परंपरागत शिक्षा व्यवस्था स्थापित करने के हो रहे प्रयास
मुजफ्फरपुर में शुक्रवार को एमआईटी में संस्कृत प्रमाणपत्र वितरण समारोह का आयोजन किया गया। प्रो. मृत्युंजय झा ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था के विलुप्त होने की बात की और संस्कृत के डिजिटल प्लेटफॉर्म की आवश्यकता बताई। विद्यार्थियों को प्रेरित किया गया कि वे संस्कृत अध्ययन के माध्यम से भारतीय परंपरा और आधुनिक शिक्षा को जोड़ें।

मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। एमआईटी में शुक्रवार को संस्कृत प्रमाणपत्र वितरण समारोह का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन प्रो. मृत्युंजय झा ने कहा कि भारत की परंपरागत शिक्षा व्यवस्था धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। इसे पुनः स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। एक ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म एवं वेबसाइट के निर्माण पर कार्य किया जा रहा है, जिसके माध्यम से देश-विदेश का कोई भी व्यक्ति कहीं से भी संस्कृत की शिक्षा प्राप्त कर सकेगा।
संस्कृत का महत्व
उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल धार्मिक अथवा पारंपरिक अध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक शिक्षा के प्रत्येक क्षेत्र में उसका महत्वपूर्ण योगदान है। एमआईटी के प्राचार्य प्रो. मिथिलेश कुमार झा ने कहा कि संस्कृत भारतीय संस्कृति, दर्शन एवं वैज्ञानिक चिंतन की आधारशिला है। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्कृत अध्ययन के माध्यम से भारतीय परंपरा एवं आधुनिक तकनीकी शिक्षा के बीच समन्वय स्थापित करने को प्रेरित किया।
प्रमाणपत्र वितरण
इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के संस्कृत अध्ययन केंद्र के सत्र 2024-25 में उत्तीर्ण विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र प्रदान किया गया। आकृति कुमारी, रौशन कुमार एवं आशुतोष कुमार ने संस्कृत शिक्षा को ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक तथा व्यक्तित्व विकास के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि इस प्रकार के पाठ्यक्रम विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिदध हो रहे हैं। डॉ. मनोज कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
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लेखक के बारे में
Mrityunjay Kumarशॉर्ट बायो: मृत्युंजय कुमार पिछले 17 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में हेल्थ और हायर एजुकेशन बीट पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं।
परिचय एवं अनुभव
मृत्युंजय कुमार, जिन्हें पत्रकारिता में 17 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में हेल्थ और हायर एजुकेशन की रिपोर्टिंग कर रहे हैं। 2021 से इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने डिजिटल कंटेंट के बदलते ट्रेंड्स और पाठकों की रुचि पर मजबूत पकड़ बनाई है।
करियर का सफर
मृत्युंजय ने अपने करियर की शुरुआत 2009 में हिन्दुस्तान पटना से की। इसके बाद नई दुनिया दिल्ली, अमर उजाला नोएडा और गोरखपुर, हिन्दुस्तान गोरखपुर, दैनिक जागरण पटना, हिन्दुस्तान भागलपुर, प्रभात खबर मुजफ्फरपुर और अब हिन्दुस्तान मुजफ्फरपुर में काम कर रहे हैं। वर्ष 2014 में दैनिक जागरण में इन्हें डिजिटल बिहार प्रभारी बनाया गया। इसके बाद दैनिक जागरण पटना के सिटी जागरण टीम का प्रभारी बनाया गया।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और मेडिकल रिपोर्टिंग
पीजी हिन्दी, दिल्ली विश्वविद्यालय और प्रिंट पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा।
विशेषज्ञता
हेल्थ, एजुकेशन, कला संस्कृति, साहित्य
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