मृत घोषित कर मांग रहे जीवित होने का प्रमाण, पेंशन पाने वाले बुजुर्ग परेशान
मुजफ्फरपुर में कई बुजुर्गों की पेंशन कागजी त्रुटियों के कारण बंद हो गई है। वे जीवित होते हुए भी मृत घोषित किए गए हैं। पेंशनधारी अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा। पेंशन प्रणाली को सरल बनाने और घर बैठे जीवन प्रमाणीकरण की व्यवस्था की मांग की जा रही है।
मुजफ्फरपुर। व्यवस्थागत त्रुटि ने जिन व्यक्तियों को मृत मान लिया, वे अफसरों के सामने खड़े होकर गुहार लगा रहे हैं कि हुजूर हम जिंदा हैं, लेकिन कागजी सबूत के बिना वे जीवित नहीं माने जा रहे। यह हाल है जिले में बुजुर्गों को पेंशन देने की व्यवस्था की। पेंशनधारियों को जीवन प्रमाणीकरण के लिए भटकना पड़ रहा है। बंद पेंशन चालू नहीं हो पा रही है। जिले में कई पेंशनधारी हैं, जिनका केवाईसी नहीं होने से पेंशन बंद है। जब वे इसकी जांच किसी सीएससी केन्द्र पर जाकर करवाते हैं तो उनके नाम के सामने मृत घोषित किया हुआ दिखता है।
पेंशनधारियों ने बताया कि शिकायत करने पर विभाग के कर्मी अपनी गलती मानने की बजाए हमें ही दोषी करार देते हुए सबूत जमा करने की सलाह देते हैं। कई बुजुर्गों की दूसरे कारणों से पेंशन बंद है, लेकिन वे विभागीय कार्यालय और बैंक के बीच झूल रहे हैं। इनकी मांग है कि पेंशन देने की व्यवस्था सुगम हो और बुजुर्गों को घर बैठे कागजात संबंधी सुधार की सुविधा मिलनी चाहिए। कागजी त्रुटियों के कारण जिले के बुजुर्गों की पेंशन बंद है। इसके कारण उनके सामने भोजन और दवा की समस्या खड़ी हो गई है। बसौली के जमादार सहनी ने बताया कि मुझे पूर्व से पेंशन मिल रही थी, मगर बाद में बंद हो गई। कारण का सही पता नहीं चल पा रहा था। जब प्रखंड जाता था तो बैंक जाने को कहा जाता था और बैंक वाले प्रखंड कार्यालय भेज देते थे। दोनों तरफ दौड़ता रहा, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। बाद में कहा गया कि आपका बैंक खाता आधार से लिंक नहीं था, इसलिए आपकी पेंशन बंद हो गई है। आधार से खाता लिंक कराकर आएं तो पैसा मिलने लगेगा। इतनी दौड़भाग से पहले बता दिए होते तो इतनी परेशानी नहीं झेलनी पड़ती। इस प्रक्रिया में मुझे आठ माह दौड़-भाग करनी पड़ी। हाल में मेरी एक माह की पेंशन आई है। हालांकि सात माह का पेंशन भुगतान बकाया है। कई बार प्रखंड की दौड़ लगाई मगर बकाया पेंशन नहीं मिली है। मोरनिष्फ के मो. इलियास ने बताया कि मैं 67 वर्ष का हूं। अबतक मुझे पेंशन नहीं मिली है। कई बार आवेदन कर चुका हूं, लेकिन पास नहीं हुआ। दिसंबर में फिर से आवेदन किया हूं, मगर अभी तक पेंशन स्वीकृत नहीं हुई। इसके लिए प्रखंड के चक्कर काट रहा हूं। बसौली की इंदिरा देवी ने बताया कि मेरी आयु 71 वर्ष हो चुकी है। चलने-फिरने में असमर्थ हूं। पेंशन जीवन प्रमाणीकरण के लिए कुछ ऐसी व्यवस्था हो, जिससे घर में रहते हुए जीवन प्रमाणीकरण हो जाए। घर से दो किलोमीटर दूर एक सीएसी केन्द्र पर किसी प्रकार घर के लोग ऑटो पर बैठाकर लाए तो केवाईसी करा सकी।
दस दिन चक्कर काटा तो हो पाया केवाईसी
तुर्की चैनपुर निवासी सहीन्द्र महतो ने बताया कि केवाईसी पहले प्रखंड में होता था। बाद में सीएससी केन्द्र पर चालू हुआ तो खुशी हुई कि अब सुविधा होगी, मगर सीएससी केन्द्रों पर सर्वर धीमा रहने से समस्या और बढ़ गयी। लगातार सीएससी केन्द्र पर जाता था, मगर केवाईसी नहीं हो पाता था। इसके कारण काफी परेशानी हुई। सरकार को इसके लिए कुछ आसान सुविधा देनी चाहिए, ताकि वृद्ध पेंशनधारी को केवाईसी कराने में कोई दिक्कत न हो। वहीं, मोरनिष्फ के सूर्यदेव साह ने बताया कि जनवरी में केवाईसी कराया मगर पेंशन नहीं मिली। जब प्रखंड में विभाग के कर्मचारी से बात की तो बताया कि पेंशन फरवरी से मिलेगी। जनवरी में केवाईसी नहीं हुआ था, इसलिए पेंशन नहीं मिली।
