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बेजुबानों की जुबान थे सुरेश अचल, शोषितों के लिए करते रहे संघर्ष

बेजुबानों की जुबान थे सुरेश अचल, शोषितों के लिए करते रहे संघर्ष

छोटी सरैयागंज में सुरेश अचल मार्ग स्थित स्मारक स्थल पर रविवार को सुरेश अचल की 26वीं पुण्यतिथि ससमारोह मनाई गई। लोगों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। समारोह का आयोजन स्व. सुरेश अचल स्मारक समिति की ओर से किया गया। अतिथियों का स्वागत समिति के महामंत्री व पूर्व उपमहापौर विवेक कुमार ने किया। समारोह का संचालन समिति के अध्यक्ष प्रो. डॉ. गणेश कुमार ने किया। वक्ताओं ने सुरेश अचल के व्यक्तित्व व कृतित्व की चर्चा की। कहा कि अचल जी जीवन भर समाज के शोषितों, पीड़ितों व अपेक्षितों के हित में संघर्ष करते रहे। वे अबोलो के बोल व बेजुबानों की जुबान थे। वे समाजवादी आंदोलन के प्रखर नेता भी थे। इसी क्रम में लोकनायक जयप्रकाश नारायण, जननायक कर्पूरी ठाकुर व जार्ज फर्नांडिस से उनका बड़ा ही घनिष्ठ जुड़ाव रहा। सुरेश अचल के क्रांतिकारी विचारों की छाप तब की पत्रिका बिहार डाक के संपादकीय आलेख व उनकी कविताओ में स्पष्ट झलकती है। उनकी सादगी ऐसी थी कि वे अपने जीवन काल में अपने कविताओं के संग्रह को प्रकाशित करने का प्रयास नहीं किए।

सुरेश अचल के पुत्र विवेक कुमार ने उनकी कविताएं ‘धूप की संस्कृति नामक पुस्तक में प्रकाशित करायी। मौके पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह, नगर विकास व आवास मंत्री सुरेश कुमार शर्मा, पूर्व मंत्री रमई राम, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग अध्यक्ष प्रो. भगवानलाल सहनी, सांसद अजय निषाद, मेयर सुरेश कुमार, पूर्व सांसद अनिल सहनी, विधायक केदार गुप्ता, विधायक बेबी कुमारी, जिप अध्यक्ष इन्द्रा देवी, पयावरणविद् सुरेश गुप्ता, चैम्बर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष मोतीलाल छापड़िया, पं. विनय पाठक, रेडक्रॉस के सचिव उदय शंकर प्रसाद सिंह, पूर्व कुलपति रिपूसूदन प्रसाद श्रीवास्तव भी उपस्थित थे।

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  • Web Title:Suresh Aalchal the struggles doing exploitation for the exploited