
देश-दुनिया में चमक रहे मुजफ्फरपुर से निकले सितारे
संक्षेप: मुजफ्फरपुर के छात्र हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा से चमक रहे हैं। कई प्रशासनिक पदों, डॉक्टरी, और विज्ञान में योगदान दे रहे हैं। आशुतोष ने इसरो के चंद्रयान प्रोजेक्ट में काम किया, शिवांगी पहली महिला पायलट बनी और अनामिका ने साहित्य में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई। इन छात्रों ने अपने शहर का नाम रोशन किया है।
मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। देश-दुनिया में आज मुजफ्फरपुर से निकले सितारे चमक रहे हैं। साधारण परिवार में जन्मे यहां के छात्र हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का डंका बजा रहे हैं। कई प्रशासनिक पदों पर हैं तो कई बड़े डॉक्टर से लेकर वैज्ञानिक तक बने। यही नहीं, यहां के स्कूल-कॉलेजों ने साहित्यकार, नेता और अभिनेता भी दिए हैं। जिले के सरकारी स्कूल में पढ़ कर आशुतोष वैज्ञानिक बने, जिन्होंने इसरो के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट चन्द्रयान में शामिल होकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तो डीएवी से पढ़ कर शिवांगी नौसेना की देश की पहली महिला पायलट बनी। मुजफ्फरपुर के छात्र प्रत्यय अमृत आज बिहार सरकार के चीफ सेक्रेटरी हैं तो यहां के छात्र मोहित कुमार यूपीएससी उतीर्ण कर आज कॉरपोरेट अफेयर्स में महत्वपूर्ण पद पर हैं।

मुजफ्फरपुर की छात्रा फलक ने अभिनय की दुनिया में अपना मुकाम बनाया है, जिनकी शॉर्ट फिल्म चंपारण मटन ऑस्कर के फाइनल के लिए नामित हुई थी। इसी शहर की छात्रा रही साहित्यकार अनामिका को कौन नहीं जानता। साहित्य अकादमी पुरस्कार पाने वाली अनामिका लेखन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जानी जाती हैं। इसी तरह स्लम एरिया से निकले सुनील फेकानिया अपने नाट्य अभिनय के लिए देश के साथ विदेशों में भी जाने जाते हैं। ऐसे नामों की फेहरिस्त लंबी है। बीबी कॉलेजिएट के छात्र भामा एटोमिक रिसर्च सेंटर में वैज्ञानिक इसरो के चंद्रयान प्रोजेक्ट से महत्वपूर्ण रूप से जुड़े और वर्तमान में भामा एटोमिक रिसर्च सेंटर में बतौर साइंटिस्ट कार्यरत आशुतोष कहते हैं कि अपनी 10वीं तक की पढ़ाई कांटी और शहर के बीबी कॉलेजिएट सरकारी स्कूल से की। मेरे साइंटिस्ट बनने की नींव यहीं से पड़ी। स्कूल में प्रयोग करने के दौरान आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। आशुतोष कहते हैं कि हमसे पहले भी मुजफ्फरपुर के स्कूलों से इतने छात्र छात्राएं महत्वपूर्ण पद पर गए हैं कि उनके पथ से ही आगे बढ़ने का रास्त मिला। पिता सरकारी स्कूल में शिक्षक, स्कूल ने ही रखी आगे बढ़ने की नींव पिता चैपमैन गर्ल्स स्कूल में सालों शिक्षक रहे। यहीं से मेरे कुछ करने की नींव पड़ी। यूपीएससी करने वाले मोहित कहते हैं कि पिता मदन चौधरी ने अनुशासन का पाठ पढ़ाया। प्रारंभिक पढ़ाई प्रभात तारा स्कूल से हुई। तैयारी भी खुद से की और आज इस मुकाम पर पहुंचा हूं। अभिनय की दुनिया में धूम मचाने वाली फलक खान कहती हैं कि मुजफ्फरपुर में केवल एकेडमिक नहीं, बल्कि मेरी अभिनय की पढ़ाई भी सही मायने में यहीं हुई। आज फलक अभिनय के साथ निर्देशन की दुनिया में भी कदम रख चुकी हैं। चैपमैन से एलएस कॉलेज तक पढ़ाई, पूरी दुनिया में साहित्य लेखन में छाई स्त्री विमर्श की कविताओं और अपने लेखन के लिए मशहूर डा. अनामिका की पढ़ाई चैपमैन से लेकर एलएस कॉलेज तक में हुई है। वे कहती हैं कि मेरी कविताएं और कहानी, यहां के स्कूल-कॉलेज और गलियों की देन हैं। इनकी कविता में इस शहर की छाप भी मिलती है। साझा चूल्हा, चुरदुरी हथेलियां जैसी रचनाएं इनकी अलग पहचान हैं।

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