम में खिताब फरमा रहे थे। मौलाना ने कहा कि हर इंसान में अच्छाई और बुराई, दोनों होती हैं। लेकिन, जिसे दूसरों से ज्यादा अपने अंदर की बुराई दिखती है और उसे दुरुस्त करने का जज्बा होता है वही कामयाब इंसान होता है। अल्लाह को इंसाफ करने वाला मानना ईमान की निशानी है। अल्लाह को जालिम नहीं मानना ही असल ईमान है।

मौलाना ने कहा कि इस्लाम किसी के चेहरे व वेशभूषा को पसंद नहीं करता। इस्लाम अच्छे किरदार को पसंद करता है। जिसका चरित्र अच्छा होगा, लोग उसकी ओर खुद आकर्षित होंगे। उन्होंने पैगंबर मुहम्मद साहब की पुत्री हजरत फातमा के मसायब को बड़े ही मार्मिक अंदाज में पेश किया। मौके पर मौलाना निहाल हैदर, मौलाना वकार अहमद, मौलाना हैदर अब्बास, मौलाना गुलजार अहसन, मौलाना जैगम अब्बास, तनवीर रजा विक्टर समेत बड़ी तादाद में लोग मौजूद थे। लोगों ने मरहुमा की मगफिरत की दुआएं की। मरहुमा के बेटों हुसैन मूसा रिजवी जॉन, आबिद मूसा रिजवी जॉन व परिवार के अन्य लोगों को ताजियत पेश की।

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