शिक्षकों को नहीं मिल रहा उनका हक : विधान पार्षद
मुजफ्फरपुर में विधान पार्षद वंशीधर ब्रजवासी ने शिक्षा निदेशकों से मिलकर शिक्षकों को चिकित्सा, मातृत्व, और शिशु देखभाल अवकाश से वंचित रखने की समस्या उठाई। उन्होंने कहा कि 23 वर्षों से काम कर रहे शिक्षकों की प्रोन्नति पर विभाग गंभीर नहीं है और वित्त रहित शिक्षा नीति के अंतर्गत सहायक कर्मचारियों के वेतनमान का निर्धारण भी नहीं हुआ है।

मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। सेवा निरंतरता का लाभ मिलने के बाद भी चिकित्सा, शिशु देखभाल अवकाश से शिक्षक वंचित हैं। इन समस्याओं को लेकर विधान पार्षद वंशीधर ब्रजवासी ने मंगलवार को प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर और माध्यमिक शिक्षा उपनिदेशक अब्दुस सलाम अंसारी से मुलाकात की और समाधान की मांग की।विधान पार्षद ने अधिकारियों से कहा कि राज्य में पिछले 23 वर्षों से कार्यरत नियोजित शिक्षकों सहित विशिष्ट शिक्षकों, विद्यालय अध्यापकों और प्रधान शिक्षकों की प्रोन्नति के लिए विभाग गंभीर नहीं है। जिन विशिष्ट शिक्षकों, विद्यालय अध्यापकों और प्रधान शिक्षकों को राज्य सरकार द्वारा सेवा निरंतरता का लाभ दिया जा चुका है, उन्हें चिकित्सा अवकाश, मातृत्व अवकाश, अध्ययन अवकाश, शिशु देखभाल अवकाश जैसे अवकाशों से वंचित किया जा रहा है।सहायकों
के लिए अबतक नहीं हुआ वेतनमान निर्धारणविधान पार्षद व्रजवासी ने कहा कि सरकार द्वारा वित्त रहित शिक्षा नीति की समाप्ति के लिए गठित समिति भी अबतक अपनी रिपोर्ट नहीं दे सकी है। नतीजतन वित्त रहित शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी राज्य सरकार का मुंह ताक रहे हैं। अनुकंपा के आधार पर नियुक्त विद्यालय सहायक एवं परिचारियों के लिए अब तक वेतनमान का निर्धारण नहीं किया जा सका है। प्रधान शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर करने के लिए बार-बार मांग उठ रही है, लेकिन निराकरण नहीं किया जा सका है।शिक्षा विभाग की कार्यशैली से विधान पार्षद आहतमांगों की पूर्ति के लिए विभाग से बार-बार पत्राचार किया जा रहा है, लेकिन विभाग न तो कोई ठोस कार्रवाई कर रहा है और न ही पत्रों का जवाब दे रहा है। संसदीय कार्य व्यवस्था के अंतर्गत किसी भी माननीय सदस्य के पत्र का 15 दिनों के अंदर प्रति उत्तर दिया जाना है। शिक्षा विभाग की मनमानी चरम पर है।
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