The millions of crops ruining the wild animals, the peasants being beaten head - जंगली जानवर बर्बाद कर रहे लाखों की फसल, किसान पीट रहे माथा DA Image
16 दिसंबर, 2019|7:08|IST

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जंगली जानवर बर्बाद कर रहे लाखों की फसल, किसान पीट रहे माथा

जंगली जानवर बर्बाद कर रहे लाखों की फसल, किसान पीट रहे माथा

आजकल जिले के कई इलाकों में किसानों की स्थिति खराब है। उनकी रातों की नींद और दिन का चैन गायब है। कड़ी मेहनत से उपजाई गई फसल नीलगाय बर्बाद कर रही हैं। ग्रामीण इलाकों में नीलगाय का उपद्रव इतना बढ़ गया है कि किसान रात ही बल्कि दिन में भी जगकर अपने फसलों की रखवाली कर रहे हैं। कई इलाके में जंगली सुअरों का भी आतंक बढ़ गया है। फसल बर्बादी की शिकायत किसान अंचल से लेकर जिला तक के अधिकारी से कर चुके हैं। फिर भी समस्या का हल नहीं निकल सका है।

बता दें कि नीलगाय और अन्य जंगली जानवर के उपद्रव रोकने के लिए जिले में डीएम की अध्यक्षता में कमेटी बनी हुई है जो निर्णय लेती है कि जंगली जानवर के उपद्रव से किसानों की फसल कैसे बचाई जाएग। एसडीएम उपद्रव कम करने के लिए जंगली जानवरों को मरवाने का लाइसेंस दे सकते हैं। लेकि

हर दिन हजारों की फसल हो रहा है बर्बाद : नीलगाय हर दिन हजारों रुपये की खड़ी फसल बर्बाद कर रही हैं। केला का बागीचा हो या आलू की खेत, मटर का खेत हो या सरसों, गेहूं की खेत हर तरफ किसानों का फसल बर्बाद हो रहा है। मदद के लिए दौड़ते किसानों को अधिकारी बरगला रहे हैं। उन्हें एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भेजा जा रहा है। किसान राजनन्दन बताते है कि उन्हें सीओ कार्यालय में केला की फसल बर्बाद होने की सूचना दी, वहां उन्हें बागवानी मिशन भेजा गया। जब वे बागवानी मिशन पहुंचे तो उन्हें यह कहते हुए कृषि विभाग भेज दिया कि उनका यह मामला नहीं है। कृषि अधिकारी ने उन्हें नीलगाय से फसल बर्बाद होने पर क्या करना चाहिए यह बताया, उसके बाद वह वन प्रमंडल और स्थानीय सीओ को फसल क्षति मुआवजा देने का आवेदन दिया है।

मुआवजे का है प्रावधान: नीलगाय व जंगली सुअर से फसल नुकसान होने पर मामला वन प्रमंडल का बनता है। वन प्रमंडल के पास फसल नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा का प्रावधान है। एक हेक्टेयर पर 25 हजार रुपये दिया जाता है। जंगली जानवर के कारण मौत होने पर 5 लाख पीड़ित परिवार को मुआवजा मिलता है।

बोले अधिकारी

नीलगाय से फसल बर्बाद हो रही है, इसकी जानकरी मिली है। संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर फसल बचाव को लेकर निर्णय लिया जाएगा। फसल अगर नुकसान हो रहा है तो वह वन प्रमंडल में आवेदन कर मुआवजा लेने की प्रक्रिया पूरी करें।

-धर्मेंद्र सिंह, डीएम

जिन किसानों का फसल बर्बाद हो रहा है वे अपने स्थानीय अंचल अधिकारी व वन प्रमंडल कार्यालय में आावेदन दें। सीओ को तीन दिनों में जांच रिपोर्ट सौंपनी है। रिपोर्ट के आधार पर किसानों को मुआवजा मिलेगा।

-पातंजलि चौधरी, वन प्रमंडल

बोले किसान

केला की फसल तैयार हो गई थी तब नीलगाय ने इसे बर्बाद कर दिया। फसल तैयार करने में एक लाख से अधिक की लागत आई थी। जब कमाने की बारी आई तो फसल बर्बाद हो गई। फसल तैयार करने में पूरा परिवार लगा रहा।

-राजनन्दन राय, कुढ़नी

दो एकड़ में हमने गेहूं,मक्का और आलू का फसल लगाया था। नीलगाय और जंगली सुअरों ने बर्बाद कर दिया है। कई कार्यालयों में मुआवजे के लिए आवेदन दिया है। मुआवजा तो दूर बर्बाद फसल को देखने के लिए भी अधिकारी नहीं आए।

-सुनील कुमार सिंह, सरैया

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