पेंशन बंद करने से पूर्व परिवार को मिले सूचना
कुढ़नी के जिला परिषद सदस्य प्रियंका कुमारी का कहना है कि वृद्ध पेंशनधारियों को मृत बताकर उन्हें बेवजह परेशान किया जाता है। पेंशन बंद करने से पहले कारण बताते हुए लाभुक के परिवार को इसकी सूचना दी जानी चाहिए। व्यवस्थागत त्रुटि को विभाग को दूर करना चाहिए। प्रत्येक पंचायत में पंचायत सचिव, राजस्व कर्मचारी, किसान सलाहकार, बीएलओ के अलावा जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, मुखिया, वार्ड सदस्य, पंच के रहते हुए पेंशन लाभुक को मृत घोषित कर दिया जा रहा है। यह तो विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही है, जिसके कारण गरीब वृद्धजनों को पेंशन के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। इसमें अविलंब सुधार होना चाहिए।
सीएससी संचालक भी कर रहे गड़बड़ी
सरकार ने पेंशन राशि चार सौ से बढ़ाकर 1100 रुपए कर दी है। इससे लाभुकों को राहत तो जरूर मिली है, मगर पेंशन पाने के लिए परेशानी अब भी दूर नहीं हो पा रही है। वृद्धावस्था, विधवा और विकलांग पेंशन पाने वाले लाभुक विभाग और सीएससी केन्द्र का चक्कर काट रहे हैं। कुढ़नी चढुआं के सीएसी संचालक सुशील कुमार, केरमा के सीएसी संचालक अमर कुमार ने बताया कि केंद्र पर प्रतिदिन 10-12 ऐसे लाभुक पहुंच रहे हैं, जिनको किसी न किसी प्रकार की समस्या है। पढ़े-लिखे लाभुक अपनी पेंशन बैंक जाकर प्राप्त कर ले रहे हैं, लेकिन जो पढ़े-लिखे नहीं हैं और सीएससी पर आधार कार्ड से थंब इम्प्रेशन के जरिये पेंशन पा रहे हैं, उनके साथ कई केंद्रों पर गड़बड़ी की शिकायतें आ रही हैं। अधिकतर महिला पेंशनधारियों के साथ गड़बड़ी हो रही है। वे सीएसीसी पर पेंशन लेने जाती हैं और उनकी पेंशन राशि पहले ही निकल चुकी होती है। जब वे बैंक में पता करने जाती हैं तो बताया जाता है कि आपका पैसा निकल चुका है। कुछ लाभुकों ने बताया कि नाम और आयु में त्रुटि के कारण उन्हें पेंशन नहीं मिल पा रही है। वे कागजी त्रुटि के कारण पेंशन पाने से वंचित हैं। इधर, विभागीय अधिकारी इसको लेकर जागरूक होने और संबंधित अधिकारी, बैंक एवं प्रखंड कार्यालय में जाकर अपनी परेशानी बताने की बात कहते हैं। केरमा की रामसखी देवी ने बताया कि सरकार ने पेंशन राशि चार सौ रुपए से बढ़ाकर 1100 रुपए तो कर दी है, लेकिन इन पैसों से परिवार का खर्च और अपनी दवा का जुगाड़ करना काफी मुश्किल है। इसी तरह मुरादपुर के मो. हलीम ने बताया कि मेरी आयु 63 वर्ष हो चुकी है। वृद्धावस्था पेंशन के लिए आवेदन देने के बावजूद नहीं पास हुआ। क्या कारण है, इसकी भी जानकारी नहीं मिल सकी है। पंचायत से लेकर प्रखंड तक के चक्कर काट रहे हैं। केवल आश्वासन मिल रहा है। सीएससी संचालक ने फिर से आवेदन करने की सलाह दी है।
साक्ष्य जमा कर दूर करा सकते हैं समस्या
जीवन प्रमाणीकरण में त्रुटिवश किसी लाभुक को मृत घोषित कर दिया गया हो तो वे अपने प्रखंड विकास पदाधिकारी से मिलें। साक्ष्य जमा कर समस्या दूर कर सकते हैं। शहर के पेंशनधारी हैं तो जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग में साक्ष्य देकर समस्या का समाधान करा सकते हैं। इसके बाद तत्काल पेंशन चालू कर दी जाएगी। जीवन प्रमाणीकरण के लिए कोई अंतिम तिथि निर्धारित नहीं है। लाभुक किसी भी सीएससी केन्द्र या वसुधा केन्द्र पर जाकर पेंशन के लिए जीवन प्रमाणीकरण करा सकते हैं। इसके अलावा अगर किसी भी प्रकार की समस्या आ रही हो तो लाभुक जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग कार्यालय में आकर बताएं, तत्काल समाधान होगा।
-अभिषेक कुमार, सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा कोषांग
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