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नहीं रहे प्रसिद्ध लेखक-विचारक सच्चिदा बाबू

नहीं रहे प्रसिद्ध लेखक-विचारक सच्चिदा बाबू

संक्षेप:

प्रखर समाजवादी विचारक और लेखक सच्चिदानंद सिन्हा का 98 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार गुरुवार को मनिका में किया जाएगा। सच्चिदानंद बाबू ने समाजवाद के प्रति अपने जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दिया और कई किताबें लिखीं। उनके निधन पर अनेक लेखकों और कार्यकर्ताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

Nov 20, 2025 05:30 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मुजफ्फरपुर
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मुजफ्फरपुर, वरीय संवाददाता। प्रखर समाजवादी विचारक और लेखक सच्चिदानंद सिन्हा का 98 वर्ष की उम्र में बुधवार की दोपहर निधन हो गया। उन्होंने मिठनपुरा स्थित अपने छोटे भाई प्रभाकर कुमार की नेपाली कोठी पर अंतिम सांस ली। सच्चिदानंद सिन्हा का जन्म साहेबगंज प्रखंड के परसौनी ग्राम में 30 अगस्त 1928 को हुआ था। हालांकि, बाद के दिनों में वे मुशहरी प्रखंड के मनिका गांव में रहने लगे थे। वे परिचितों और शुभचिंतकों के बीच सच्चिदा बाबू के नाम से प्रसिद्ध थे। अविवाहित रहे सच्चिदा बाबू स्वास्थ्य कारणों से पिछले दो महीने से अपने भाई के आवास पर रह रहे थे। प्रभाकर कुमार ने बताया कि अंतिम संस्कार गुरुवार को मनिका में किया जाएगा।

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सच्चिदा बाबू तीन भाइयों और तीन बहनों में सबसे बड़े थे। उनके पिता ब्रजकिशोर सिंह साहेबगंज से कांग्रेस विधायक रहे। सच्चिदा बाबू छात्र जीवन में ही समाजवाद की तरफ आकृष्ट होकर सोशलिस्ट पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता हो गए थे। वे पटना साइंस कॉलेज में बीएससी की पढ़ाई बीच में छोड़कर धनबाद चले गए, जहां कोलियरी में मजदूरों के बीच रहकर उनके जीवन का अध्ययन किया। वे विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेख लिखते रहे। राममनोहर लोहिया ने उनके एक लेख से प्रभावित होकर उन्हें अपनी पत्रिका मैनकाइंड का संपादक बनाया था। ताउम्र समाजवाद से जुड़ चलाते रहे कलम : सच्चिदानंद सिन्हा के करीब पांच दशक से करीबी रहे जगत नारायण राय ने बताया कि लोहिया से जुड़कर सच्चिदा बाबू जार्ज फर्नांडिस सहित कई बड़े नेताओं के संपर्क में आए और ताउम्र समाजवाद से जुड़कर जिंदगी के विभिन्न आयामों पर अपनी कलम चलाते रहे। इस दौरान उन्होंने राजनीतिक, सामाजिक, पर्यावरण, प्रकृति और बच्चों से जुड़ीं करीब तीन दर्जन पुस्तकों का लेखन किया। श्रद्धांजलि देने वालों का लगा तांता : सच्चिदा बाबू के निधन की खबर सुनकर मिठनपुरा स्थित आवास पर लेखकों, कार्यकर्ताओं, शिक्षकों का तांता लग गया। श्रद्धांजलि देने वालों में भाकपा माले नेता दीपांकर भट्टाचार्य, राजनीतिक विश्लेषक योगेन्द्र यादव, अरविंद वरुण, प्रमोद कुमार, विश्व आनंद, डॉ. प्रमोद कुमार, आरडीएस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. शशिभूषण कुमार, डॉ. रमेश ऋतंभर, वीरेन नंदा, डॉ. विकास नारायण उपाध्याय, शाहिद कमाल, नीरज सिंह, हेमनारायण विश्वकर्मा सहित अन्य लोग शामिल रहे।