भगवानपुर पुल पर स्ट्रीट लाइटें ‘अंधी’, यहां राहगीरों की रक्षा भगवान भरोसे
मुजफ्फरपुर के भगवानपुर ओवरब्रिज पर 110 स्ट्रीट लाइटें हैं, लेकिन ये जलती नहीं हैं। अंधेरे का फायदा उठाकर अपराधी लूटपाट और छिनतई कर रहे हैं। स्थानीय व्यवसायियों का मानना है कि शराब माफियाओं की गतिविधियों को उजागर करने के लिए लाइटें जलानी जरूरी हैं। नगर निगम ने नई लाइट्स लगाने का भरोसा दिया है।
मुजफ्फरपुर। भगवानपुर ओवरब्रिज पर ‘अंधी’ हो चलीं स्ट्रीट लाइटों के कारण राहगीरों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। पुल पर 110 स्ट्रीट लाइटें लगी हैं, लेकिन दो विभागों की जिच में ये रोशन नहीं हो रही हैं। शाम ढलते ही यहां घुप अंधेरा छा जाता है, जिसका फायदा उठाकर अपराधी आसानी से लूटपाट, छिनतई सहित चोरी की वारदात अंजाम दे रहे हैं। पुल के नीचे भी अंधेरा रहता है, जिसके कारण कई बार दुकानों में चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं। चोर एटीएम तक काटकर ले जा चुके हैं। लगातार वारदात के बावजूद स्ट्रीट लाइट रोशन नहीं हो पा रही हैं। स्थानीय व्यवसायी इसके पीछे शराब माफियाओं की करतूत भी मान रहे हैं।
उनका कहना है कि अगर स्ट्रीट लाइट रोशन हो जाएं तो शराब माफियाओं की करतूत उजाले में आ जाएगी। स्ट्रीट लाइटों के अंधे पड़े रहने से ही उनके व्यवसाय रोशन रहेंगे। लोगों का कहना है कि ओवरब्रिज पर लाइटें जल्द से जल्द दुरुस्त कराई जाएं, ताकि राहगीरों में डर और राहजनी का खौफ न रहे। शहर के भगवानपुर में ओवरब्रिज पर कहने को 110 स्ट्रीट लाइटें लगी हैं, लेकिन ये जलती नहीं हैं। अंधेरे में अपराध बढ़ रहा है। स्थानीय व्यवसायी शंकर चौधरी, अखिलेश कुमार, धर्मेंद्र कुमार आदि ने बताया कि ऐसा नहीं है कि पहले भगवानपुर ओवरब्रिज पर स्ट्रीट लाइटें जलती थीं। जब से ओवरब्रिज बना है, तभी से यहां स्ट्रीट लाइट नहीं जली। स्ट्रीट लाइट लगाने वाली निर्माण कंपनी को पांच साल तक के रखरखाव की जिम्मेवारी थी, लेकिन स्ट्रीट लाइट लगाने के बाद निर्माण कंपनी इसकी देखरेख भूल गई। ओवरब्रिज निर्माण कराने वाले सरकारी एजेंसी के इंजीनियर ने भी कभी इस पर ध्यान नहीं दिया। जब किसी वारदात के बाद हो-हल्ला होता है, तब शहरी इलाके की लाइट को तो निगम ठीक करा देता है, पर ग्रामीण इलाके की लाइटें नहीं दुरुस्त कराई जातीं, जिससे भगवानपुर रेलवे ट्रैक से लेकर यादव नगर तक के मुहाने का करीब 800 मीटर का भाग पूरी तरह अंधेरे में डूबा रहता है। स्ट्रीट लाइटें रोशन नहीं होने के पीछे स्थानीय व्यवसायी माफियाओं की करतूत भी मान रहे हैं।
व्यवसायियों ने बताया कि भगवानपुर ओवरब्रिज के नीचे शाम ढलते ही शराब माफिया सक्रिय हो जाते हैं। रेलवे ट्रैक से लेकर भगवानपुर गोलंबर के पहले तक शाम में शराब की बिक्री जोर पकड़ लेती है। डिलीवरी ब्याय बैग में शराब की खेप लेकर पहुंचते हैं, जिससे शराबी व नशेड़ी खरीदकर अंधेरे में निकल जाते हैं। अगर स्ट्रीट लाइट रोशन हो जाए तो इन शराब माफियाओं की करतूत उजाले में आ जाएगी। व्यवसायियों ने बताया कि ओवरब्रिज के पास ही सदर थाना भी है। कई बार पुलिस शाम के अंधेरे में नशे के चमकते बाजार पर छापेमारी कर चुकी है। यहां से कई बार शराब धंधेबाज और स्मैक के पैडलर पकड़े जा चुके हैं। शराब और स्मैक मिलने के कारण भगवानपुर ओवरब्रिज के नीचे अंधेरे में अपराधियों का भी जुटान होता है। बताया जाता है कि अपराधी सीढ़ी से पुल के ऊपर आते हैं और अक्सर छिनतई व झपटमारी की वारदात अंजाम देते हैं। कई बार शहर से पीछा करते आए अपराधी ओवरब्रिज पर ही छिनतई की घटना को अंजाम दे चुके हैं। व्यवसायियों का मानना है कि सदर थाने की पुलिस प्रयास करे तो संबंधित विभागों से समन्वय बैठाकर स्ट्रीट लाइटों को रोशन करा सकती है। भगवानपुर ओवरब्रिज के नीचे यादव नगर के मुहाने से पहले बीते साल 24 जनवरी 2024 की देर शाम अंधेरे का लाभ उठाकर बाइक सवार आधा दर्जन अपराधियों ने आभूषण दुकान में 15 लाख रुपये के गहने लूट लिए थे। इस दौरान विरोध होने पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई थी। लूट की वारदात को अंजाम देने से पहले अपराधी पुल के नीचे काफी देर तक रुके थे। जब अंधेरा गहराया तो वारदात को अंजाम दिया गया था। तब स्ट्रीट लाइट नहीं जलने और ओवरब्रिज के ऊपर व नीचे अंधेरा रहने को लेकर व्यवसायियों ने पुलिस अधिकारियों के समक्ष आवाज बुलंद की थी। मौके पर पहुंचे सिटी एसपी ने नगर निगम से पहल कर लाइटों को रोशन कराने का भरोसा दिलाया था।
बोले जिम्मेदार :
ऐसा नहीं है कि नगर निगम अपने इलाके की लाइटों को जलवाता है और ग्रामीण इलाके की लाइट को छोड़ दे रहा है। दरअसल भगवानपुर ओवरब्रिज पर लगी स्ट्रीट लाइट का मॉडल काफी पुराना है। उसका स्पेयर पार्ट्स नहीं मिल रहा है। सभी लाइटों के सामान को मिलाकर कुछ लाइटों को ठीक कराया गया था। अब उनके भी खराब होने के कारण पार्ट्स नहीं मिला पाए। इसलिए सशक्त स्थायी समिति की बैठक में इसको लेकर एक प्रस्ताव पास किया गया है, ताकि सभी लाइटों को बदलकर उस पर नए मॉडल की लाइट लगवाई जाए। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया जा चुका है। इसमें तेजी लाने के लिए फिर से अधिकारियों को सूचित किया जाएगा।
निर्मला देवी, मेयर, नगर निगम

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