बांग्ला नाटक कुरुक्षेत्रे शेषे देख मुग्ध हुए दर्शक
मुजफ्फरपुर के वीणा कंसर्ट क्लब में बांग्ला नाटक 'कुरुक्षेत्रे शेषे' का मंचन हुआ। यह नाटक कौरव और पांडवों की पीड़ा को दर्शाता है और युद्ध से शांति की अनुपस्थिति को दर्शाता है। नाटक के लेखन और निर्देशन शिउली भट्टाचार्य ने किया, जबकि संगीत रबीन दास ने दिया। क्लब के सभापति ने शिउली को सम्मानित किया।

मुजफ्फरपुर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। हरिसभा चौक स्थित वीणा कंसर्ट क्लब में रविवार को बांग्ला नाटक कुरुक्षेत्रे शेषे का मंचन हुआ। क्लब के 120वें स्थापना दिवस पर आयोजित दो दिवसीय नाट्योत्सव के दूसरे दिन क्लब के सदस्यों आपने बेहतरीन अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। नाटक का लेखन तथा निर्देशन शिउली भट्टाचार्य ने किया। संगीत कोलकाता से आए रबीन दास ने दिया। मंच और लाइट की व्यवस्था उज्ज्वल कुमार दास और अमरनाथ चटर्जी ने किया।नाटक में कुरुक्षेत्र के युद्ध के उपरांत कौरव और पांडव पक्ष की पीड़ा का कलाकारों ने मार्मिक चित्रण किया। नाटक के जरिए यह बताया गया कि युद्ध से कभी भी शांति नहीं आ सकती।
नाटक में किशार कुमार गुहा ने विशेष मार्गदर्शन दिया। किरदारों में झूमा दास, चन्दना गुहा, नीला बोस, अपर्णा चटर्जी, शुक्ला बोस, अनिता घोष, तनुश्री, रंजीता चक्रबर्ती, दुर्गा पद दास, मृणाल कांति सिन्हा, सुकांत बनर्जी, अर्पण बोस, अनिकेत घोष, अयन बोस, शुभाशीष बोस, मंगलमय लाहिरी शामिल थे। बाल कलाकार उज्जवल, आयुष, निशांत, रिशव और शिवम थे। मीडिया प्रभारी अंनिकेत घोष ने बताया कि नाटक के समाप्ति के उपरांत क्लब के सभापति प्रबीर कुमार मित्रा ने शियुली भट्टाचार्य को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। अंत में धन्यवाद मनीषा दत्ता ने किया।
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