ईश्वर में विश्वास से असंभव भी संभव हो जाता : कृष्ण भारद्वाज
मुजफ्फरपुर में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथावाचक कृष्ण भारद्वाज ने शुकदेव और नारद मुनि के जन्म का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि दृढ़ संकल्प और ईश्वर में विश्वास से असंभव भी संभव हो सकता है। ध्रुव की कथा युवाओं के लिए प्रेरणा है। कथा में महिलाओं और पुरुषों की अच्छी भागीदारी देखी गई।

मुजफ्फरपुर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। नॉर्थ बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को कथावाचक कृष्ण भारद्वाज ने शुकदेव जन्म, नारद मुनि जन्म एवं श्रीमद्भागवत के प्रथम अध्याय का वर्णन किया। उन्होने कहा कि दृढ़ संकल्प, संयम और ईश्वर में विश्वास हो तो असंभव भी संभव हो जाता है।
ध्रुव की कथा
कथावाचक ने कहा कि ध्रुव की कथा बच्चों और युवाओं के लिए प्रेरणा है। इसके साथ ही कपिलोप स्थान एवं ध्रुव चरित्र का भावपूर्ण प्रसंग सुनाया। इससे पूर्व मुख्य यजमान के रूप में रितु भरतीया, टीशा भरतीया, रूपा मुरारका एवं श्रवण मुरारका ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर व्यास पीठ का पूजन किया। कथावाचक ने बताया कि नारद मुनि का जीवन भक्ति, तप और भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। कथावाचक ने कहा कि सच्ची भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती और भगवान अपने भक्तों की पुकार अवश्य सुनते हैं। ध्रुव चरित्र के प्रसंग में बताया गया कि बालक ध्रुव ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अटूट तप और भक्ति के बल पर भगवान विष्णु को प्रसन्न कर अमर स्थान प्राप्त किया।
कथा में सहभागिता
मीडिया प्रभारी विकास पोद्दार ने बताया कि कथा के दौरान महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों की भागीदारी भी अच्छी संख्या में हो रही है, जिससे जनमानस का भागवत कथा के प्रति प्रेम पता चलता है। कथा में संतोष देवी केजरीवाल, रितु पोद्दार, ममता भामी, खुशी शर्मा, किरण तुलस्यान, आयुष सर्राफ, अशोक जैन, विष्णु अग्रवाल, रमेश भामी, सुधीर चौधरी एवं शुभम केजरीवाल ने सहयोगी के रूप में सहभागिता निभाई।
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